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सिर्फ 25 क्विंटल तक ही होगी सूरजमुखी की सरकारी खरीद
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अंबाला सिटी। शहर अनाज मंडी में सूरजमुखी की आवक का सीजन जोरों पर है। सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड सूरजमुखी की 5388 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब खरीद कर रही है। वहीं पंजाब से आने वाली सूरजमुखी की खरीद निजी एजेंसियां कर रही हैं, जिसका रेट 3200 से लेकर 3600 रुपये तक है। 5388 रुपये का रेट उन किसानों को मिलेगा जिनका रिकार्ड मेरा फसल, मेरा ब्योरा नामक पार्टल पर ऑनलाइन है।
सूरजमुखी की भरत प्रति बोरी 28 किलो की हो रही है, जिसमें 500 ग्राम बोरी का वजन निर्धारित किया गया है। अब तक शहर अनाज मंडी में 1050 क्विंटल सूरजमुखी की खरीद की जा चुकी है, जिसमें से 210 क्विंटल निजी एजेंसियों ने खरीदी है। सरकारी और निजी बोली अलग-अलग समय में की जा रही है। निजी बोली उन किसानों के लिए है, जिनका रिकार्ड ऑनलाइन नहीं चढ़ा है। सरकारी बोली उन किसानों की फसल की होती है, जिनका रिकार्ड पोर्टल पर पहले से ऑनलाइन है। सरकार ने 9 प्रतिशत नमी वाली सूरजमुखी को ही खरीद के लिए उपयुक्त माना है। इसलिए इससे ज्यादा की नमी वाली फसल को नहीं खरीदा जा रहा। उसे बेचने से पहले किसानों को सुखाना पड़ रहा है।
ऑनलाइन रिकार्ड वाले किसान हो रहे मालामाल
करीब पांच साल पहले सभी किसानों की सूरजमुखी एक ही रेट बिकती थी, लेकिन जब से सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल की योजना चलाई है तब से किसानों ऑनलाइन रिकार्ड वाले किसान मालामाल हो रहे हैं। दूसरी ओर जो किसान इस योजना के मुताबिक अपने खेतों को ऑनलाइन नहीं करवा रहे उन्हें सरसों व सूरजमुखी की अपनी फसलों में हजारों रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
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नौ प्रतिशत नमी वाली सूरजमुखी की फसल की ही सरकार खरीद कर रही है, इससे ज्यादा नमी वाले किसान को अपनी फसल सुखा के बेचनी पड़ेगी।
- आशा, सचिव मार्किट कमेटी, अंबाला शहर।
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सूरजमुखी की भरत प्रति बोरी 28 किलो की हो रही है, जिसमें 500 ग्राम बोरी का वजन निर्धारित किया गया है। अब तक शहर अनाज मंडी में 1050 क्विंटल सूरजमुखी की खरीद की जा चुकी है, जिसमें से 210 क्विंटल निजी एजेंसियों ने खरीदी है। सरकारी और निजी बोली अलग-अलग समय में की जा रही है। निजी बोली उन किसानों के लिए है, जिनका रिकार्ड ऑनलाइन नहीं चढ़ा है। सरकारी बोली उन किसानों की फसल की होती है, जिनका रिकार्ड पोर्टल पर पहले से ऑनलाइन है। सरकार ने 9 प्रतिशत नमी वाली सूरजमुखी को ही खरीद के लिए उपयुक्त माना है। इसलिए इससे ज्यादा की नमी वाली फसल को नहीं खरीदा जा रहा। उसे बेचने से पहले किसानों को सुखाना पड़ रहा है।
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ऑनलाइन रिकार्ड वाले किसान हो रहे मालामाल
करीब पांच साल पहले सभी किसानों की सूरजमुखी एक ही रेट बिकती थी, लेकिन जब से सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल की योजना चलाई है तब से किसानों ऑनलाइन रिकार्ड वाले किसान मालामाल हो रहे हैं। दूसरी ओर जो किसान इस योजना के मुताबिक अपने खेतों को ऑनलाइन नहीं करवा रहे उन्हें सरसों व सूरजमुखी की अपनी फसलों में हजारों रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
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नौ प्रतिशत नमी वाली सूरजमुखी की फसल की ही सरकार खरीद कर रही है, इससे ज्यादा नमी वाले किसान को अपनी फसल सुखा के बेचनी पड़ेगी।
- आशा, सचिव मार्किट कमेटी, अंबाला शहर।