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आस फांऊडेशन ने पैदल मार्च निकालकर सरकार को कोसा
Updated Tue, 13 Feb 2018 01:21 AM IST
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प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और सरकारी ऑनलाइन सेवा में खामियों के विरोध में किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और सरकारी ऑनलाइन सेवाओं में हो रही अनियमितताओं के विरोध में आस फाउंडेशन ने सोमवार को रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान अंबाला एसडीएम ऑफिस में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन एसडीएम सुभाष सिहाग कार्यालय में मौजूद नहीं थे जिनके बदले प्रदर्शनकारियों ने स्टेनो को ज्ञापन सौंपा।
वहीं आस फाउंडेशन ने रेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता कर सरकार की नीतियों और नीयत पर सवाल खड़े किए। फाउंडेशन अध्यक्ष दीपक मेहरा ने बताया कि 2010 में केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए लाई थी इसे लागू करने हेतु राज्यों पर छोड़ दिया था। 2014 में इसे हरियाणा विधानसभा में पास किया गया परंतु भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब प्राइवेट अस्पतालों के दबाव में इस एक्ट में संशोधन कर एक्ट की मूल भावना को ही समाप्त कर दिया है। इमरजेंसी सर्विसेज के लिए अब लोगों को 50 बेड वाले अस्पताल की तलाश करनी पड़ेगी। गरीब लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में मनमाने रेट पर ही इलाज करवाना पडे़गा और सभी टेस्ट के रेट प्राइवेट अस्पताल ही तय करेंगे। आस फाउंडेशन के अंबाला जिलाध्यक्ष अमरजीत सैनी ने सरकारी अस्पताल में मशीन की कमी और जेनेरिक दवाओं के अभाव को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता को सरकारी नीतियों का लाभ नहीं मिल रहा, स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित है। इस मौके पर आस फाउंडेशन उपाध्यक्ष रानी कंबोज, धीरज, राकेश, जोगेंदर, जश्नदीप, एमएस ढिल्लो, जरनैल सिंह, मनदीप कश्यप, अमरजीत, अमित वर्मा, बंटी राम, हनिश शर्मा, गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और सरकारी ऑनलाइन सेवाओं में हो रही अनियमितताओं के विरोध में आस फाउंडेशन ने सोमवार को रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान अंबाला एसडीएम ऑफिस में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन एसडीएम सुभाष सिहाग कार्यालय में मौजूद नहीं थे जिनके बदले प्रदर्शनकारियों ने स्टेनो को ज्ञापन सौंपा।
वहीं आस फाउंडेशन ने रेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता कर सरकार की नीतियों और नीयत पर सवाल खड़े किए। फाउंडेशन अध्यक्ष दीपक मेहरा ने बताया कि 2010 में केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए लाई थी इसे लागू करने हेतु राज्यों पर छोड़ दिया था। 2014 में इसे हरियाणा विधानसभा में पास किया गया परंतु भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब प्राइवेट अस्पतालों के दबाव में इस एक्ट में संशोधन कर एक्ट की मूल भावना को ही समाप्त कर दिया है। इमरजेंसी सर्विसेज के लिए अब लोगों को 50 बेड वाले अस्पताल की तलाश करनी पड़ेगी। गरीब लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में मनमाने रेट पर ही इलाज करवाना पडे़गा और सभी टेस्ट के रेट प्राइवेट अस्पताल ही तय करेंगे। आस फाउंडेशन के अंबाला जिलाध्यक्ष अमरजीत सैनी ने सरकारी अस्पताल में मशीन की कमी और जेनेरिक दवाओं के अभाव को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता को सरकारी नीतियों का लाभ नहीं मिल रहा, स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित है। इस मौके पर आस फाउंडेशन उपाध्यक्ष रानी कंबोज, धीरज, राकेश, जोगेंदर, जश्नदीप, एमएस ढिल्लो, जरनैल सिंह, मनदीप कश्यप, अमरजीत, अमित वर्मा, बंटी राम, हनिश शर्मा, गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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