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- 67 गांवों की पंचायतों के प्रतिनिधियों को नहीं मिला मानदेय
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:14 AM IST
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14 माह से मानदेय के इंतजार में सरपंच व पंच
अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। ग्राम पंचायत चुनावों को जीतने के बाद सरपंचों व पंचो को पंचायत की कमान संभाले लगभग दो साल होने को आए है, परंतु बराड़ा ब्लाक की 67 पंचायतों के सरपंच व पंचों को उनका मानदेय नहीं मिला। एक ओर जहां सरपंचों का लगभग एक साल का मानदेय सरकार के पास अटका हुआ है वहीं पंचों का लगभग 14 महीनों का मानदेय नहीं आया जिससे सरपंच व पंचों को पंचायत के संचालन करने में भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है । बता दें कि सरपंचों के मानदेय को इस बार के चुनावों के बाद प्रदेश सरकार द्वारा तीन हजार रुपये निश्चित किया गया था जबकि पंचो को यह मानदेय एक हजार के रूप में मिलता है जोकि सीधा उनके बैंक खातों में ही जमा होता है। मानदेय न मिलने के कारण अब 67 सरपंचों व सैकड़ों पंचों को गांव में विकास कार्यों की ग्रांट आने से अधिक अपने मानदेेय का इंतजार रहने लगा है ।
केवल एक बार आया मानदेय
फरवरी 2016 में पंचायत की कमान संभालने के बाद से लेकर 2017 दिसंबर तक बराड़ा ब्लाक के सरपंचों व पंचो का मानदेय केवल एक बार उनके बैंक खाते में आया है। कुछ सरपंचों ने बताया कि उनका लगभग 14 महीनों का मानदेय मई 2017 में 43,800 रुपये बैंक खातों में आया था। वहीं पंचों का लगभग छह महीने का मानदेय अक्तूबर 2016 में 6321 रुपये बैंक खातों में जमा किया गया था। सरपंचो व पंचो को अपने पदो पर नियुक्त हुए लगभग दो साल होने को है लेकिन तब से लेकर अब तक का बकाया लाखों रुपये का मानदेय सरकार द्वारा नहीं दिया गया।
सरपंच यूनियन ने जताया रोष
बराड़ा खंड़ सरपंच यूनियन के प्रधान नेत्रपाल राणा ने बताया कि सरपंचों व पंचों को पिछले कई महीनों से मानदेय नहीं मिल रहा है। समस्या से अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी तक राशि नहीं आई है। चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ सरकार ऐसा रवैया अपना रही है जोकि सही नहीं है।
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क्या कहते है बीडीपीओ
बीडीपीओं नारायणगढ़ सुमित कुमार ने कहा कि बजट की कमी के चलते सरपंचों व पंचों को मानदेय नहीं मिल पा रहा है। समस्या उच्च अधिकारियों के संज्ञान में डाल दी गई है। जल्द इसका निवारण होगा व मानदेय निवारण भी कर दिया जाएगा।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
इनेलो प्रवक्ता श्री पाल जैन ने कहा कि जिस सरकार में पंचायत के मुखियाओं को मानदेय न मिल रहा हो, उन्हें विकास कार्यों के लिए कितनी ग्रांट आती होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा सरकार केवल जुमलों की सरकार है ।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। ग्राम पंचायत चुनावों को जीतने के बाद सरपंचों व पंचो को पंचायत की कमान संभाले लगभग दो साल होने को आए है, परंतु बराड़ा ब्लाक की 67 पंचायतों के सरपंच व पंचों को उनका मानदेय नहीं मिला। एक ओर जहां सरपंचों का लगभग एक साल का मानदेय सरकार के पास अटका हुआ है वहीं पंचों का लगभग 14 महीनों का मानदेय नहीं आया जिससे सरपंच व पंचों को पंचायत के संचालन करने में भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है । बता दें कि सरपंचों के मानदेय को इस बार के चुनावों के बाद प्रदेश सरकार द्वारा तीन हजार रुपये निश्चित किया गया था जबकि पंचो को यह मानदेय एक हजार के रूप में मिलता है जोकि सीधा उनके बैंक खातों में ही जमा होता है। मानदेय न मिलने के कारण अब 67 सरपंचों व सैकड़ों पंचों को गांव में विकास कार्यों की ग्रांट आने से अधिक अपने मानदेेय का इंतजार रहने लगा है ।
केवल एक बार आया मानदेय
फरवरी 2016 में पंचायत की कमान संभालने के बाद से लेकर 2017 दिसंबर तक बराड़ा ब्लाक के सरपंचों व पंचो का मानदेय केवल एक बार उनके बैंक खाते में आया है। कुछ सरपंचों ने बताया कि उनका लगभग 14 महीनों का मानदेय मई 2017 में 43,800 रुपये बैंक खातों में आया था। वहीं पंचों का लगभग छह महीने का मानदेय अक्तूबर 2016 में 6321 रुपये बैंक खातों में जमा किया गया था। सरपंचो व पंचो को अपने पदो पर नियुक्त हुए लगभग दो साल होने को है लेकिन तब से लेकर अब तक का बकाया लाखों रुपये का मानदेय सरकार द्वारा नहीं दिया गया।
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सरपंच यूनियन ने जताया रोष
बराड़ा खंड़ सरपंच यूनियन के प्रधान नेत्रपाल राणा ने बताया कि सरपंचों व पंचों को पिछले कई महीनों से मानदेय नहीं मिल रहा है। समस्या से अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी तक राशि नहीं आई है। चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ सरकार ऐसा रवैया अपना रही है जोकि सही नहीं है।
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क्या कहते है बीडीपीओ
बीडीपीओं नारायणगढ़ सुमित कुमार ने कहा कि बजट की कमी के चलते सरपंचों व पंचों को मानदेय नहीं मिल पा रहा है। समस्या उच्च अधिकारियों के संज्ञान में डाल दी गई है। जल्द इसका निवारण होगा व मानदेय निवारण भी कर दिया जाएगा।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
इनेलो प्रवक्ता श्री पाल जैन ने कहा कि जिस सरकार में पंचायत के मुखियाओं को मानदेय न मिल रहा हो, उन्हें विकास कार्यों के लिए कितनी ग्रांट आती होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा सरकार केवल जुमलों की सरकार है ।