गोरखपुर मंडल: जहां चीनी उत्पादन कम, वहां बकाया है भुगतान
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गोरखपुर मंडल की जिन मिलों में चीनी उत्पादन का औसत 10 प्रतिशत से कम है, वहां किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान भी सुस्त है। इसके विपरीत जिन मिलों का औसत उत्पादन अच्छा है, वहां भुगतान की स्थिति ठीक है। आंकड़ों पर गौर करें तो देवरिया, गोरखपुर व महराजगंज के चीनी मिलों की हालत खराब है।
गोरखपुर मंडल में एक लाख 17 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। गोरखपुर में पिपराइच, महराजगंज में गड़ौरा व सिसवा बाजार, कुशीनगर में खड्डा, रामकोला, कप्तानगंज, हाटा व सेवरही और देवरिया में प्रतापपुर मिल में इस वक्त गन्ने की पेराई हो रही है। 28 जनवरी तक इन नौ चीनी मिलों पर 14 अरब से अधिक गन्ने का भुगतान बकाया है। फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी कई मिलें दिसंबर तक का ही भुगतान कर पाई हैं।
इन मिलों में जहां चीनी के उत्पादन का प्रतिशत (चीनी परता) कम है, वहां गन्ना मूल्य के भुगतान की स्थिति भी बेहतर नहीं है। गन्ना विभाग की तरफ से बीते 28 जनवरी को जो आंकड़े एकत्र किए गए थे, वे ही इसकी गवाही दे रहे हैं। उस आंकड़े के अनुसार सबसे कम चीनी उत्पादन करने वाली प्रतापपुर चीनी मिल ने 28 जनवरी तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया था, जबकि मिल पर उस वक्त 23 करोड़ 10 लाख रुपये का बकाया था।
इसी तरह महराजगंज की गड़ौरा चीनी मिल पर भी 28 जनवरी तक सात करोड़ 10 लाख रुपये का बकाया था। इस मिल का चीनी परता भी 10 से कम था। पिपराइच मिल पर भी 25 करोड़ 32 लाख रुपये का बकाया था। इस मिल का चीनी परता भी 10 से कम है।
भुगतान में देर होने से किसान परेशान
पिपराइच क्षेत्र के किसान शंभू सिंह, रामसंवारे पाठक, सरदारनगर क्षेत्र के किसान विशुनदयाल, कुशीनगर के अवधेश पांडेय आदि का कहना है कि गन्ना बोने वाले किसान अपनी जरूरत के लिए गन्ने के भुगतान पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर समय से भुगतान नहीं मिलता है तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पिपराइच चीनी मिल प्रबंधक जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि चीनी उत्पादन का औसत जितना बेहतर होगा, मिलों की आर्थिक स्थिति भी उतनी ही अच्छी होगी। इससे किसानों को गन्ने के भुगतान के अलावा कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य देनदारियों पर भी असर पड़ता है। जहां चीनी परता कम है, वहां मिल को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।