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डिजास्टर मैनेजमेंट, अस्पताल स्टाफ को बताया कैसे पाए आग पर काबू

Fri, 21 Dec 2018 01:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 21 Dec 2018 01:11 AM IST
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डिजास्टर मैनेजमेंट, अस्पताल स्टाफ को बताया कैसे पाए आग पर काबू
अस्पताल स्टाफ को बताया कैसे पाएं आग पर काबू
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फोटो नंबर : 22
फायर ब्रिगेड के स्टाफ ने कैंट सिविल अस्पताल में स्टाफ को दी ट्रेनिंग
आगामी दिनों में अस्पताल में मॉकड्रिल कराने पर भी विचार
मुंबई के अस्पताल में गत दिनों आगजनी की घटना के बाद कैंट अस्पताल में फायर सेफ्टी पर स्टाफ को दी जानकारी
रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। आपात परिस्थितियों में स्टाफ को क्या करना चाहिए, आग पर काबू पाने के लिए सबसे पहले स्टाफ को अपने पास उपलब्ध उपकरणों से क्या-क्या प्रयास करने चाहिए, भगदड़ नहीं मचानी चाहिए एवं अन्य बारीकियों की जानकारी वीरवार सुबह कैंट सिविल अस्पताल के स्टाफ को फायर ब्रिगेड द्वारा दी गई। उन्हें बताया गया कि घबराने के बजाय समझदारी से कार्य लेते हुए आग पर कैसे काबू पाया जाना है। आग कितने प्रकार की होती है और अलग-अलग अग्निशमन यंत्र किन-किन परिस्थितियों में कारगर हैं। यह कसरत मुंबई में गत दिनों अस्पताल में लगी आग में नौ लोगों की मौत के बाद की जा रही है ताकि भविष्य में यहां कोई घटना होती है तो स्टाफ हर परिस्थिति में पारंगत हो सके।
वीरवार सुबह फायर ब्रिगेड के लीडिंग फायर मैन प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीम ने सिविल अस्पताल के स्टाफ को आग बुझाने की ट्रेनिंग दी। इस दौरान अस्पताल का नर्सिंग, क्लेरिकल एवं अन्य स्टाफ मौजूद था। स्टाफ को बताया गया कि आग किस-किस प्रकार की होती है, यदि इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट से आग लगती है तो उस पर कैसे काबू पाया जा सकता है। फोम, पाउडर एवं पानी का आग बुझाने के लिए कब-कब और कैसे इस्तेमाल किया जाना है। प्रमोद कुमार ने बताया कि फायर ब्रिगेड के आने से पहले कैसे मौके पर व्यवस्था संभालनी है। इस दौरान फायर ब्रिगेड से फायरमैन सुशील कुमार, विनोद के अलावा सिविल अस्पताल के फायर सेफ्टी ऑफिसर अश्विनी एवं अन्य स्टाफ मौजूद रहा।
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सिविल अस्पताल में अब तक नहीं हुई मॉकड्रिल
कैंट के नये बने सिविल अस्पताल में इलाज आरंभ हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, मगर अभी तक अस्पताल में मॉकड्रिल नहीं हुई है। हालांकि अस्पताल नॉमर्स के मुताबिक समय-समय पर स्टाफ को डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत ट्रेनिंग और आग से निपटने की जानकारी दी जाती है, मगर यह परखना अभी बाकी है कि क्या आपात परिस्थिति में स्टाफ बेहतर रिस्पांस कर पाता है या नहीं। बता दें कि कैंट सिविल अस्पताल में इस समय प्रतिदिन औसतन ढाई हजार के लगभग ओपीडी है। ओपीडी के अलावा इमरजेंसी वार्ड एवं अन्य वार्डों में मरीजों के अलावा स्टाफ भी मौजूद है। आपात परिस्थितियों में सभी कैसे परफार्म करते हैं इसकी जानकारी लेना जरूरी है।
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नये बने अस्पताल में व्यापक प्रबंध
आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए कैंट के नये बने सिविल अस्पताल में फिलहाल व्यापक प्रबंध हैं। यहां पर फायर सेफ्टी ऑफिसर तक है जबकि आग से निपटने के लिए वाटर हायडेंट, स्प्रिंकल, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट एवं अन्य सुविधाएं हैं।

कोट्स
डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत अस्पताल स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी जानकारी दी जा रही है। वीरवार सुबह फायर सेफ्टी का डेमो दिया गया है ताकि स्टाफ इसमें पारंगत हो सके। रूटीन में स्टाफ को पूरी ट्रेनिंग दी जा रही है।
-डॉ. सतीश कुमार, एसएमओ, सिविल अस्पताल, अंबाला कैंट।
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