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UP Panchayat Chunav Result: बीजेपी विधायक के भाई की पत्नी को मिली हार, ब्लाक प्रमुखी से जोड़कर देखा जा रहा था चुनाव
Sun, 02 May 2021 08:26 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 02 May 2021 08:26 PM IST
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यूपी पंचायत चुनाव रिजल्ट 2021
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के फरेंदा तहसील के धानी ब्लाक के कानापार वार्ड संख्या एक से चार पर हो रहे क्षेत्र पंचायत सदस्य के चर्चित चुनाव में फरेंदा विधायक बजरंग बहादुर सिंह के भाई की पत्नी सरिता सिंह चुनाव हार गईं हैं। इस सीट से पूर्व प्रधान गोपाल सिंह विजयी हुए हैं। इस क्षेत्र में प्रधानी व जिला पंचायत से अधिक रोमांचक चुनाव इस क्षेत्र से पंचायत सदस्य का था। जिसे ब्लाक प्रमुखी से जोड़कर देखा जा रहा था। मतगणना के बाद विजयी गोपाल सिंह को 531 मत मिले, जबकि सरिता सिंह को 354 मतों से ही संतोष करना पड़ा।
जीत की खुशी पर भारी पड़ा बेटे के मौत का गम
जिले के फरेंदा ब्लाक के सोहरवलिया खुर्द गांव का रिजल्ट देखने के लिए पूरे क्षेत्र की निगाह जमी थी। क्योंकि चुनावी रंजिश को लेकर मारपीट में एक प्रत्याशी के बेटे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। रविवार को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम सामने आया। इसमें मातम वाले परिवार के सदस्य के सिर लोगों ने जीत का सेहरा पहना दिया। वहीं भतीजे की मौत के गम के आगे जीत की खुशी बेरौनक नजर आई।
प्रधान पद पर चुनाव में तो कई लोग लड़े थे। सोहरवलिया खुर्द का टोला परसोइया से दो लोग मैदान में थे। इसमें एक पक्ष के परिवार के सदस्य दस वर्ष से प्रधान की कुर्सी पर कब्जा था। इस बार निवर्तमान प्रधान शहाबुद्वीन ने अपने भाई मकसूद को चुनाव मैदान में उतारा। इनके खिलाफ पट्टीदारी के सबरे आलम ने अपने भाई हसाबुद्वीन का प्रधान पद का पर्चा भरवा दिया। दोनों पक्ष दमदारी से चुनाव लड़े।
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जीत की खुशी पर भारी पड़ा बेटे के मौत का गम
जिले के फरेंदा ब्लाक के सोहरवलिया खुर्द गांव का रिजल्ट देखने के लिए पूरे क्षेत्र की निगाह जमी थी। क्योंकि चुनावी रंजिश को लेकर मारपीट में एक प्रत्याशी के बेटे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। रविवार को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम सामने आया। इसमें मातम वाले परिवार के सदस्य के सिर लोगों ने जीत का सेहरा पहना दिया। वहीं भतीजे की मौत के गम के आगे जीत की खुशी बेरौनक नजर आई।
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प्रधान पद पर चुनाव में तो कई लोग लड़े थे। सोहरवलिया खुर्द का टोला परसोइया से दो लोग मैदान में थे। इसमें एक पक्ष के परिवार के सदस्य दस वर्ष से प्रधान की कुर्सी पर कब्जा था। इस बार निवर्तमान प्रधान शहाबुद्वीन ने अपने भाई मकसूद को चुनाव मैदान में उतारा। इनके खिलाफ पट्टीदारी के सबरे आलम ने अपने भाई हसाबुद्वीन का प्रधान पद का पर्चा भरवा दिया। दोनों पक्ष दमदारी से चुनाव लड़े।
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मारपीट में घायल होने के बाद हुई मौत
मतदान के बाद 21 अप्रैल को चुनावी रंजिश को लेकर रात में दोनों पक्ष में मारपीट हो गई। जिसमें दोनो पक्षों से 11 लोग घायल हुए। सबरे आलम के भतीजा व प्रधान पद प्रत्याशी हसामुद्वीन के बेटे औरंगजेब की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी पक्ष के चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दी। रविवार को मतगणना में सबरे आलम के बड़े भाई हसामुद्वीन ने अपने पट्टीदार शहाबुद्वीन के भाई मकसूद को 188 मत से हरा दिया। हसामुद्वीन को 497 मत व मकसूद को 309 वोट मिला। सबरे आलम ने बताया कि यह जीत मेरी नही मेरे ग्राम वासियों की है। पर इस जीत की खुशी तब दोगुनी होती जब औरंगजेब जीवित रहता।