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हाईकोर्ट पहुंचा नाबालिग से दुष्कर्म और गर्भपात विवाद
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नाबालिग से दुष्कर्म और फिर जबरन गर्भपात करने का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में 27 जून को नारायणगढ़ महिला थाने में पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था, लेकिन आरोपी को बचाने के लिए महिला थाना प्रभारी और सब इंस्पेक्टर ने शिकायत ही बदल दी। पीड़ित की ओर से शिकायत के बाद नारायणगढ़ महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सतविंद्र कौर और सब इंस्पेक्टर रजविंद्र कौर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़, आरोपी को बचाने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले में अब पीड़ित ने महिला इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर सहित अन्य को इसी केस में 120बी के तहत शामिल करने की हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में दो सितंबर को इसकी सुनवाई होनी है।
पीड़ित के वकील अरविंदर अरोड़ा ने बताया कि हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से हमने नारायणगढ़ महिला थाना पुलिस कर्मचारियों को 27 जून को दर्ज हुए केस में 120बी के तहत शामिल करने और पूरे मामले की एसआईटी से जांच करवाने की मांग की है। जबकि पुलिस ने इस मामले में महिला थाना प्रभारी और सब इंस्पेक्टर पर अलग केस दर्ज किया है और दोनों मामलों की अलग से जांच हो रही है, जबकि पूरा मामला एक ही है। विदित हो कि 12वीं की छात्रा ने आरोपी पर आपत्तिजनक तस्वीरों से ब्लैकमेल कर दो साल से दुष्कर्म का आरोप लगाया था। साथ शिकायत करने पर जान से मारने और तेजाब फेंकने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था, लेकिन आरोपी पुलिस अधिकारियों ने तहरीर को बदलकर आरोपी को बचाने का प्रयास किया, जिसकी शिकायत गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, डीजीपी, आईजी और एसपी अंबाला से की गई थी।
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पीड़ित के वकील अरविंदर अरोड़ा ने बताया कि हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से हमने नारायणगढ़ महिला थाना पुलिस कर्मचारियों को 27 जून को दर्ज हुए केस में 120बी के तहत शामिल करने और पूरे मामले की एसआईटी से जांच करवाने की मांग की है। जबकि पुलिस ने इस मामले में महिला थाना प्रभारी और सब इंस्पेक्टर पर अलग केस दर्ज किया है और दोनों मामलों की अलग से जांच हो रही है, जबकि पूरा मामला एक ही है। विदित हो कि 12वीं की छात्रा ने आरोपी पर आपत्तिजनक तस्वीरों से ब्लैकमेल कर दो साल से दुष्कर्म का आरोप लगाया था। साथ शिकायत करने पर जान से मारने और तेजाब फेंकने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था, लेकिन आरोपी पुलिस अधिकारियों ने तहरीर को बदलकर आरोपी को बचाने का प्रयास किया, जिसकी शिकायत गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, डीजीपी, आईजी और एसपी अंबाला से की गई थी।
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