सांसों पर संकट: दिल्ली की हवा 'बहुत खराब', आज सुबह आईटीओ और फिरोज शाह कोटला रोड के आसपास का एक्यूआई 420 दर्ज
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार आज सुबह आनंद विहार के आसपास के इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 है, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है।
विस्तार
#WATCH | Delhi: Air Quality Index (AQI) in the area around Anand Vihar is 350, categorised as 'Very Poor', as per the CPCB (Central Pollution Control Board).
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(Visuals shot at 6:20 am) https://t.co/ElXxQlZ1Nj — ANI (@ANI) November 6, 2026
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की परत होगी और मोटी
मौसमी दशाएं प्रतिकूल होने से दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण का संकट और भी गहराने का अंदेशा है। आठ अक्तूबर को प्रदूषकों को दूर ले जाने वाली सभी दशाएं सुस्त होंगी। ऐसे में दिवाली पर पटाखा जलने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चादर मोटी हो सकती है। आईआईटीएम के मुताबिक, हवाओं की चाल शुक्रवार शाम से ही थम सकती है।
प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां हो सकती हैं। छह और सात नवंबर को दोपहर में हवा की रफ्तार 15 से 18 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने के बाद शाम-रात में घटकर पांच किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। आठ नवंबर को स्थिति और प्रतिकूल हो सकती है। इस दिन सुबह हवा की गति आठ, दोपहर में 10 और शाम-रात में 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। हवा की दिशा भी उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पूर्व और फिर पूर्व की ओर बदल सकती है।
आठ नवंबर को सभी मानक होंगे सुस्त
हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषकों के फैलाव के लिए ठीक नहीं रहेगा। छह नवंबर वेंटिलेशन इंडेक्स 16 हजार और सात नवंबर को 12 हजार वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहेगा। लेकिन आठ नवंबर को इसमें बड़ी गिरावट आ सकती है और यह महज 2500 वर्ग मीटर प्रति सेकंड रहने का अनुमान है। इस दौरान मिक्सिंग हाइट भी 1500 मीटर के करीब रहने का अंदेशा है। विशेषज्ञों की मानें तो वेंटिलेशन इंडेक्स छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम होने, मिक्सिंग हाइट 1600 मीटर से ऊपर होने और औसत हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहने पर प्रदूषकों का फैलाव प्रतिकूल माना जाता है। इससे प्रदूषण के नजरिए से सबसे मुश्किल दिन आठ नवंबर को होने वाले हैं।
दिवाली पर जहरीली हवा बनेगी सेहत के लिए चुनौती
दिवाली पर जहरीली हवा लोगों की सेहत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। पहले से ही खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण दिवाली पर पटाखों के धुएं के कारण और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस, दिल या दूसरी बीमारियों से परेशान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वामी दयानंद अस्पताल के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्लैडबिन त्यागी का कहना है कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और जहरीले कण सांस के जरिये शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। वहीं, पहले से दिल की बीमारी से परेशान लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। बच्चों में खांसी, एलर्जी और सांस संबंधी शिकायतें सामने आ सकती हैं।
प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं
डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। किसी को आंखों में जलन और गले में खराश हो सकती है तो किसी को सांस फूलने और सीने में जकड़न की परेशानी हो सकती है। पहले से बीमार लोगों में लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। ऐसे में परेशानी बढ़ने का इंतजार करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उनका कहना है कि दिवाली खुशियों का त्योहार है, लेकिन इस दौरान सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए पटाखों के धुएं से दूरी बनाकर और जरूरी सावधानियां अपनाकर ही त्योहार मनाना बेहतर है।
डॉक्टरों की सलाह, इन बातों का रखें ध्यान
- दिवाली के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को पटाखों के धुएं से दूर रखें
- प्रदूषण ज्यादा होने पर सुबह और शाम खुले में टहलने या दौड़ने से बचें
- बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क पहनें
- अस्थमा और सांस के मरीज अपनी दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से लेते रहें
- घर के अंदर धुआं आने पर खिड़की-दरवाजे बंद रखें और धुएं से बचने की व्यवस्था करें
- पटाखे जलाने वाली जगह पर बच्चों और बुजुर्गों को खड़ा न होने दें
- आंखों में जलन, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें
- लक्षणों को सामान्य समझकर न करें अनदेखा
सौरभ भारद्वाज का दिल्ली सरकार पर तंज
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों में कथित हेराफेरी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगरानी केंद्रों के सेंसर पर पानी का छिड़काव कर प्रदूषण की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश की जा रही है। इससे लोगों को हवा की गुणवत्ता को लेकर गलत जानकारी मिल रही है और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
एक्स पर जारी अपनी पोस्ट में भारद्वाज ने बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसके संभावित गंभीर असर को रेखांकित किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सरकारी ऐप पर एक्यूआई सुरक्षित दिखाई दे तो 65 साल के बुजुर्ग भी बेफिक्र होकर सुबह की सैर पर निकल सकते हैं। जबकि वास्तविकता में हवा में पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म और हानिकारक प्रदूषक मौजूद हो सकते हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से बुजुर्गों को हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा हो सकता है। भारद्वाज ने कहा कि प्रदूषण के आंकड़ों में हेराफेरी केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इससे परिवारों को हवा की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता और वे जरूरी सावधानियां बरतने से चूक सकते हैं। उन्होंने सरकार से कथित आंकड़ा फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और प्रदूषण की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखने की मांग की।