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चिड़ियाघर में स्मार्ट पौधरोपण: 11 पौधों पर लगे क्यूआर कोड, प्रदेश में पहला प्रयोग- हर पौधे का डिजिटल बायोडाटा
Sat, 06 Jun 2026 03:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 03:50 AM IST
सार
उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि आंवला, मौलसी, पीपल, बरगद, पारिजात, रुद्राक्ष, रक्तचंदन और नीम सहित 11 पौधों पर उनके नाम, प्रजाति और वैज्ञानिक नाम अंकित किए गए हैं। इसके पहले भी पौधों पर स्कैनर लगे थे। स्कैन करने से पौधों की जानकारी मिल जाती थी। लेकिन अब पहली बार ऐसा है कि स्कैन करने पर पौधे किस तारीख को लगा, किसने लगाया, किस स्थान पर लगा है, पौधे की प्रजाति, पौधे की उपयोगिता समेत अन्य सभी जानकारियां मिल सकेंगी।
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उप निदेशक डॉ योगेश प्रताप सिंह पौधरोपण करते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
विश्व पर्यावरण दिवस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस के अवसर पर शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी और तकनीकी पहल की गई। परिसर स्थित कैंटीन के पास लगाए गए 11 पौधों को विशेष पहचान पत्र (आईडी कार्ड) और क्यूआर कोड से जोड़ा गया, जिससे उनकी निगरानी और पहचान आसान हो सकेगी।
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यह पौधारोपण सामाजिक संस्थाओं और चिड़ियाघर प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत चिड़ियाघर निदेशक सूरज कुमार ने जू कर्मियों और चिकित्सकों के साथ पौधारोपण कर की, जिसमें पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया गया।
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उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि आंवला, मौलसी, पीपल, बरगद, पारिजात, रुद्राक्ष, रक्तचंदन और नीम सहित 11 पौधों पर उनके नाम, प्रजाति और वैज्ञानिक नाम अंकित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कई पौधों पर क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस व्यवस्था से पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को पौधों के अध्ययन में आसानी होगी। उप निदेशक ने कहा कि यह पहल पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने बताया कि कई पौधों पर क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस व्यवस्था से पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को पौधों के अध्ययन में आसानी होगी। उप निदेशक ने कहा कि यह पहल पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।