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मांगे न माने जाने पर मंत्रियों के आवासों का करेंगे संघ सदस्य
Updated Tue, 27 Feb 2018 01:08 AM IST
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मांगें न माने जाने पर मंत्रियों के आवास का करेंगे संघ सदस्य
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सरकार की वादाखिलाफी और मांगों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ खंड में कार्यरत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर 13 मार्च तक कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान नहीं किया गया तो रोष स्वरूप 14 से 20 मार्च तक मंत्रियों के आवासों पर घेराव करके शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री को सिटी एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जारी किए घोषणा पत्र में कर्मचारियों से अनेक वादे किए थे, जिनमें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, पंजाब के समान वेतनमान देने, 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतनमान देने आदि प्रमुख थे मगर सरकार ने 40 महीने बीत जाने के बावजूद न तो इन वादे पर अमल किया और न ही कर्मचारियों की अन्य लंबित जायज मांगों का कोई समाधान किया। इसके विपरीत सरकार द्वारा जनसेवा के विभागों में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और पीपीपी की जनविरोधी नीतियों को लागू करके उनके आकार को सिकोड़ा जा रहा है। श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सरकार की वादाखिलाफी और मांगों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ खंड में कार्यरत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर 13 मार्च तक कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान नहीं किया गया तो रोष स्वरूप 14 से 20 मार्च तक मंत्रियों के आवासों पर घेराव करके शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री को सिटी एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जारी किए घोषणा पत्र में कर्मचारियों से अनेक वादे किए थे, जिनमें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, पंजाब के समान वेतनमान देने, 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतनमान देने आदि प्रमुख थे मगर सरकार ने 40 महीने बीत जाने के बावजूद न तो इन वादे पर अमल किया और न ही कर्मचारियों की अन्य लंबित जायज मांगों का कोई समाधान किया। इसके विपरीत सरकार द्वारा जनसेवा के विभागों में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और पीपीपी की जनविरोधी नीतियों को लागू करके उनके आकार को सिकोड़ा जा रहा है। श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।