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- गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाने के समक्ष की नारेबाजी
Updated Sun, 18 Mar 2018 12:59 AM IST
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खनन माफिया के खिलाफ फिर धरने पर बैठे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़ (अंबाला)।
लगभग एक महीने पहले राज्यमंत्री के कार्यालय के पास तीन युवकों पर खनन माफिया द्वारा किए गए हमले में दर्ज मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी न होने पर पीड़ितों के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने शनिवार को नारायणगढ़ पुलिस थाना के सामने एक बार फिर धरना शुरू कर दिया। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। धरने पर अमरीक सिंह रज्जूमाजरा, नैब सिंह फिरोजपुर, शिविश वशिष्ठ, मदन चानना, राम सिंह कोडवा, नरेंद्र बबली, जसविंद्र सिंह, निर्मल सिंह, मदन पाल राणा, सुनील शर्मा भेड़ो, अमित अग्रवाल, पार्षद श्रवण कुमार, प्रवीण नामदेव, सुरेश धीमान, पूर्व चेयरमैन अमित वालिया, प्रवीण वालिया, मोनू वालिया, रजत शर्मा, रोहित धीमान, एडवोकेट धर्मवीर ढींडसा, एडवोकेट बटुकेश्वर मोदगिल, मुलखराज रसौर, मनोज अग्रवाल, मोनू राणा सहित काफी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद थे।
धरपकड़ के लिए मारी थी रेड, जल्द होगी गिरफ्तारी : एसएचओ
वहीं नारायणगढ़ थाने के एसएचओ सुरेशपाल ने बताया कि इस संबंध में उनकी अंबाला एसपी से बात हुई थी जिसके बाद एसपी यमुनानगर से बात की गई। यमुनानगर एसपी ने डिटेक्टिव स्टाफ को केस सौंपा है और स्टाफ ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अंबाला में रेड की थी, मगर आरोपी फरार हो गए थे। जल्द इस मामले में गिरफ्तारी होगी।
यह था मामला
12 फरवरी की देर शाम शहर के पंजलासा चौक के पास एक दुकान में बैठे तीन युवकों पर दर्जनभर हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया था। खनन माफिया से जुड़े इन लोगों द्वारा किए गए इस हमले में तीनों युवकों मनु शर्मा, तेजेंद्र व रोहित धीमान बुरी तरह घायल हो गए थे। मामले में पुलिस ने दर्जनभर लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। जांच में कोताही बरतने के नाम पर एक एसआई को निलंबित भी किया जा चुका है लेकिन जब जांच में कोई प्रगति नहीं हुई तो पीड़ितों के परिजनों व क्षेत्रवासियों की मांग पर सीआईए को भी मामले की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया। अभी सीआईए और पुलिस कुछ कर पाती कि इससे पहले ही इस मामले की जांच स्टेट क्राइम के हवाले कर दी गई थी। बिना पीड़ितों के सहमति के जांच को स्टेट क्राइम को सौंपने को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष फैल गया था और उन्होंने गत 27 फरवरी को भी पुलिस थाना के समक्ष धरना दिया था। उसी दिन पीड़ित पक्ष के कुछ लोग पुलिस महानिदेशक से मिले थे जिन्होंने इस मामले की जांच को स्टेट क्राइम से लेकर पुलिस अधीक्षक, यमुनानगर को सौंप देने के साथ-साथ आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने का भी आश्वासन दिया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़ (अंबाला)।
लगभग एक महीने पहले राज्यमंत्री के कार्यालय के पास तीन युवकों पर खनन माफिया द्वारा किए गए हमले में दर्ज मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी न होने पर पीड़ितों के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने शनिवार को नारायणगढ़ पुलिस थाना के सामने एक बार फिर धरना शुरू कर दिया। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। धरने पर अमरीक सिंह रज्जूमाजरा, नैब सिंह फिरोजपुर, शिविश वशिष्ठ, मदन चानना, राम सिंह कोडवा, नरेंद्र बबली, जसविंद्र सिंह, निर्मल सिंह, मदन पाल राणा, सुनील शर्मा भेड़ो, अमित अग्रवाल, पार्षद श्रवण कुमार, प्रवीण नामदेव, सुरेश धीमान, पूर्व चेयरमैन अमित वालिया, प्रवीण वालिया, मोनू वालिया, रजत शर्मा, रोहित धीमान, एडवोकेट धर्मवीर ढींडसा, एडवोकेट बटुकेश्वर मोदगिल, मुलखराज रसौर, मनोज अग्रवाल, मोनू राणा सहित काफी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद थे।
धरपकड़ के लिए मारी थी रेड, जल्द होगी गिरफ्तारी : एसएचओ
वहीं नारायणगढ़ थाने के एसएचओ सुरेशपाल ने बताया कि इस संबंध में उनकी अंबाला एसपी से बात हुई थी जिसके बाद एसपी यमुनानगर से बात की गई। यमुनानगर एसपी ने डिटेक्टिव स्टाफ को केस सौंपा है और स्टाफ ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अंबाला में रेड की थी, मगर आरोपी फरार हो गए थे। जल्द इस मामले में गिरफ्तारी होगी।
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यह था मामला
12 फरवरी की देर शाम शहर के पंजलासा चौक के पास एक दुकान में बैठे तीन युवकों पर दर्जनभर हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया था। खनन माफिया से जुड़े इन लोगों द्वारा किए गए इस हमले में तीनों युवकों मनु शर्मा, तेजेंद्र व रोहित धीमान बुरी तरह घायल हो गए थे। मामले में पुलिस ने दर्जनभर लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। जांच में कोताही बरतने के नाम पर एक एसआई को निलंबित भी किया जा चुका है लेकिन जब जांच में कोई प्रगति नहीं हुई तो पीड़ितों के परिजनों व क्षेत्रवासियों की मांग पर सीआईए को भी मामले की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया। अभी सीआईए और पुलिस कुछ कर पाती कि इससे पहले ही इस मामले की जांच स्टेट क्राइम के हवाले कर दी गई थी। बिना पीड़ितों के सहमति के जांच को स्टेट क्राइम को सौंपने को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष फैल गया था और उन्होंने गत 27 फरवरी को भी पुलिस थाना के समक्ष धरना दिया था। उसी दिन पीड़ित पक्ष के कुछ लोग पुलिस महानिदेशक से मिले थे जिन्होंने इस मामले की जांच को स्टेट क्राइम से लेकर पुलिस अधीक्षक, यमुनानगर को सौंप देने के साथ-साथ आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने का भी आश्वासन दिया था।
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