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अंबाला मंडल द्वारा डिजाइन विस्टाडोम कोच बढ़ाएंगे पर्यटक स्थलों की शान
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रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। अंबाला रेल मंडल के डिजाइन किए गए विस्टाडोम कोच अब देशभर में नैरो गेज (छोटी लाइन) सेक्शन पर स्थित पर्यटन स्थलों की शान बढ़ाएंगे। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रेलवे ऐसे 100 नए कोच बनाने की योजना बना रहा है। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने इसके संकेत भी दिए हैं। अंबाला रेल मंडल के अधीन आने वाले कालका वर्कशॉप द्वारा कालका-शिमला नैरोगेज रेलमार्ग पर इस कोच को पहली बार डिजाइन कर चलाया गया था। मंत्री पीयूष गोयल ने कोच के इस मॉडल में खासी दिलचस्पी दिखाई थी। इसके बाद अब ऐसे और कोच अब बनाए जाएंगे।
ये है खासियत : पारंपरिक छत की जगह शीशा लगा है कोच में
पर्यटक स्थलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों का लुत्फ उठाने के लिए विस्टाडोम कोच को कालका वर्कशॉप द्वारा तैयार किया गया था। नवंबर 2018 में रेलमंत्री कालका-शिमला रेलमार्ग के निरीक्षण पर आए थे और उन्हें यह कोच बेहद आकर्षक लगा था। कोच में सफर करने वाले यात्री ऊपर पहाड़ी क्षेत्र का हसीन नजारा देख सकते हैं जबकि हिमपात के समय ऊपर से गिरती बर्फ उन्हें और आकर्षित करती है। इसके अलावा कोच में पारंपरिक खिड़कियों के स्थान पर शीशे की बड़ी खिड़कियां लगी हैं। केवल एक कोच डिजाइन किया गया था। कोच में सफर करने वाले यात्रियों के अनुभव के आधार पर और कोच बनाने की कवायद की जा रही है।
देश में यहां पर नैरोगेज रेलमार्ग
देश में विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग नैरो गेज सेक्शन में गिना जाता है जोकि करीब 95 किमी. लंबा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी-दार्जलिंग के मध्य 78 किमी. लंबा नैरोगेज सेक्शन है जबकि महाराष्ट्र में नेराल से मथेरन के मध्य भी नैरोगेज ट्रैक है जहां विस्डाटोम कोच का इस्तेमाल पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया जाएगा। इसके अलाव अन्य ट्रैक पर भी इन्हें डिजाइन करने की योजना है।
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10 लाख रुपये में एक कोच होता है डिजाइन
कालका वर्कशाप द्वारा कोच को दस लाख रुपये की लागत से डिजाइन किया गया था। पुराने कोच को ही मॉडीफाई कर नए कोच का रूप दिया गया था। मगर रेलवे अब नए सिरे से कोच तैयार करेगी जिसकी जिम्मेदारी कालका वर्कशॉप और इंटीग्रल कोच फैक्टरी की होगी।
रेलवे द्वारा विस्टाडोम कोच तैयार किए गए हैं जोकि बेहद आकर्षक है। इनमें सफर करने का अलग की अनुभव है। मैंने ऐसे 100 नए कोच बनाने के लिए कहा है। भविष्य में अलग-अलग रेलमार्गों पर पर्यटकों के लिए ऐसे कोच ट्रेनों में जोड़े जाएंगे।
-पीयूष गोयल, रेलमंत्री।
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अंबाला कैंट। अंबाला रेल मंडल के डिजाइन किए गए विस्टाडोम कोच अब देशभर में नैरो गेज (छोटी लाइन) सेक्शन पर स्थित पर्यटन स्थलों की शान बढ़ाएंगे। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रेलवे ऐसे 100 नए कोच बनाने की योजना बना रहा है। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने इसके संकेत भी दिए हैं। अंबाला रेल मंडल के अधीन आने वाले कालका वर्कशॉप द्वारा कालका-शिमला नैरोगेज रेलमार्ग पर इस कोच को पहली बार डिजाइन कर चलाया गया था। मंत्री पीयूष गोयल ने कोच के इस मॉडल में खासी दिलचस्पी दिखाई थी। इसके बाद अब ऐसे और कोच अब बनाए जाएंगे।
ये है खासियत : पारंपरिक छत की जगह शीशा लगा है कोच में
पर्यटक स्थलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों का लुत्फ उठाने के लिए विस्टाडोम कोच को कालका वर्कशॉप द्वारा तैयार किया गया था। नवंबर 2018 में रेलमंत्री कालका-शिमला रेलमार्ग के निरीक्षण पर आए थे और उन्हें यह कोच बेहद आकर्षक लगा था। कोच में सफर करने वाले यात्री ऊपर पहाड़ी क्षेत्र का हसीन नजारा देख सकते हैं जबकि हिमपात के समय ऊपर से गिरती बर्फ उन्हें और आकर्षित करती है। इसके अलावा कोच में पारंपरिक खिड़कियों के स्थान पर शीशे की बड़ी खिड़कियां लगी हैं। केवल एक कोच डिजाइन किया गया था। कोच में सफर करने वाले यात्रियों के अनुभव के आधार पर और कोच बनाने की कवायद की जा रही है।
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देश में यहां पर नैरोगेज रेलमार्ग
देश में विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग नैरो गेज सेक्शन में गिना जाता है जोकि करीब 95 किमी. लंबा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी-दार्जलिंग के मध्य 78 किमी. लंबा नैरोगेज सेक्शन है जबकि महाराष्ट्र में नेराल से मथेरन के मध्य भी नैरोगेज ट्रैक है जहां विस्डाटोम कोच का इस्तेमाल पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया जाएगा। इसके अलाव अन्य ट्रैक पर भी इन्हें डिजाइन करने की योजना है।
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10 लाख रुपये में एक कोच होता है डिजाइन
कालका वर्कशाप द्वारा कोच को दस लाख रुपये की लागत से डिजाइन किया गया था। पुराने कोच को ही मॉडीफाई कर नए कोच का रूप दिया गया था। मगर रेलवे अब नए सिरे से कोच तैयार करेगी जिसकी जिम्मेदारी कालका वर्कशॉप और इंटीग्रल कोच फैक्टरी की होगी।
रेलवे द्वारा विस्टाडोम कोच तैयार किए गए हैं जोकि बेहद आकर्षक है। इनमें सफर करने का अलग की अनुभव है। मैंने ऐसे 100 नए कोच बनाने के लिए कहा है। भविष्य में अलग-अलग रेलमार्गों पर पर्यटकों के लिए ऐसे कोच ट्रेनों में जोड़े जाएंगे।
-पीयूष गोयल, रेलमंत्री।