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नेबुलाइजर को ही आक्सीजन समझकर जिद्द पर अड़े मरीज के परिजनों ने किया हंगामा
Updated Tue, 20 Mar 2018 01:04 AM IST
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नेबुलाइजर को ही आक्सीजन समझकर जिद्द पर अड़े मरीज के परिजनों ने किया हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
नागरिक अस्पताल में सोमवार को एक मरीज को लेकर पहुंचे तीमारदार ऑक्सीजन की बजाए नेबुलाइजर मशीन ही अपने साथ आए बुजुर्ग मरीज को लगाने पर अड़ गए। इस दौरान वह ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से उलझ तक गए। किसी तरह स्टाफ ने समझाकर उन्हें शांत किया।
गांव ठरवा माजरी के विक्रम के वृद्ध पिता जरनैल सिंह को सांस लेने में परेशानी थी। इसके चलते वह और उसके परिजन वृद्ध को लेकर ट्रॉमा सेंटर आ गए। यहां एक बच्चे को नेबुलाइजर दिया जा रहा था। बताया जा रहा है कि यह देख वह ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर संजय से उलझ गए। शोर सुनकर भीड़ एकत्रित हो गई। बार-बार समझाने पर भी वह जिद्द पर अड़े रहे कि उनके पिता को इसकी ज्यादा जरूरत है। इसलिए बच्चे से उतारकर नेबुलाइजर उनके पिता को लगाया जाए। साथ ही अस्पताल में संसाधनों की कमी को लेकर भी शोर मचाते रहे। मामला शांत करने के लिए स्टाफ ने मशीन को बच्चे से निकाल कर विक्रम के पिता को लगा दी। बाद में डॉक्टरों ने उसे हटवा कर उन्हें ऑक्सीजन लगाई। विक्रम का कहना था कि ट्रामा सेंटर में संसाधनों की कमी है इस कारण मरीज को उचित इलाज नहीं मिल पाता है।
वृद्ध मरीज को ऑक्सीजन लगाने की आवश्यकता थी। मरीज के परिजन नेबुलाइजर को ही आक्सीजन समझ कर जिद्द पर अड़ गए। किसी तरह से समझने को तैयार नहीं थे। बच्चे को लगी नेबुलाइजर उतारकर उनके मरीज को लगाने के बाद ही वह शांत हुए। मरीज को आक्सीजन लगा कर उनका इलाज शुरू कर दिया है।
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डॉ. संजय, ड्यूटी डॉक्टर, ट्रॉमा सेंटर
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
नागरिक अस्पताल में सोमवार को एक मरीज को लेकर पहुंचे तीमारदार ऑक्सीजन की बजाए नेबुलाइजर मशीन ही अपने साथ आए बुजुर्ग मरीज को लगाने पर अड़ गए। इस दौरान वह ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से उलझ तक गए। किसी तरह स्टाफ ने समझाकर उन्हें शांत किया।
गांव ठरवा माजरी के विक्रम के वृद्ध पिता जरनैल सिंह को सांस लेने में परेशानी थी। इसके चलते वह और उसके परिजन वृद्ध को लेकर ट्रॉमा सेंटर आ गए। यहां एक बच्चे को नेबुलाइजर दिया जा रहा था। बताया जा रहा है कि यह देख वह ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर संजय से उलझ गए। शोर सुनकर भीड़ एकत्रित हो गई। बार-बार समझाने पर भी वह जिद्द पर अड़े रहे कि उनके पिता को इसकी ज्यादा जरूरत है। इसलिए बच्चे से उतारकर नेबुलाइजर उनके पिता को लगाया जाए। साथ ही अस्पताल में संसाधनों की कमी को लेकर भी शोर मचाते रहे। मामला शांत करने के लिए स्टाफ ने मशीन को बच्चे से निकाल कर विक्रम के पिता को लगा दी। बाद में डॉक्टरों ने उसे हटवा कर उन्हें ऑक्सीजन लगाई। विक्रम का कहना था कि ट्रामा सेंटर में संसाधनों की कमी है इस कारण मरीज को उचित इलाज नहीं मिल पाता है।
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वृद्ध मरीज को ऑक्सीजन लगाने की आवश्यकता थी। मरीज के परिजन नेबुलाइजर को ही आक्सीजन समझ कर जिद्द पर अड़ गए। किसी तरह से समझने को तैयार नहीं थे। बच्चे को लगी नेबुलाइजर उतारकर उनके मरीज को लगाने के बाद ही वह शांत हुए। मरीज को आक्सीजन लगा कर उनका इलाज शुरू कर दिया है।
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डॉ. संजय, ड्यूटी डॉक्टर, ट्रॉमा सेंटर