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- गेहूं के सीजन में फसल बचने के तमाम दावे फेल होते दिख रहे हैं -
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:24 AM IST
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खेतों में आग बुझाने में फायर ब्रिगेड के छूट रहे पसीने
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
गेहूं का सीजन चरम पर है और आग लगने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। खेतों में आग लगने की घटनाओं को लेकर फायर ब्रिगेड के इंतजाम बौने हैं। आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने के लिए गांवों में उचित व्यवस्था न होने के कारण बार-बार शहर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बीती 18 अप्रैल को नग्गल क्षेत्र के खेतों में लगी आग के कारण करीब 400 एकड़ गेहूं की फसल और फाने जलकर राख हो गए। इस दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी खत्म हो गया, पानी भरने के लिए कई किलोमीटर वापस सिटी वाटर हाइड्रेंट पर आना पड़ा। इतना ही नहीं वाटर हाइड्रेंट के अलावा भी कोई अन्य व्यवस्था नहीं दी गई है, ताकि आपात स्थिति इसका इस्तेमाल हो सके।
यह है फायर ब्रिगेड की व्यवस्था
जिला में फायर ब्रिगेड के तीन स्टेशन हैं। इनमें अंबाला कैंट में जहां छह, अंबाला सिटी में पांच और नारायणगढ़ में तीन गाड़ियां हैं। इनमें 50 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि 84 कर्मचारियों की जरूरत है। इसके अलावा नग्गल एरिया, साहा, शहजादपुर, मुलाना, बराड़ा में फायर स्टेशन ही नहीं है। बीते कुछ मामलों में यह सामने आया है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पानी खत्म हो जाता है तो उसे भरने के लिए लोकल लेवल पर कोई व्यवस्था ही नहीं है।
ग्रामीणों की मांग- फसली सीजन में दी जाए व्यवस्था
नारायणगढ़ से हरपाल सिंह, अजय कुमार, रामकुमार, रामचंद्र, भगत राम, शहजादपुर से अनिल कुमार डहर, सुखदेव सिंह गदौली, पालाराम फिरोजपुर, रणजोत सिंह मुगलमाजरा, अंबाला सिटी के साथ लगते गांवों से करनैल सिंह, मलकीत सिंह ने कहा कि धान और गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा संकट रहता है। हर सीजन में आग के कारण सैकड़ों एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। कई बार तो फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचती, जबकि कई बार अधिक आग हो तो खाली हो चुकी फायर ब्रिगेड की गाड़ी को वापस लौटना पड़ता है। यदि इन सीजन के दौरान ही कोई व्यवस्था कर दी जाए, ताकि पानी भरने के लिए गाड़ियों को वापस न लौटना पड़े, तो सही रहेगा।
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गन्ने की खोई में आग, ट्यूबवेल के पानी से बुझाई (फोटो नंबर : 38)
शहजादपुर। बनौदी शुगर मिल में पड़ी गन्ने की खोई में लगी आग बुझाने में फायर ब्रिगेड की टीम के पसीने छूट गए। ट्यूबवेल की मदद से करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जानकारी अनुसार शहजादपुर में स्थित बनौंदी शुगर मिल में गन्ने की खोई में अचानक आग लग गई। इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। जब तक दमकल विभाग की गाड़ियां पहुंचती तब शुगर मिल में लगे ट्यूबवेल से शुगर मिल कर्मचारी आग बुझाने का प्रयत्न करते रहे, लेकिन आग पर काबू न पा सके। वहीं दमकल विभाग की दो गाड़ियों के आने पर दमकल विभाग कर्मियों ने एक घंटे बाद आग पर काबू पाया।
बिजली कट में नहीं भरता वाटर हाइड्रेंट से पानी
अंबाला सिटी में जगाधरी गेट पर बने वाटर हाइड्रेंट से फायर ब्रिगेड की गाड़ी को पानी भरना मुश्किल हो गया। बिजली कट के चलते यह हाइड्रेंट चल नहीं पाया, कोई और वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं थी। इसके चलते दो गाड़ियों को अंबाला कैंट बारह क्रास रोड पर स्थित वाटर हाइड्रेंट से पानी भरने के लिए भेजा गया, लेकिन यहां पर भी पानी नहीं भरा जा सका। करीब चार घंटे के बाद दो गाड़ियों को पानी मिला, जिसके बाद वे सिटी कार्यालय पहुंचीं।
पंचायतीराज विभाग के तहत ऐसा कोई नियम नहीं है कि गांव स्तर पर वाटर हाइड्रेंट की व्यवस्था दी जाए। यह व्यवस्था अन्य विभागों को देखनी है। - नरेंद्र ढुल, बीडीपीओ, अंबाला ब्लाक वन व टू
लाइट न होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पानी भरने में दिक्कत आई। कोशिश यही रहती है कि गाड़ियों में पानी फुल करके खड़ी की जाए। - कर्णवीर सिंह, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग अंबाला सिटी
फिलहाल ग्रामीण एरिया में वाटर हाइड्रेंट की व्यवस्था नहीं है। यदि गाड़ी पानी से खाली हो जाए तो अधिकतर मामलों में वापस ही आना पड़ता है। कुछ गांवों में गाड़ी ट्यूबवेल या फिर आसपास गुजर रही नहर से पानी भर लेती है, अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। - डीके नंदा, फायर स्टेशन ऑफिसर
