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- शिक्षा विभाग का स्कूली टीचर्स के लिए फरमान -
Updated Wed, 27 Dec 2017 12:42 AM IST
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जनवरी से मार्च तक चाइल्ड केयर लीव पर शिक्षा विभाग ने लगाई रोक
अंबाला कैंट।
शिक्षा विभाग ने तीन माह के लिए चाइल्ड केयर लीव पर रोक लगा दी है। यदि किसी को यह लीव चाहिए तो उसके लिए शर्तें पूरी करनी होंगी, जिसके बाद ही लीव मंजूर की जाएगी। इसके लिए विभाग ने जिला स्तर पर पत्र जारी किया है, जिसमें इसका जिक्र किया गया है। इसी को लेकर अध्यापक संघ भी खफा हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छोटे बच्चों की देखभाल के लिए टीचर्स को चाइल्ड केयर लीव दी जाती है। इसके लिए टीचर को एप्लीकेशन देनी होती है, जिसके आधार पर यह लीव मंजूर की जाती है। अब शिक्षा विभाग ने एक जनवरी से लेकर 31 मार्च तक चाइल्ड केयर लीव पर रोक लगाई। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि इसे बंद नहीं किया गया है, जबकि कुछ औपचारिकताएं पूरी कर इसे लिया जा सकता है। साथ ही तर्क दिया गया है कि साल के पहले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं, जिसके चलते कार्य की अधिकता रहती है। इसके अलावा बच्चों के पेपर भी हैं, जिसकी तैयारी के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में लीव देना मुश्किल हो जाता है। लेकिन यदि किसी को जरूरी है, तो वह कुछ औपचारिकताएं पूरी करता है, तो चाइल्ड केयर लीव दी जाएगी।
टीचर्स कर रहे हैं विरोध
स्कूलों में तैनात महिला टीचर्स इसका विरोध कर रहे हैं। इन टीचर्स का कहना है कि यह तो एक तरह से नियम थोपा जा रहा है। कोई भी टीचर अकारण ही अवकाश नहीं लेता। चाइल्ड केयर लीव की यदि किसी को जरूरत है, तो उसके लिए औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश समझ से परे हैं। चाइल्ड केयर लीव शर्तों के साथ देना गलत है। यह बच्चे का हक है कि जरूरत पड़ने पर मां अपने बच्चे की देखभाल करे, लेकिन शिक्षा विभाग इस तरह से निर्देश जारी कर परेशानी पैदा कर रहा है।
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- मोहन लाल परोचा, जिला महासचिव हरियाणा राजकीय अनुसूचित जाति अध्यापक संघ हरियाणा
चाइल्ड केयर लीव बंद नहीं की है, जबकि 31 जनवरी तक रोक लगाई है। विशेष परिस्थितियों में तो यह लीव दी जाएगी, जबकि इसके लिए औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। यदि बच्चे का इलाज हो रहा है, तो कागजात जमा करवाएं, विभाग लीव अवश्य देगा।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला
अंबाला कैंट।
शिक्षा विभाग ने तीन माह के लिए चाइल्ड केयर लीव पर रोक लगा दी है। यदि किसी को यह लीव चाहिए तो उसके लिए शर्तें पूरी करनी होंगी, जिसके बाद ही लीव मंजूर की जाएगी। इसके लिए विभाग ने जिला स्तर पर पत्र जारी किया है, जिसमें इसका जिक्र किया गया है। इसी को लेकर अध्यापक संघ भी खफा हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छोटे बच्चों की देखभाल के लिए टीचर्स को चाइल्ड केयर लीव दी जाती है। इसके लिए टीचर को एप्लीकेशन देनी होती है, जिसके आधार पर यह लीव मंजूर की जाती है। अब शिक्षा विभाग ने एक जनवरी से लेकर 31 मार्च तक चाइल्ड केयर लीव पर रोक लगाई। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि इसे बंद नहीं किया गया है, जबकि कुछ औपचारिकताएं पूरी कर इसे लिया जा सकता है। साथ ही तर्क दिया गया है कि साल के पहले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं, जिसके चलते कार्य की अधिकता रहती है। इसके अलावा बच्चों के पेपर भी हैं, जिसकी तैयारी के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में लीव देना मुश्किल हो जाता है। लेकिन यदि किसी को जरूरी है, तो वह कुछ औपचारिकताएं पूरी करता है, तो चाइल्ड केयर लीव दी जाएगी।
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टीचर्स कर रहे हैं विरोध
स्कूलों में तैनात महिला टीचर्स इसका विरोध कर रहे हैं। इन टीचर्स का कहना है कि यह तो एक तरह से नियम थोपा जा रहा है। कोई भी टीचर अकारण ही अवकाश नहीं लेता। चाइल्ड केयर लीव की यदि किसी को जरूरत है, तो उसके लिए औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश समझ से परे हैं। चाइल्ड केयर लीव शर्तों के साथ देना गलत है। यह बच्चे का हक है कि जरूरत पड़ने पर मां अपने बच्चे की देखभाल करे, लेकिन शिक्षा विभाग इस तरह से निर्देश जारी कर परेशानी पैदा कर रहा है।
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- मोहन लाल परोचा, जिला महासचिव हरियाणा राजकीय अनुसूचित जाति अध्यापक संघ हरियाणा
चाइल्ड केयर लीव बंद नहीं की है, जबकि 31 जनवरी तक रोक लगाई है। विशेष परिस्थितियों में तो यह लीव दी जाएगी, जबकि इसके लिए औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। यदि बच्चे का इलाज हो रहा है, तो कागजात जमा करवाएं, विभाग लीव अवश्य देगा।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला