- किसी का बिजनेस को गया था ठप तो किसी ने करना था आवश्यक भुगतान

Rohtak Bureau Updated Sat, 11 Nov 2017 01:03 AM IST
व्यापार हुआ ठप तो हर किसी ने भुगतान के लिए झेली परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
नोटबंदी से सरकार आर्थिक सुधार का दावा कर रही है, मगर यहां नोटबंदी को पूरा एक वर्ष बीत चुका हैं और कारोबार अभी भी पटरी पर नहीं लौटा है। कारोबारी बताते हैं कि जिले में अधिकतर कारोबारियों का बिजनेस लगभग ठप हो गया था जोकि आज तक पटरी पर नहीं लौटा है। पहले नोटबंदी और अब जीएसटी ने रही सही कसर पूरी कर दी है। उनका कहना है कि सरकार आर्थिक सुधार की बात कर रही है, मगर यहां हकीकत कोसों दूर है। सुधार के नाम पर अब तक ऊंट के मुंह में जीरा है। वह बताते हैं कि नोटबंदी के समय कई दिनों तक तो कारोबार ही बंद करना पड़ा था। न माल बुक हो रहा था न ही पेमेंट हो पा रही थी। ग्राहक बाजार से गायब हो गए थे। सरकार ने बिना कोई तैयारी के नोटबंदी को जनता के सिर थोप दिया था। उनका कहना है कि कैशलेस का दावा किया गया था, मगर आज बाजार 20 फीसदी भी कैशलेस नहीं हो सका है। नोटबंदी ने जनता पर गहरा प्रभाव डाला और कारोबारियों पर इसका बुरा पड़ा था।

उन दिनों बाजार में काम ही लगभग ठप हो गया था। न तो ग्राहक थे न ही कोई ऑर्डर की बुकिंग थी। नवंबर व दिसंबर दो माह तक काम बुरी तरह प्रभावित रहा था। जनवरी से कुछ सुधार हुआ और बाजार अप्रैल तक पूरी तरह से उभर सका था। मगर इस अवधि में भारी नुकसान भी हुआ। बाजार खाली होने की वजह से बिजनेस में उछाल नहीं आया। नोटबंदी पूरी तरह से आर्थिक मंदी बनकर रह गई जिसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ा। यह सरकार की फ्लॉप नीति का परिणाम था। -अजय रस्तोगी, साइंस कारोबारी

- नोटबंदी के समय तो बाजार में आर्डर ही समाप्त हो गए थे। नए आर्डर नहीं आ रहे थे और कारोबार लगभग ठप हो गया था। ऊपर से कैश नहीं होने से नया माल बुक भी नहीं हो पा रहा था। कार्ड के जरिए जितनी पेमेंट हो सकी वह करानी पड़ी। मार्केट से रिकवरी पूरी तरह से प्रभावित हुई थी। नोटबंदी में हुई परेशानी आज तक याद है। -होलसेल कारोबारी, नरेंद्र सिंह

शूज का कारोबार है। नवंबर आरंभ होते ही सीजन आरंभ हो गया था। मगर नोटबंदी की वजह से पूरा बाजार ठप हो गया था। इस कारण कारोबार ही आगे नहीं बढ़ पाया था। पूरा सीजन बेकार साबित हुआ था और उन्हें नुकसान तक उठाना पड़ा था। बाजार में रिकवरी भी नहीं हुई। इतना ही नहीं उन्होंने रिश्तेदार के विवाह में जाना था मगर खरीदारी में काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी थी। -अतुल खुराना

नोटबंदी से पहले कोई तैयारी सरकार ने नहीं की जिसका खामियाजा आम जनता ने झेला। बाजार तो मंदे पड़े साथ ही लोगों को अलग से परेशानी हुई। कैश के लिए लोगों ने दर-दर की ठोकरें खाई। उनका मोबाइल का कारोबार है और उस समय तो मानों पूरा बाजार थम सा गया था। नए आर्डर नहीं थे और पुराने भुगतान तक कैश की वजह से नहीं हो रहे थे। सारा बिजनेस उधारी पर चला। कैशलेस का दावा सरकार ने किया था, मगर आज बाजार में 20 प्रतिशत भी कैशलेस सुविधा नहीं है।- पंकज, मोबाइल विक्रेता

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