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Ambala News: हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले हरकत में नप, नोटिस बांटने शुरू
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अंबाला। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले अंबाला छावनी एक्साइज एरिया सहित नगर परिषद के अधिकारी हरकत में आ गए हैं और सदर क्षेत्र में अनधिकृत रूप से सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठे छह हजार 469 कब्जाधारियों को नोटिस बांटने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस कार्य के लिए लगभग 15 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है जोकि नोटिस बनाने से लेकर इसे बांटने का काम करेंगे। इसके लिए दो-दो कर्मचारियों को प्रत्येक क्षेत्र में भेजा जाएगा जोकि संबंधित कब्जाधारी को नोटिस थमाएंगे, अगर इस दौरान कब्जाधारी नोटिस लेने में आनाकानी करेगा तो नोटिस को उसकी दीवार पर चस्पा किया जाएगा। सुबूत के तौर पर जीपीएस संचालित फोटो का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसे सुबूत के तौर पर हाईकोर्ट में दिखाया जा सके। प्राप्त जानकारी अनुसार हाईकोर्ट के निर्देश पर छावनी एक्साइज एरिया के संपदा अधिकारी इस संबंध में कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे कि 21 अक्तूबर को कोर्ट में सुनवाई के दौरान वे अपना पक्ष रख सकें।
तीन हजार पन्नों में दर्ज है नाम
6469 कब्जाधारियों से जुड़ी प्रत्येक जानकारी नगर परिषद कार्यालय के अंदर रखे 10 रजिस्टरों में दर्ज है। इसमें कब्जाधारी का नाम, उसका पता और प्रापर्टी आईडी नंबर सब है। इसमें यह भी जानकारी है कि उसकी संपत्ति कितनी है और उसने कितने हिस्से पर कब्जा किया हुआ है। इसी आधार पर नगर परिषद द्वारा नोटिस तैयार करने का कार्य किया जा रहा है ताकि बिना पक्षपात के कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके। गौरतलब है कि यह खुलासा जनहित में लगाई गई याचिका और सर्वे रिपोर्ट से हुआ है जोकि हाईकोर्ट में सबमिट की गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उक्त कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे हालांकि मामले में अभी सुनवाई लंबित है।
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कैंटोनमेंट का नियम आज भी लागू
हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले पवन कुमार ने बताया कि कैंट सदर की 1066 एकड़ जमीन में कुुछ खाली, कुछ पुरानी तो कुछ लीज की जगह है। इन पर काबिज लोग न इसे बेच सकते हैं और न ही किराए पर दे सकते हैं। इस जमीन पर हरियाणा अर्बन एक्ट 1973 लागू नहीं होता। यह सेना की जमीन 5 फरवरी 1977 को प्रशासनिक कार्यों और प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार को स्थानांतरित की गई थी। इस जमीन पर भारत सरकार और कैंटोनमेंट बोर्ड का नियम आज भी लागू हैं। आरटीआई के माध्यम से दी गई जानकारी में इस जमीन का मालिकाना हक भारत सरकार का बताया गया है। इस मामले को लेकर जब हाईकोर्ट ने संबंधित क्षेत्र का सर्वे करवाने के निर्देश नगर परिषद को दिए गए तो खुलासा हुआ कि 6469 ओल्ड ग्रांट और लीजधारकों की ओर से अनधिकृत तरीके से सरकारी संपत्ति पर कब्जा किया गया है।
यह है पूरा मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार और नगर परिषद सदर को स्थानांतरित की थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट और लीज ग्रांट पर दी थी। इस पर समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली भूमि पर भवन बनाकर स्थायी कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया छावनी के कार्यालय से ज्ञात हुआ है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस सीडब्ल्यूपी नंबर 7771 वर्ष 1999 पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय की ओर से उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने व अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए गए थे। इस संबंध में संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी, उपमंडल अधिकारी (ना.) के कार्यालय द्वारा प्राइवेट कंपनी से सर्वे करवाया गया।
कब्जाधारियों की ये है स्थिति
सर्वे रिपोर्ट के हिसाब से 6469 लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार की भूमि पर भवन बनाकर कब्जा किया हुआ है। इसमें से 5094 लोगों द्वारा, जिनको ओल्ड ग्रांट पर भूमि दी गई थी, उन्होंने अपनी भूमि के साथ लगती 48.19 एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है। वहीं 102 लोगों द्वारा, जिनको लीज पर भूमि दी गई थी, अपनी भूमि के साथ लगती सरकारी 1.30 एकड़ भूमि पर कब्जा किया हुआ है। इसके अतिरिक्त 1194 लोगों द्वारा विभिन्न स्थानों पर 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है।जबकि सरकार द्वारा वर्ष 2003 में कुल 13 कॉलोनियां नियमित की गई थी, जिनकी सीमा के अंदर खाली भूमि पर लोगो द्वारा 7.18 एकड़ भूमि पर कब्जा किया हुआ है। सरकार द्वारा समय-2 पर 97.41 एकड़ भूमि गैर कृषि कार्यों के लिए लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि व 224 प्रोपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि 45 लोगों को कृषि कार्य के लिए लीज पर दी गई थी, जिसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
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इस कार्य के लिए लगभग 15 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है जोकि नोटिस बनाने से लेकर इसे बांटने का काम करेंगे। इसके लिए दो-दो कर्मचारियों को प्रत्येक क्षेत्र में भेजा जाएगा जोकि संबंधित कब्जाधारी को नोटिस थमाएंगे, अगर इस दौरान कब्जाधारी नोटिस लेने में आनाकानी करेगा तो नोटिस को उसकी दीवार पर चस्पा किया जाएगा। सुबूत के तौर पर जीपीएस संचालित फोटो का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसे सुबूत के तौर पर हाईकोर्ट में दिखाया जा सके। प्राप्त जानकारी अनुसार हाईकोर्ट के निर्देश पर छावनी एक्साइज एरिया के संपदा अधिकारी इस संबंध में कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे कि 21 अक्तूबर को कोर्ट में सुनवाई के दौरान वे अपना पक्ष रख सकें।
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तीन हजार पन्नों में दर्ज है नाम
6469 कब्जाधारियों से जुड़ी प्रत्येक जानकारी नगर परिषद कार्यालय के अंदर रखे 10 रजिस्टरों में दर्ज है। इसमें कब्जाधारी का नाम, उसका पता और प्रापर्टी आईडी नंबर सब है। इसमें यह भी जानकारी है कि उसकी संपत्ति कितनी है और उसने कितने हिस्से पर कब्जा किया हुआ है। इसी आधार पर नगर परिषद द्वारा नोटिस तैयार करने का कार्य किया जा रहा है ताकि बिना पक्षपात के कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके। गौरतलब है कि यह खुलासा जनहित में लगाई गई याचिका और सर्वे रिपोर्ट से हुआ है जोकि हाईकोर्ट में सबमिट की गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उक्त कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे हालांकि मामले में अभी सुनवाई लंबित है।
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कैंटोनमेंट का नियम आज भी लागू
हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाले पवन कुमार ने बताया कि कैंट सदर की 1066 एकड़ जमीन में कुुछ खाली, कुछ पुरानी तो कुछ लीज की जगह है। इन पर काबिज लोग न इसे बेच सकते हैं और न ही किराए पर दे सकते हैं। इस जमीन पर हरियाणा अर्बन एक्ट 1973 लागू नहीं होता। यह सेना की जमीन 5 फरवरी 1977 को प्रशासनिक कार्यों और प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार को स्थानांतरित की गई थी। इस जमीन पर भारत सरकार और कैंटोनमेंट बोर्ड का नियम आज भी लागू हैं। आरटीआई के माध्यम से दी गई जानकारी में इस जमीन का मालिकाना हक भारत सरकार का बताया गया है। इस मामले को लेकर जब हाईकोर्ट ने संबंधित क्षेत्र का सर्वे करवाने के निर्देश नगर परिषद को दिए गए तो खुलासा हुआ कि 6469 ओल्ड ग्रांट और लीजधारकों की ओर से अनधिकृत तरीके से सरकारी संपत्ति पर कब्जा किया गया है।
यह है पूरा मामला
वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटाकर हरियाणा सरकार और नगर परिषद सदर को स्थानांतरित की थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट और लीज ग्रांट पर दी थी। इस पर समय बीतने के साथ-2 काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली भूमि पर भवन बनाकर स्थायी कब्जा कर लिया। संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया छावनी के कार्यालय से ज्ञात हुआ है कि उपरोक्त सरकारी भूमि से संबंधित एक केस सीडब्ल्यूपी नंबर 7771 वर्ष 1999 पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। इसमें 19 जनवरी 2024 को न्यायालय की ओर से उपरोक्त 1066 एकड़ भूमि का सर्वे करने व अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने बारे आदेश जारी किए गए थे। इस संबंध में संपदा अधिकारी एक्साइज एरिया अंबाला छावनी, उपमंडल अधिकारी (ना.) के कार्यालय द्वारा प्राइवेट कंपनी से सर्वे करवाया गया।
कब्जाधारियों की ये है स्थिति
सर्वे रिपोर्ट के हिसाब से 6469 लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार की भूमि पर भवन बनाकर कब्जा किया हुआ है। इसमें से 5094 लोगों द्वारा, जिनको ओल्ड ग्रांट पर भूमि दी गई थी, उन्होंने अपनी भूमि के साथ लगती 48.19 एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है। वहीं 102 लोगों द्वारा, जिनको लीज पर भूमि दी गई थी, अपनी भूमि के साथ लगती सरकारी 1.30 एकड़ भूमि पर कब्जा किया हुआ है। इसके अतिरिक्त 1194 लोगों द्वारा विभिन्न स्थानों पर 29.45 एकड़ खाली सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है।जबकि सरकार द्वारा वर्ष 2003 में कुल 13 कॉलोनियां नियमित की गई थी, जिनकी सीमा के अंदर खाली भूमि पर लोगो द्वारा 7.18 एकड़ भूमि पर कब्जा किया हुआ है। सरकार द्वारा समय-2 पर 97.41 एकड़ भूमि गैर कृषि कार्यों के लिए लीज पर दी गई थी, इसमें से 72.76 एकड़ भूमि व 224 प्रोपर्टी की लीज समाप्त हो चुकी है और 130.21 एकड़ भूमि 45 लोगों को कृषि कार्य के लिए लीज पर दी गई थी, जिसकी लीज भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।