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- ट्रांसपोर्ट आरंभ होने से बाजार में अब आना हुआ सामान
Updated Tue, 01 Aug 2017 11:47 PM IST
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धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा बाजार
- ट्रांसपोर्ट आरंभ होने से बाजार में अब आना हुआ सामान
- नई टैक्स प्रणाली लागू होने से व्यापारी अभी कम मंगवा रहे सामान
- जीएसटी आने के बाद महंगा हुआ घर का बजट
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जीएसटी आने के बाद अब बाजार धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। नई टैक्स दरें तय होने के बाद व्यापारी अभी माल कम मंगवा रहे हैं। इस वजह से बाजार अभी थोड़ा धीमा है। जीएसटी लागू होने के बाद जहां पहले ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों के भी पहिये थमे थे अब वह चल रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बाजार धीरे धीरे से रफ्तार पकड़ रहा है और पहले दो सप्ताह में जो बाजार ठप हुआ था अब वह धीरे धीरे उभर रहा है। हालांकि जीएसटी लागू होने से अब उपभोक्ताओं की जेबों पर कैंची चली आरंभ हो गई है और घर का बजट बढ़ने लगा है।
अंबाला कैंट गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष तिलकराज ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले और बाद में कुछ दिनों तक ट्रांसपोर्टरों को कुछ दिक्कत झेलनी पड़ी थी। नई टैक्स व्यवस्था को लेकर हर कोई असमंजस में था, मगर अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है। अंबाला में दवाओं, खाद्य सामग्री, कपड़ा, साइंस उपकरणों व अन्य माल की सप्लाई के आर्डर है जोकि आरंभ हो गए हैं। टैक्स प्रणाली नई होने की वजह से हालांकि व्यापारी अभी ज्यादा माल बुक नहीं कर रहे हैं। माल की बुकिंग अभी आधी है। बाजार खुलेगा तो ट्रांसपोर्टेशन भी तेज होगी।
राखी से पहले अब खुलने लगा बाजार (फोटो नंबर : 27)
जीएसटी के बाद सबसे पहला त्यौहार राखी है और इसी को लेकर बाजार में खरीददारी की माहौल है। डिजाइनर व सामान्य राखियों की बाजार में भरमार है जिस वजह से बाजार अब गुलजार हो रहे हैं। कपड़ों की खरीददारी भी अब बाजार में जोर पकडने लगी हैं। सदर में कपड़ों के शोरूम संचालक अतुल ने कहा कि राखी से नए सीजन की शुरूआत हो जाती है। अब आगे त्यौहार होंगे तो खरीदारी को लेकर बाजार में रौनक बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी से कपड़ों पर ज्यादा असर नहीं है। हालांकि दाम कुछ कम ज्यादा अवश्य हुए हैं, मगर ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है।
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घर के बजट में कुछ बढ़ोतरी
घर का बजट जीएसटी आने के बाद से कुछ बढ़ गया है। शोरूम में अब विभिन्न सामान पर अलग-अलग जीएसटी है और घरेलू सामान टैक्स के दायरे में आ गया है। मसलन साबुन, तेल के अलावा कपड़ा व अन्य सामान की कीमतों पर असर पड़ा है। हालांकि अभी कुछ दुकान संचालक पुराने स्टॉक को ही निकाल रहे हैं, लेकिन घरेलू बजट पर जीएसटी का ज्यादा असर अगले माह से पड़ेगा।
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- ट्रांसपोर्ट आरंभ होने से बाजार में अब आना हुआ सामान
- नई टैक्स प्रणाली लागू होने से व्यापारी अभी कम मंगवा रहे सामान
- जीएसटी आने के बाद महंगा हुआ घर का बजट
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जीएसटी आने के बाद अब बाजार धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। नई टैक्स दरें तय होने के बाद व्यापारी अभी माल कम मंगवा रहे हैं। इस वजह से बाजार अभी थोड़ा धीमा है। जीएसटी लागू होने के बाद जहां पहले ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों के भी पहिये थमे थे अब वह चल रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बाजार धीरे धीरे से रफ्तार पकड़ रहा है और पहले दो सप्ताह में जो बाजार ठप हुआ था अब वह धीरे धीरे उभर रहा है। हालांकि जीएसटी लागू होने से अब उपभोक्ताओं की जेबों पर कैंची चली आरंभ हो गई है और घर का बजट बढ़ने लगा है।
अंबाला कैंट गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष तिलकराज ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले और बाद में कुछ दिनों तक ट्रांसपोर्टरों को कुछ दिक्कत झेलनी पड़ी थी। नई टैक्स व्यवस्था को लेकर हर कोई असमंजस में था, मगर अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है। अंबाला में दवाओं, खाद्य सामग्री, कपड़ा, साइंस उपकरणों व अन्य माल की सप्लाई के आर्डर है जोकि आरंभ हो गए हैं। टैक्स प्रणाली नई होने की वजह से हालांकि व्यापारी अभी ज्यादा माल बुक नहीं कर रहे हैं। माल की बुकिंग अभी आधी है। बाजार खुलेगा तो ट्रांसपोर्टेशन भी तेज होगी।
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राखी से पहले अब खुलने लगा बाजार (फोटो नंबर : 27)
जीएसटी के बाद सबसे पहला त्यौहार राखी है और इसी को लेकर बाजार में खरीददारी की माहौल है। डिजाइनर व सामान्य राखियों की बाजार में भरमार है जिस वजह से बाजार अब गुलजार हो रहे हैं। कपड़ों की खरीददारी भी अब बाजार में जोर पकडने लगी हैं। सदर में कपड़ों के शोरूम संचालक अतुल ने कहा कि राखी से नए सीजन की शुरूआत हो जाती है। अब आगे त्यौहार होंगे तो खरीदारी को लेकर बाजार में रौनक बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी से कपड़ों पर ज्यादा असर नहीं है। हालांकि दाम कुछ कम ज्यादा अवश्य हुए हैं, मगर ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है।
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घर के बजट में कुछ बढ़ोतरी
घर का बजट जीएसटी आने के बाद से कुछ बढ़ गया है। शोरूम में अब विभिन्न सामान पर अलग-अलग जीएसटी है और घरेलू सामान टैक्स के दायरे में आ गया है। मसलन साबुन, तेल के अलावा कपड़ा व अन्य सामान की कीमतों पर असर पड़ा है। हालांकि अभी कुछ दुकान संचालक पुराने स्टॉक को ही निकाल रहे हैं, लेकिन घरेलू बजट पर जीएसटी का ज्यादा असर अगले माह से पड़ेगा।