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ट्विन सिटी में सजे देवी मंदिर, आज से लगेगा भक्तों का तांता

Wed, 10 Oct 2018 12:44 AM IST
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:44 AM IST
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ट्विन सिटी में सजे देवी मंदिर, आज से लगेगा भक्तों का तांता
अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला सिटी। नवरात्र का उत्साह आरंभ हो गया है। पहले नवरात्र से पहले मंगलवार को मंदिरों व बाजारों में रौनक रही। शृंगार व अन्य सामान की जमकर खरीदारी हुई। ट्विन सिटी के मंदिर नवरात्रों से पहले सज गए हैं। कैंट के कालीबाड़ी मंदिर, भगवती मंदिर दयालबाग और सनातन धर्म मंदिरों को जगमग रोशनी से सजाया गया है। नवरात्र को लेकर प्रशासन की ओर से मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस का भी प्रबंध किया है। इसी तरह सिटी में अंबिका देवी मंदिर, काली माता मंदिर जैन कालेज रोड, वैष्णों देवी मंदिर सेक्टर दस, नैना देवी मंदिर विश्वकर्मा रोड में भी व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं।

अंबिका देवी मंदिर आस्था का प्रतीक
सिटी में अंबिका देवी मंदिर आस्था का प्रतीक है। पिंडी रूप में विराजमान माता अंबिका देवी मंदिर में माता अंबिका देवी की पिंडी प्रकट हुई थी, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना की गई। पिछले करीब तीन सौ सालों से मां की ज्योति जग रही है। पुराणों में जिक्र और आस्था से जुड़ा होने के कारण नवरात्र के मौके पर यहां शीश झुकाने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह मंदिर काफी प्राचीन और लोगों में मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा अर्चना करने से कष्ट दूर होते हैं। मां दुर्गा को सतयुग में अंबिका देवी के नाम से ही पुकारा जाता था। उस दौरान दुर्गम नामक राक्षस हुआ, जो जनता के लिए आफत बना हुआ था। उससे बचाव के लिए देवताओं ने पूजा करके अंबिका देवी को प्रकट किया था। जहां देवी ने दुर्गम राक्षस का वध किया था और उसके बाद अंबिका देवी का नाम दुर्गा पड़ा था। मंदिर में जिले के अलावा दूर के क्षेत्रों से लोग माथा टेकने पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह चार बजे, शाम को आठ बजे और रात्रि में साढ़े दस बजे आरती होती है।
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यह समय व ऐसे करें
पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा 10 अक्टूबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 6:22 से 7:25 तक है। कलश स्थापना और पूजन के लिए मिट्टी का पात्र और जौ के 11 या 21 दाने, शुद्ध साफ की हुई मिट्टी, जिसमें पत्थर नहीं हो, शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी , सोना, चांदी, तांबा या पीतल का कलश, मोली (लाल सूत्र) अशोक या आम के 5 पत्ते कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, साबुत चावल एक पानी वाला नारियल, पूजा में काम आने वाली सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्के, लाल कपड़ा या चुनरी, मिठाई, लाल गुलाब के फूलों की माला होनी चाहिए।
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