{"_id":"6494a648fe4291c5370878a7","slug":"workshop-on-sexual-harassment-prevention-and-pocso-act-organized-at-college-of-nursing-brd-medical-college-campus-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-216654-2023-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: नर्साें को गुडटच और बैडटच के अंतर को समझना होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: नर्साें को गुडटच और बैडटच के अंतर को समझना होगा
विज्ञापन
फोटो-
-- -- -- --
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित हुई कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। यौन शोषण एक गंभीर और सामाजिक अपराध है। इसका शिकार मरीजों की सेवा करने वाली नर्सें भी हो जाती है। वार्ड और अस्पताल में भी कभी भी यौन शोषण हो सकता है। इसके प्रति जागरूक होना होगा। मरीज असौर सहायक कर्मचारियों के गुडटच और बैडटच के अंतर को समझना होगा। अगर यौन शोषण हो रहा है तो इसका विरोध करें।
यह बातें एनजीओ समाधान अभियान के निदेशिका शीलम बाजपेयी ने बृहस्पतिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सेक्सुअल हैरेसमेंट, प्रिवेंशन एंड पॉक्सो एक्ट पर आयोजित कार्यशाला विषय पर कहीं। बताया कि यौन अपराध एशिया में सबसे अधिक होते हैं। देश में करीब 53 फीसदी बच्चों के साथ जीवन में कभी न कभी यौन अपराध जरूर होता है। ज्यादातर मामलों में वह चुप रहते हैं। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। देश का कानून ऐसे अपराधियों के प्रति बेहद सख्त है। उन्होंने नर्सों को बताया कि वह कार्यस्थल पर मरीज, कर्मचारी, सहकर्मी, अधिकारी के स्पर्श के अंतर को अवश्य समझें। इतना ही नहीं नर्सों को भी नियम और मानकों के तहत ही मरीजों को स्पर्श करना चाहिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अल्का सक्सेना के अलावा नर्सिंग कॉलेज के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।
विज्ञापन
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित हुई कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। यौन शोषण एक गंभीर और सामाजिक अपराध है। इसका शिकार मरीजों की सेवा करने वाली नर्सें भी हो जाती है। वार्ड और अस्पताल में भी कभी भी यौन शोषण हो सकता है। इसके प्रति जागरूक होना होगा। मरीज असौर सहायक कर्मचारियों के गुडटच और बैडटच के अंतर को समझना होगा। अगर यौन शोषण हो रहा है तो इसका विरोध करें।
यह बातें एनजीओ समाधान अभियान के निदेशिका शीलम बाजपेयी ने बृहस्पतिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सेक्सुअल हैरेसमेंट, प्रिवेंशन एंड पॉक्सो एक्ट पर आयोजित कार्यशाला विषय पर कहीं। बताया कि यौन अपराध एशिया में सबसे अधिक होते हैं। देश में करीब 53 फीसदी बच्चों के साथ जीवन में कभी न कभी यौन अपराध जरूर होता है। ज्यादातर मामलों में वह चुप रहते हैं। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। देश का कानून ऐसे अपराधियों के प्रति बेहद सख्त है। उन्होंने नर्सों को बताया कि वह कार्यस्थल पर मरीज, कर्मचारी, सहकर्मी, अधिकारी के स्पर्श के अंतर को अवश्य समझें। इतना ही नहीं नर्सों को भी नियम और मानकों के तहत ही मरीजों को स्पर्श करना चाहिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अल्का सक्सेना के अलावा नर्सिंग कॉलेज के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।
विज्ञापन