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
गेहूं का सीजन चरम पर है और आग लगने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। खेतों में आग लगने की घटनाओं को लेकर फायर ब्रिगेड के इंतजाम बौने हैं। आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने के लिए गांवों में उचित व्यवस्था न होने के कारण बार-बार शहर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बीती 18 अप्रैल को नग्गल क्षेत्र के खेतों में लगी आग के कारण करीब 400 एकड़ गेहूं की फसल और फाने जलकर राख हो गए। इस दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी खत्म हो गया, पानी भरने के लिए कई किलोमीटर वापस सिटी वाटर हाइड्रेंट पर आना पड़ा। इतना ही नहीं वाटर हाइड्रेंट के अलावा भी कोई अन्य व्यवस्था नहीं दी गई है, ताकि आपात स्थिति इसका इस्तेमाल हो सके।
यह है फायर ब्रिगेड की व्यवस्था
जिला में फायर ब्रिगेड के तीन स्टेशन हैं। इनमें अंबाला कैंट में जहां छह, अंबाला सिटी में पांच और नारायणगढ़ में तीन गाड़ियां हैं। इनमें 50 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि 84 कर्मचारियों की जरूरत है। इसके अलावा नग्गल एरिया, साहा, शहजादपुर, मुलाना, बराड़ा में फायर स्टेशन ही नहीं है। बीते कुछ मामलों में यह सामने आया है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पानी खत्म हो जाता है तो उसे भरने के लिए लोकल लेवल पर कोई व्यवस्था ही नहीं है।
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ग्रामीणों की मांग- फसली सीजन में दी जाए व्यवस्था
नारायणगढ़ से हरपाल सिंह, अजय कुमार, रामकुमार, रामचंद्र, भगत राम, शहजादपुर से अनिल कुमार डहर, सुखदेव सिंह गदौली, पालाराम फिरोजपुर, रणजोत सिंह मुगलमाजरा, अंबाला सिटी के साथ लगते गांवों से करनैल सिंह, मलकीत सिंह ने कहा कि धान और गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा संकट रहता है। हर सीजन में आग के कारण सैकड़ों एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। कई बार तो फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचती, जबकि कई बार अधिक आग हो तो खाली हो चुकी फायर ब्रिगेड की गाड़ी को वापस लौटना पड़ता है। यदि इन सीजन के दौरान ही कोई व्यवस्था कर दी जाए, ताकि पानी भरने के लिए गाड़ियों को वापस न लौटना पड़े, तो सही रहेगा।
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गन्ने की खोई में आग, ट्यूबवेल के पानी से बुझाई (फोटो नंबर : 38)
शहजादपुर। बनौदी शुगर मिल में पड़ी गन्ने की खोई में लगी आग बुझाने में फायर ब्रिगेड की टीम के पसीने छूट गए। ट्यूबवेल की मदद से करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जानकारी अनुसार शहजादपुर में स्थित बनौंदी शुगर मिल में गन्ने की खोई में अचानक आग लग गई। इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। जब तक दमकल विभाग की गाड़ियां पहुंचती तब शुगर मिल में लगे ट्यूबवेल से शुगर मिल कर्मचारी आग बुझाने का प्रयत्न करते रहे, लेकिन आग पर काबू न पा सके। वहीं दमकल विभाग की दो गाड़ियों के आने पर दमकल विभाग कर्मियों ने एक घंटे बाद आग पर काबू पाया।
बिजली कट में नहीं भरता वाटर हाइड्रेंट से पानी
अंबाला सिटी में जगाधरी गेट पर बने वाटर हाइड्रेंट से फायर ब्रिगेड की गाड़ी को पानी भरना मुश्किल हो गया। बिजली कट के चलते यह हाइड्रेंट चल नहीं पाया, कोई और वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं थी। इसके चलते दो गाड़ियों को अंबाला कैंट बारह क्रास रोड पर स्थित वाटर हाइड्रेंट से पानी भरने के लिए भेजा गया, लेकिन यहां पर भी पानी नहीं भरा जा सका। करीब चार घंटे के बाद दो गाड़ियों को पानी मिला, जिसके बाद वे सिटी कार्यालय पहुंचीं।
पंचायतीराज विभाग के तहत ऐसा कोई नियम नहीं है कि गांव स्तर पर वाटर हाइड्रेंट की व्यवस्था दी जाए। यह व्यवस्था अन्य विभागों को देखनी है। - नरेंद्र ढुल, बीडीपीओ, अंबाला ब्लाक वन व टू
लाइट न होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पानी भरने में दिक्कत आई। कोशिश यही रहती है कि गाड़ियों में पानी फुल करके खड़ी की जाए। - कर्णवीर सिंह, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग अंबाला सिटी
फिलहाल ग्रामीण एरिया में वाटर हाइड्रेंट की व्यवस्था नहीं है। यदि गाड़ी पानी से खाली हो जाए तो अधिकतर मामलों में वापस ही आना पड़ता है। कुछ गांवों में गाड़ी ट्यूबवेल या फिर आसपास गुजर रही नहर से पानी भर लेती है, अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। - डीके नंदा, फायर स्टेशन ऑफिसर