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अंबाला जेल ब्रेक : मानव अधिकार आयोग ने लिया सख्त संज्ञान, डीजी जेल से रिपोर्ट तलब

Sat, 04 Oct 2025 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sat, 04 Oct 2025 11:50 PM IST
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Ambala Jail Break: Human Rights Commission takes strict cognizance, summons report from DG Jail
माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला। केंद्रीय कारागार में सुरक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गंभीर चूक पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल जेल से पॉक्सो के आरोपी के भागने पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए, आयोग ने महानिदेशक कारागार (डीजी जेल) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा सदस्यों में कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग ने महानिदेशक कारागार से जेलब्रेक की घटनाओं में चूक की गहनता से जांच के निर्देश दिए है, इसके साथ ही सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, कर्तव्य में विफलता दिखाने वाले जेल अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, जेल नियमावली और मानवाधिकार सुरक्षा उपायों के अनुपालन का नियमित ऑडिट करने और हरियाणा की सभी जेलों में सीसीटीवी फुटेज की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने महानिदेशक कारागार से 20 नवंबर से पहले इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिले।





बिजली के खंभे पर चढ़कर भागा था पॉक्सो एक्ट का आरोपी

28 सितंबर को अंबाला सेंट्रल जेल में पॉक्सो के मामले में विचाराधीन कैदी बिहार निवासी अजय कुमार 18 फुट ऊंचे बिजली के खंभे पर चढ़कर और विद्युत तारों का उपयोग कर जेल से फरार हो गया था। अजय कुमार को जेल कारखाने में काम पर लगाया गया था, नियमित दोपहर की गिनती के दौरान गायब मिला था। सीसीटीवी में इसकी पुष्टि हुई थी। जेल परिसर के अंदर बिजली गुल होने का कैदी ने फायदा उठाया। हालांकि बाद में पुलिस ने अजय को पकड़ लिया था। आयोग ने इस घटना को नागरिक सुरक्षा में बड़ी चूक बताया है। आयोग ने कहा कि पिछले दो महीनों में यह दूसरी जेलब्रेक से जुड़ी घटना है, इससे पहले, अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश निवासी विचाराधीन कैदी सुखबीर भी फरार हुआ था। इन लगातार हो रही घटनाओं ने कैदियों की सुरक्षा, निगरानी और जेल सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आयोग ने माना गंभीर विफलता

आयोग ने इन घटनाओं को जेल सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर विफलता माना है। आयोग का मानना है कि ये घटनाएं जेल नियमावली और कैदियों की निगरानी, सुरक्षा एवं प्रबंधन से संबंधित मानवाधिकार सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। आयोग ने कहा कि लगातार हो रहे जेलब्रेक इस बात के संकेत हैं कि उच्च जोखिम वाले कैदियों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा और गिनती एवं सीसीटीवी निगरानी जैसी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है।
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सीसीटीवी फुटेज की निगरानी न करना अधिकारियों की लापरवाही
अपने आदेश में, जस्टिस बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने कहा कि इन सुरक्षा चूकों और अपर्याप्त पर्यवेक्षण के कारण न केवल विचाराधीन कैदियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आमजन की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। आयोग ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद, जेल अधिकारियों द्वारा फुटेज की निगरानी न करना उनके कर्तव्य की घोर उपेक्षा को दर्शाता है।
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