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विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष: दंपतियों ने दिखाई समझदारी तो जी रहे खुशहाल जिंदगी, दूसरों के लिए नजीर बने ये लोग

Sun, 11 Jul 2021 04:11 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 11 Jul 2021 04:11 PM IST
सार

किसी ने एक बेटी तो किसी ने दो बेटियों के बाद अपनाया परिवार नियोजन। दो बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रहे दंपति दूसरों के लिए बने नजीर।
 

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world population day special Couples living happy life by adopting family planning in Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

गोरखपुर जिले में कई ऐसे दंपती हैं, जो स्वयं परिवार नियोजन अपना कर दूसरों के लिए नजीर बन चुके हैं। इन लोगों को कोई समझाने नहीं गया। इन्होंने छोटे परिवार की महत्ता को खुद समझा और बास्केट ऑफ चॉइस से मनपसंद साधन का चुनाव किया।
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इन दंपतियों की राह पर पिपराइच निवासी उमेश सिंह भी हैं। बताते हैं कि शादी 10 जून 2015 को हुई थी। शादी के दो वर्ष बाद निर्णय लिया कि उनके दो ही बच्चे होंगे और उसके बाद वह लोग परिवार नियोजन अपना लेंगे। उनके दो बच्चे हैं। दूसरे और पहले बच्चे के बीच में 4 साल 6 महीने का अंतर है। इन लोगों ने बिना किसी को बताए आपसी सहमति से नसबंदी को अपनाया। वह मानते हैं कि छोटा परिवार सुख का आधार होता है। 
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स्वास्थ्यकर्मी मनीष कुमार सिंह बताते हैं कि दो बेटियों के बाद परिवार नियोजन अपनाने का फैसला लिया। पत्नी ने साथ दिया और अस्थायी साधनों का इस्तेमाल कर परिवार नियोजन अपनाया। बच्चियों को अच्छी शिक्षा दे रहा हूं। बताया कि रिश्तेदारों ने कहा कि जितना खर्च आप बच्चियों को पढ़ाने में कर रहे हैं, उतने में उनकी शादियां हो जाएंगी। मनीष ने बेटे की चाहत में परिवार न बढ़ाया और न ही बेटियों के साथ कोई भेदभाव किया।
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केस-1

महानगर के पादरी बाजार के रहने वाले विनय कुमार श्रीवास्तव और शालिनी श्रीवास्तव को शादी के दो साल बाद बेटी पैदा हुई। उनकी बिटिया माही अब नौ साल की हो चुकी है। दंपति ने फैसला लिया कि वे अब दूसरा बच्चा नहीं करेंगे। विनय ने परिवार नियोजन के अस्थायी साधन को चुना और पूरा परिवार खुशहाली की राह पर है।

केस-2
शहर के राप्तीनगर निवासी मनीष कुमार सिंह की शादी को 25 साल हो गए हैं। शादी के बाद दो बेटियां हुईं। दोनों बेटियों के बाद ही दंपति ने परिवार नियोजन अपनाने का निर्णय लिया। बेटियों को पढ़ा-लिखा कर काबिल बनाया। मनीष की पत्नी नीलम ने अस्थायी साधन का इस्तेमाल किया और परिवार खुशहाली का जीवन व्यतीत कर रहा है।

केस-3
पिपराइच ब्लॉक के बेला कांटा गांव के उमेश सिंह और उनकी पत्नी साधना के दो बच्चे हैं। उमेश ने अस्थायी साधनों का इस्तेमाल कर दो बच्चों के बीच चार साल का अंतर रखा। दूसरी बच्ची के जन्म के समय दंपती ने आपसी सहमति से तय किया कि नसबंदी करवा लेंगे। उमेश की पत्नी साधना ने बच्ची के जन्म के साथ ही नसबंदी करवा ली।

लोग खुद हो रहे जागरूक

एसीएमओ डॉ. नंद कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन सेवाओं के प्रति लोग सजग हो रहे हैं। कोविड काल में भी लोगों ने सेवाओं के प्रति रुचि दिखायी है। बीते साल एक अप्रैल से लेकर इस साल 31 मार्च तक 51 पुरुष नसबंदी, 9700 महिला नसबंदी, 11214 महिलाओं ने प्रसव के उपरांत आईयूसीडी एवं 10375 महिलाओं ने इंटरवल आईयूसीडी, 7874  त्रैमासिक गर्भनिरोधक अंतरा इंजेक्शन, 71865 ने ओरल पिल्स, 8.63 लाख पीस कंडोम और 35547 साप्ताहिक गोली का इस्तेमाल लोगों ने किया है। बताया कि कोविड के कारण परिवार नियोजन सेवाओं पर थोड़ा असर तो पड़ा है लेकिन उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) जैसी संस्था के सहयोग और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण के कारण हम यह सेवा संचालित कर सके।
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