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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   World Yoga Day 2021 Special advice Thyroid removed and relief from mental stress and strong lung by regular yoga

World Yoga Day Special: चाहिए मजबूत फेफड़ा और स्वस्थ पाचन तंत्र तो करें अनुलोम-विलोम, जानिए कैसे मिलेगी मानसिक तनाव से मुक्ति

Mon, 21 Jun 2021 02:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Jun 2021 02:31 PM IST
सार

नियमित योग से दूर कर सकते हैं थायराइड, हकलाना और तुतलाना, मानसिक तनाव से भी मिलेगी मुक्ति।

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World Yoga Day 2021 Special advice Thyroid removed and relief from mental stress and strong lung by regular yoga
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

नियमित योग से निरोग रहने की दूसरी कड़ी में आज जानिए ऐसे प्राणायाम को जिनको नियमित करने से कई गंभीर बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है। भारत स्वाभिमान के जिला प्रभारी हरि नारायण धर दूबे कहते हैं कि थायराइड, हकलाना, तुतलाना और बार-बार टासिंल होना जैसे रोग उज्जाइ प्रणायाम से दूर हो जाते हैं। अनुलोम विलोम प्राणायाम करके फेफड़ा और हृदय को मजबूत किया जा सकता है। 
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उज्जाइ
फायदे: थायराइड, सांस नली का दोष, हकलाना, तुतलाना, बार-बार टासिंल होना आदि अनेक दोष दूर होते हैं। विशुद्धि चक्र जागृत होता है। 
ऐसे करें: किसी भी सुविधाजनक आसन पर बैठ जाएं। दोनों नाक से सांस को भीतर खींचते हुए गले को सिकोड़ें। इस दौरान गले में खर्राटे की तरह आवाज गूंजती है। सांस से अंदर जाने वाली हवा का घर्षण गले में हो, नाक में नहीं होना चाहिए। पूरी हवा अंदर भरकर दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक को बंद करके बाईं नाक से सांस बाहर निकालें। नित्य तीन से पांच बार करें। विशेष रोग में बीस बार तक करें।
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ये बरतें सावधानी: अगर आप हृदय रोग से पीड़ित हैं तो बिना सांस रोके इस आसन को करें।

अनुलोम-विलोम

फायदे: फेफड़ा मजबूत होता है। पाचन तंत्र ठीक होता है। ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है। गठिया के लिए फायदेमंद, तनाव और चिंता को कम करता है। लकवा, उच्च रक्तचाप आदि के दोष दूर होते हैं। 
ऐसे करें: किसी ध्यानात्मक आसन पर बैठें। अनुलोम में दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका के छिद्र को बंद करके बाएं से धीरे-धीरे पांच से सात सेकेंड में पूरी सांस भरें, बाईं नासिका के छिद्र को दाहिने हाथ की अनामिका को बंद करके दाहिने से सांस को पूरा खाली करें। विलोम में दाहिने छिद्र से सांस भर कर बाएं से पूरा खाली करें। यह एक चक्र पूरा हुआ। यह अभ्यास 10 से 15 मिनट तक करें।



भ्रामरी प्राणायाम
फायदे:
मानसिक शक्ति बढ़ती है और ध्यान में सहायता मिलती है।
ऐसे करें: ध्यानात्मक आसन पर बैठें। कान को अंगूठे से बंद करें, तर्जनी उंगली को ललाट पर जहां टीका लगाते हैं वहां टिकाएं, बीच वाली उंगलियां आंख और नाक के बीच में लगाकर शेष उंगलियों से आंख को ढंकें। अब गहरी सांस भरें, मुंह बंद रखें और नाक से ओम का उच्चारण करते हुऐ भौंरे के गुंजन की भांति धीमें स्वर में उच्चारण करें। यह अभ्यास कम से कम पांच बार करें।
ये बरतें सावधानी: नाखून छोटे रखें, कान को बंद करते समय ज्यादा दबाव न डालें। 
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