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10 दिवसीय हरियाणवी लोकनृत्य कार्यशाला का हुआ शुभारंभ
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10 दिवसीय हरियाणवी लोकनृत्य कार्यशाला का हुआ शुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा 10 दिवसीय हरियाणवी लोकनृत्य कार्यशाला का आयोजन बालभवन में 19 मार्च से शुरू किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एमएल सारवान ने की। उन्होंने बताया कि लोकनृत्य आदिकाल से मानव की भाव भंगिमाओं का आधार रहा है, जो मुंह से बिना बोले नृत्य के भावों से सब कुछ कह जाता है। हरियाणा में प्रत्येक मास कोई न कोई त्योहार आता है और सभी वर्ग मिलजुल कर इन त्योहारों को मनाते हैं। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में इतनी गहराई है जितनी की समुद्र की।
प्रशिक्षक वरिष्ठ अनुभवी बुधराम मट्टू ने बताया कि यह कार्यशाला युवा कलाकारों के लिए निशुल्क है। इस कार्यशाला में तीज-त्योहार के अवसर पर गाए जाने वाले गीत एवं नृत्यों की प्रस्तुतियां समापन अवसर पर दी जाएंगी। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा कलाकारों को पाश्चात्य सभ्यता से दूर रखकर उन्हें हरियाणवी लोक संस्कृति का पहरेदार बनाया जाए। इस कार्यशाला में लगभग 15 कलाकार भाग ले रहे हैं। जिन्हें प्रशिक्षक द्वारा नृत्यों के भाव से सामण, भादो, कातक, असोज और फाल्गुन में किए जाने वाले लोक नृत्यों की बारीकियों से अवगत करवाया जाएगा। इस कार्यशाला में शिवानी, कुसुम, चारू, कीर्ति, नेहा, पायल, सोनू, रेनू, सुरूचि, रीया इत्यादि कलाकार कड़ी मेहनत करके इस कार्यशाला का पूरा लाभ उठाकर हरियाणा की लोक संस्कृति से रूबरू होना चाह रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा 10 दिवसीय हरियाणवी लोकनृत्य कार्यशाला का आयोजन बालभवन में 19 मार्च से शुरू किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एमएल सारवान ने की। उन्होंने बताया कि लोकनृत्य आदिकाल से मानव की भाव भंगिमाओं का आधार रहा है, जो मुंह से बिना बोले नृत्य के भावों से सब कुछ कह जाता है। हरियाणा में प्रत्येक मास कोई न कोई त्योहार आता है और सभी वर्ग मिलजुल कर इन त्योहारों को मनाते हैं। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में इतनी गहराई है जितनी की समुद्र की।
प्रशिक्षक वरिष्ठ अनुभवी बुधराम मट्टू ने बताया कि यह कार्यशाला युवा कलाकारों के लिए निशुल्क है। इस कार्यशाला में तीज-त्योहार के अवसर पर गाए जाने वाले गीत एवं नृत्यों की प्रस्तुतियां समापन अवसर पर दी जाएंगी। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा कलाकारों को पाश्चात्य सभ्यता से दूर रखकर उन्हें हरियाणवी लोक संस्कृति का पहरेदार बनाया जाए। इस कार्यशाला में लगभग 15 कलाकार भाग ले रहे हैं। जिन्हें प्रशिक्षक द्वारा नृत्यों के भाव से सामण, भादो, कातक, असोज और फाल्गुन में किए जाने वाले लोक नृत्यों की बारीकियों से अवगत करवाया जाएगा। इस कार्यशाला में शिवानी, कुसुम, चारू, कीर्ति, नेहा, पायल, सोनू, रेनू, सुरूचि, रीया इत्यादि कलाकार कड़ी मेहनत करके इस कार्यशाला का पूरा लाभ उठाकर हरियाणा की लोक संस्कृति से रूबरू होना चाह रहे हैं।
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