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Gorakhpur News: प्रदूषण प्रमाणपत्र व बीमा के बगैर दौड़ रहे वाहन

Thu, 22 Aug 2024 04:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2024 04:13 AM IST
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Vehicles running without pollution certificate and insurance
सक्सेना चौक पर बाइक के साइलेंसर से धुआं फेंकता बाइक।संवाद
-प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की वैधता होती एक वर्ष की, कार्रवाई के बाद भी नहीं होता सुधार
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में बगैर प्रदूषण प्रमाणपत्र के वाहन फर्राटा भर रहे हैं। कार्रवाई होने के बाद लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। वहीं वाहन बीमा कराने में भी रुचि नहीं ली जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र सभी वाहनों के लिए अनिवार्य है। नई गाड़ी के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष होती है। इसके बाद हर छह माह पर वाहनों की जांच कराकर प्रमाणपत्र लेना होता है, लेकिन यह जांच बहुत ही कम लोग कराते हैं।
जिले में 3,81,270 वाहन पंजीकृत हैं। पचास हजार वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के फर्राटा भरते हुए प्रदूषण फैला रहे हैं। जिले में वर्ष 2019 से पहले 2,54,249 वाहन पुराने हैं। इसमें सभी प्रकार के वाहन शामिल हैं। 26531 वाहनों के फिटनेस की वैधता समाप्त हो चुकी है। 3113 वाहन क्रियाशील नहीं हैं। वर्ष 2019 के बाद से जिले में 3,81,270 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें सभी तरह से वाहन शामिल हैं। 27685 वाहनों की फिटनेस नहीं है। जिले में छह प्रदूषण जांच केंद्र हैं, यहां कुछ प्रदूषण जांच केंद्र ऐसे भी हैं, जो थोड़े पैसे अधिक लेकर बिना गाड़ी की जांच किए प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।
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अस्थमा के रोगियों को अटैक आने का खतरा रहता
चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. एएम भाष्कर के अनुसार, डीजल या पेट्रोल वाहनों में अधजला ईंधन कार्बन मोनो ऑक्साइड के रूप में बाहर निकलता है, जिससे फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके प्रभाव से अस्थमा के रोगियों को अटैक आने का खतरा रहता है। धुएं का सबसे बुरा असर अस्थमा के मरीजों पर पड़ता है। हवा में फैले विभिन्न रासायनिक अवयव अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं।
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प्रदूषण में पर्टिकुलेट मैटर मापने के दो मानक

विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा के प्रदूषण में पर्टिकुलेट मैटर (कण प्रदूषण) मापने के दो मानक हैं। एक तो इसे 24 घंटे के आधार पर मापा जाता है। दूसरा इसका वार्षिक औसत निकाला जाता है। पीएम 2.5 का स्तर सामान्य 60 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर होना चाहिए। पीएम 10 का स्तर सामान्य 100 माइक्रो ग्राम होना चाहिए। इसका वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय है। 24 घंटे में सल्फर डाई आक्साइड 80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर का मानक निर्धारित है। जबकि वार्षिक मानक 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय किया गया है। इसके अलावा नाइट्रोजन डाई आक्साइड का 24 घंटे में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि वार्षिक 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इससे अधिक होने पर सेहत के लिए हानिकारक होता है।

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जिले में समय समय पर जांच की जाती है। अगर ऐसा है तो अभियान चलाकर वाहन की जांच की जाएगी। नियमों का पालन करने के लिए लोगों को जागरुक किया जाता है।
-विनय कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
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