10वीं और 12वीं के छात्रों को नहीं मिलेगा अंकपत्र और प्रमाणपत्र, इस दस्तावेज के सहारे हो जाएगा सारा काम
- छपाई मुश्किल, मिलेगा प्रोविजनल सर्टिफिकेट
- प्रवेश से लेकर नौकरी तक में होगा मान्य
- 15 जुलाई के बाद मिलेगा अंकपत्र और प्रमाणपत्र की मूलप्रति
- स्कूल के प्रधानाचार्य के पास करना होगा आवेदन, एक जुलाई से शुरू होगी प्रक्रिया
विस्तार
कोरोना संकट की वजह से यूपी बोर्ड के दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को अंकपत्र और प्रमाणपत्र तत्काल नहीं मिलेंगे। विद्यार्थियों को परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें पहली बार डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रोविजनल अंकपत्र और प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। एक जुलाई से इसका वितरण शुरू होगा। इसके लिए उन्हें अपने विद्यालय पर आवेदन करना होगा।
पुरानी व्यवस्था में बोर्ड की ओर से परिणाम जारी होने के बाद 15 दिनों के अंदर अंकपत्र और प्रमाणपत्र स्कूलों को भेज दिया जाता था। लेकिन कोरोना संकट की वजह से इस बार अंकपत्र और प्रमाणपत्र छापने में परेशानी आ रही है। ऐसे में प्रधानाचार्य स्कूल की लॉगइन आईडी और पासवर्ड की मदद से डिजिटल अंकपत्र और प्रमाणपत्र को डाउनलोड कर छात्रों को देंगे। इसका इस्तेमाल स्कूल में प्रवेश लेने से लेकर नौकरी तक में किया जा सकेगा।
15 जुलाई के बाद मिलेगी हार्डकॉपी
बोर्ड की ओर से 15 जुलाई को स्कूलों को परिणाम की हार्डकॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। उसके बाद विद्यार्थी अपने स्कूल से संपर्क कर रिजल्ट व मार्कशीट प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए आपको डिजिटल सिग्नेचर वाला अंक पत्र लेकर प्रधानाचार्य के पास जाना होगा।
स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू
परिणाम से असंतुष्ट विद्यार्थी 22 जुलाई तक स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर कर सकते हैं। स्क्रूटनी के लिए अभ्यर्थी को 500 रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर से (लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए अलग-अलग) फीस देनी होगी। कोरियर या डॉक से भेजा आवेदन स्वीकार नहीं होगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव विनोद कृष्ण ने बताया कि कोरोना संकट की वजह से अंकपत्र और प्रमाणपत्रों के छपाई की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसलिए जब तक हार्डकॉपी उपलब्ध न हो जाए, विद्यार्थियों को डिजिटल अंकपत्र और प्रमाणपत्र देने की तैयारी बोर्ड ने की है। इसके बारे में स्कूल के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया जा चुका है।