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छावनी में जवानों के लिए बैरक कम
Ambala
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। एक ओर युद्ध की तैयारियों को लेकर सेना की क्षमता का जायजा लेने के लिए इन दिनों खुद चीफ आफ आर्मी स्टाफ बड़ी छावनियों का दौरा कर रहे हैं, मगर यहां अंबाला में सेना के आला अफसरों ने सेना की तैयारियों के साथ-साथ सेना प्रमुख को स्थानीय सैन्य क्षेत्र के दर्द से भी रूबरू करवाया। सेना प्रमुख को बताया कि यहां जवानों के बैरकों और उनके परिवार के लिए क्वार्टरों और अन्य प्रकार की समस्याओं का क्या हाल है और ये सब समस्याएं फंड की कमी की वजह से सामने आ रही है। सेना प्रमुख के विगत दिवस अंबाला दौरे के दौरान जहां सेना प्रमुख से अंबाला के आला अफसरों से सेना की तैयारियों, संसाधनों की कमियों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की, वहीं, स्थानीय अफसरों ने छावनी और जवानों के हालातों के बारे में भी जनरल को विस्तार से जानकारी दी। अफसरों ने इस दौरान सेना प्रमुख को बताया कि यहां सबसे बड़ी प्रॉब्लम है फंड की कमी। सेना की विंग मिलिट्री इंजीनियरिंग सविसेज को पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल जितना बजट इस विंग को विकास कार्यों के लिए मिला था, इस वित्त वर्ष में उससे भी कम बजट प्राप्त हुआ है। जिस वजह से कई विकास कार्य अटके हुए हैं।
बैरकों की कमी, जर्जर हुए क्वार्टर
स्थानीय अफसरों ने सेना प्रमुख को बताया कि यहां सेना के जवानों के लिए भी बैरकों की संख्या पर्याप्त नहीं है। सेना के जवान बैरकों की कमी को झेलते हुए बमुश्किल जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। जबकि यहां जवानों की फैमिली के लिए जो बरसों पुराने क्वार्टर बने हुए हैं, उनकी हालत भी अब ज्यादा बेहतर नहीं है। कई क्वार्टर तो बेहद जर्जर हो चुके हैं। इस वजह से जवानों और उनके परिवारों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। जनरल को ये भी बताया गया कि यहां क्वार्टरों की भी बहुत कमी है, इसलिए बहुत से जवानों को सिविल क्षेत्र में जाकर किराए के मकानों में अपने परिवारों को रखना पड़ता है। जिससे उन्हें परेशानी होती है। इसके अलावा सैन्य क्षेत्र में सीवरेज सिस्टम की भी समुचित व्यवस्था नहीं। जिस वजह से गंदगी को क्षेत्र से बाहर निकालने में भी काफी दिक्कत आती है। इसलिए यहां सीवरेज लाइनें बिछाने के लिए भी करोड़ों के फंड की जरूरत है।
सकारात्मक रहा सेना प्रमुख का रवैया
सेना के अफसरों द्वारा सेना प्रमुख को सैन्य क्षेत्र, सेना के जवानों व उनके परिवारों की समस्याओं से रूबरू करवाने के सेना प्रमुख का रवैया इन तमाम समस्याओं के प्रति सकारात्मक रहा। उन्होंने स्थानीय सैन्य अफसरों को आश्वस्त किया कि वे फंड की कमी को जल्द ही दूर करवाने और अन्य समस्याओं के भी समाधान का प्रयास करेंगे।
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दो सालों से लटकी हैं सड़कें
फंड की कमी की वजह से ही एमईएस विभाग सैन्य क्षेत्र की 18 सड़कों का निर्माण नहीं करवा पा रही है। हालांकि सेना की ही एक दूसरी विंग कैंटोनमेंट बोर्ड ने इन सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है, मगर बोर्ड चाहता है कि पहले एमईएस इन सड़कों को बोर्ड के हैंडओवर करें। लेकिन सेना अफसराें का कहना है कि ये प्रोसेस बहुत लंबा है। इसलिए इन सड़कों की कायाकल्प एमईएस के फंड से ही करवाई जाएगी। मगर एमईएस के पास फंड का जबरदस्त टोटा होने की वजह से कई विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं।
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बैरकों की कमी, जर्जर हुए क्वार्टर
स्थानीय अफसरों ने सेना प्रमुख को बताया कि यहां सेना के जवानों के लिए भी बैरकों की संख्या पर्याप्त नहीं है। सेना के जवान बैरकों की कमी को झेलते हुए बमुश्किल जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। जबकि यहां जवानों की फैमिली के लिए जो बरसों पुराने क्वार्टर बने हुए हैं, उनकी हालत भी अब ज्यादा बेहतर नहीं है। कई क्वार्टर तो बेहद जर्जर हो चुके हैं। इस वजह से जवानों और उनके परिवारों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। जनरल को ये भी बताया गया कि यहां क्वार्टरों की भी बहुत कमी है, इसलिए बहुत से जवानों को सिविल क्षेत्र में जाकर किराए के मकानों में अपने परिवारों को रखना पड़ता है। जिससे उन्हें परेशानी होती है। इसके अलावा सैन्य क्षेत्र में सीवरेज सिस्टम की भी समुचित व्यवस्था नहीं। जिस वजह से गंदगी को क्षेत्र से बाहर निकालने में भी काफी दिक्कत आती है। इसलिए यहां सीवरेज लाइनें बिछाने के लिए भी करोड़ों के फंड की जरूरत है।
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सकारात्मक रहा सेना प्रमुख का रवैया
सेना के अफसरों द्वारा सेना प्रमुख को सैन्य क्षेत्र, सेना के जवानों व उनके परिवारों की समस्याओं से रूबरू करवाने के सेना प्रमुख का रवैया इन तमाम समस्याओं के प्रति सकारात्मक रहा। उन्होंने स्थानीय सैन्य अफसरों को आश्वस्त किया कि वे फंड की कमी को जल्द ही दूर करवाने और अन्य समस्याओं के भी समाधान का प्रयास करेंगे।
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दो सालों से लटकी हैं सड़कें
फंड की कमी की वजह से ही एमईएस विभाग सैन्य क्षेत्र की 18 सड़कों का निर्माण नहीं करवा पा रही है। हालांकि सेना की ही एक दूसरी विंग कैंटोनमेंट बोर्ड ने इन सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है, मगर बोर्ड चाहता है कि पहले एमईएस इन सड़कों को बोर्ड के हैंडओवर करें। लेकिन सेना अफसराें का कहना है कि ये प्रोसेस बहुत लंबा है। इसलिए इन सड़कों की कायाकल्प एमईएस के फंड से ही करवाई जाएगी। मगर एमईएस के पास फंड का जबरदस्त टोटा होने की वजह से कई विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं।