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संतकबीरनगर के इस क्षेत्र में चलता है अंग्रेजों का बनाया हुआ कानून, लोग आज भी हैं परेशान
Sun, 31 May 2020 03:42 PM IST
vivek shukla
तारेश सिंह, मेंहदावल/ संतकबीरनगर।
तारेश सिंह, मेंहदावल/ संतकबीरनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 31 May 2020 03:42 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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आजादी की 73वीं वर्षगांठ 15 अगस्त को पूरी होगी और देश आजादी का जश्न मनाएगा, लेकिन संतकबीरनगर जिले की नगर पंचायत मेंहदावल की 40,000 की आबादी आज भी जमीदारी प्रथा की कैद में जकड़ा हुआ है। यहां के लोगों को दोहरा कर देना पड़ रहा है। सरकार जमीदारों से प्रतिवर्ष लगान की वसूली करती है और जमीदार स्थानीय नागरिकों से राजस्व वसूल करते हैं। कर की प्रथा आज भी यहां कायम है।
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जमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 में लागू हुआ, लेकिन नगर पंचायत मेंहदावल में अब भी जमीदारी व्यवस्था लागू है। चुनाव के वक्त इसका मुद्दा जरूर उठता है, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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1991 से 1998 के बीच तीन बार जमीदारी व्यवस्था से संबंधित रिपोर्ट राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश को स्थानीय प्रशासन ने भेजी थी तो वहीं वर्ष 2019 -20 में विधायक राकेश सिंह बघेल ने भी मेंहदावल नगर पंचायत की जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा था ।
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उनके पत्र पर नगर विकास विभाग ने राजस्व विभाग से आंख्या भी तलब किया। आंख्या जाने के बाद भी इस दिशा में अब तक कुछ नही हुआ। ऐसे में मेंहदावल नगर क्षेत्र से 10 से 15 किलोमीटर की परिधि में जमींदारी व्यवस्था अभी भी कायम है।
मेंहदावल नगर पंचायत क्षेत्र में जमींदारी व्यवस्था कायम होने की जानकारी उन्हें है। शासन की ओर से इस पर आख्या भी मांगी गई थी, जिसे डीएम के माध्यम से शासन को भेजवा दिया गया है। शासन स्तर से ही इस पर निर्णय होना है।
- प्रेम प्रकाश अंजोर,एसडीएम मेंहदावल
क्या है जमीदारों को चौथ देने की व्यवस्था
यदि कोई भवन स्वामी अपना मकान बेचना है तो क्रेता को खरीद धनराशि का चौथाई हिस्सा संबंधित जमीदार को चौथ के रूप में देने की प्रथा है। इसके साथ ही पुराने जर्जर मकान का निर्माण रोशनदान खिड़की खोलने पर जमीदारों से इजाजत लेने और उसे नजराना देने का चलन है। यदि कोई पुराना मकान गिर जाए और वह जमीन काफी समय से खाली पड़ी रहे तो जमींदार अपना उस पर हक मानता है।
यहां के लोगों को दोहरा दोहरा कर देना पड़ता है। जमींदारी प्रथा के लिए दर्जनों बार आंदोलन किया गया । जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक देते हुए जमीदारी मुक्त मेंहदावल के लिए कहा गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ -अजय कुमार गुप्त, नागरिक
उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश अधिनियम की धारा 229 बी किसी खाता या उसके भाग में बसने वाला आसामी या दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा घोषणात्मक बात एसडीएम कोर्ट में दाखिल करने का प्रावधान है । ब्रिटिश शासन के हटने के बाद यह अधिनियम बना, परंतु नगर पंचायत मेंहदावल में जमींदारी व्यवस्था कायम है।
गुलामी से देश को मुक्ति मिली,लेकिन जमींदारों की जंजीरों में मेंहदावल नगर की जनता अभी भी जकड़ी हुई है।इस व्यवस्था का खत्म किया जाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि अंग्रेजी शासन को समाप्त करने की बात थी। दिलीप भट्ट वरिष्ठ अधिवक्ता मेंहदावल तहसील
यहां के लोगों को दोहरा दोहरा कर देना पड़ता है। जमींदारी प्रथा के लिए दर्जनों बार आंदोलन किया गया । जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक देते हुए जमीदारी मुक्त मेंहदावल के लिए कहा गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ -अजय कुमार गुप्त, नागरिक
उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश अधिनियम की धारा 229 बी किसी खाता या उसके भाग में बसने वाला आसामी या दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा घोषणात्मक बात एसडीएम कोर्ट में दाखिल करने का प्रावधान है । ब्रिटिश शासन के हटने के बाद यह अधिनियम बना, परंतु नगर पंचायत मेंहदावल में जमींदारी व्यवस्था कायम है।
गुलामी से देश को मुक्ति मिली,लेकिन जमींदारों की जंजीरों में मेंहदावल नगर की जनता अभी भी जकड़ी हुई है।इस व्यवस्था का खत्म किया जाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि अंग्रेजी शासन को समाप्त करने की बात थी। दिलीप भट्ट वरिष्ठ अधिवक्ता मेंहदावल तहसील