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Ambala News: अंबाला शहर के अस्पताल में 13 और छावनी में 7 सर्जरी
Sat, 07 Feb 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:48 AM IST
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शहर के जिला नागरिक अस्पताल में ऑप्रेशन के बाद टीम। संवाद
अंबाला सिटी। सर्जिकल सप्ताह के तहत शुक्रवार को दूसरे दिन सर्जरी की गई। इन सर्जरी में सबसे ज्यादा आंख विभाग की ओर से सर्जरी की गई। शहर में जिला नागरिक अस्पताल में 13 और अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में सात सर्जरी की गई। दोनों अस्पताल में कुल 20 सर्जरी हुई। यह सर्जरी सुबह से शाम तक चली। शहर में आंख की सात, सामान्य सर्जरी तीन, हड्डी रोग संबंधित दो और गायनी की एक सर्जरी की गई। यह सर्जिकल सप्ताह 11 फरवरी तक चलेगा।
इस सप्ताह के तहत रोजाना ऑपरेशन तो किए जा रहे हैं, मगर अभी ऑपरेशन की संख्या कम है। जिससे लोगों को इंतजार भी करना पड़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुखप्रीत सिंह ने बताया कि सर्जिकल सप्ताह के तहत रोजाना सर्जरी की जा रही है और यह सर्जरी शाम तक चल रही हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को सर्जरी करने के लिए पहले तारीख दी जा रही हैं और उसके बाद उनकी फिटनेस जांचकर उनकी सर्जरी की जा रही है। शुक्रवार को आंख चेक करवाने के लिए काफी लंबी लाइन लगी रही। आयुष्मान भारत योजना के तहत 15 बीमारियों का इलाज निजी अस्पताल की बजाए सरकारी अस्पताल में ही होने पर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जो मरीज पहले निजी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते थे, अब वह मरीज सरकारी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इससे डॉक्टरों पर कार्य दबाव भी बढ़ा है।
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इस सप्ताह के तहत रोजाना ऑपरेशन तो किए जा रहे हैं, मगर अभी ऑपरेशन की संख्या कम है। जिससे लोगों को इंतजार भी करना पड़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुखप्रीत सिंह ने बताया कि सर्जिकल सप्ताह के तहत रोजाना सर्जरी की जा रही है और यह सर्जरी शाम तक चल रही हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को सर्जरी करने के लिए पहले तारीख दी जा रही हैं और उसके बाद उनकी फिटनेस जांचकर उनकी सर्जरी की जा रही है। शुक्रवार को आंख चेक करवाने के लिए काफी लंबी लाइन लगी रही। आयुष्मान भारत योजना के तहत 15 बीमारियों का इलाज निजी अस्पताल की बजाए सरकारी अस्पताल में ही होने पर मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जो मरीज पहले निजी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते थे, अब वह मरीज सरकारी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इससे डॉक्टरों पर कार्य दबाव भी बढ़ा है।
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