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Gorakhpur News: आश्वासन पर भरोसा करें या आदेश मानें, असमंजस में दो लाख विद्यार्थी

Tue, 22 Sep 2026 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Tue, 22 Sep 2026 02:35 AM IST
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Trust the assurance or heed the order? Two lakh students in a dilemma.
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में विषम सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर स्नातक के करीब दो लाख विद्यार्थी असमंजस में हैं। विद्यार्थी अब तक प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर की बहुविकल्पीय पैटर्न के आधार पर तैयारी कर रहे थे। परीक्षा समिति ने इसी बीच विषम सेमेस्टर की परीक्षा वर्णनात्मक कराने का निर्णय ले लिया। कुलपति ने छात्रहित में निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है। ऐसे में वे तय नहीं कर पा रहे कि आश्वासन पर भरोसा करें या जारी आदेश के अनुसार तैयारी का तरीका बदलें।
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विद्यार्थियों का कहना है कि प्रथम से चतुर्थ सेमेस्टर तक परीक्षाएं बहुविकल्पीय पैटर्न पर हुई हैं। इसी आधार पर उन्होंने तृतीय और पंचम सेमेस्टर की भी तैयारी की। अब वर्णनात्मक परीक्षा की जानकारी के बाद उन्हें उत्तर लेखन और विस्तृत पाठ्यक्रम की नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी। छात्रों ने कुलपति को प्रार्थना-पत्र देकर तृतीय और पंचम सेमेस्टर की परीक्षा बहुविकल्पीय पैटर्न पर कराने की मांग की है।
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जुलाई में जारी अधिसूचना में आगामी विषम सेमेस्टर में वर्णनात्मक और सम सेमेस्टर में बहुविकल्पीय परीक्षा कराने की व्यवस्था की गई है। यह छह जनवरी की परीक्षा समिति के प्रस्ताव संख्या 13 और कुलपति के 31 जुलाई 2026 के आदेश के क्रम में है। हालांकि बीबीए, बीसीए, बीएचएमसीटी, बीएससी कृषि और बीटेक में पहले की तरह वर्णनात्मक परीक्षा होगी। स्नातक-परास्नातक के माइनर कोर्स में बहुविकल्पीय व्यवस्था जारी रहेगी। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की कुल संख्या 350 है।
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निर्णय नहीं तो एक अक्तूबर से शुरू होगा सत्याग्रह
एनएसयूआई महानगर अध्यक्ष रवि प्रकाश पाण्डेय के नेतृत्व में छात्रों ने 15 सितंबर को ज्ञापन देकर 72 घंटे में निर्णय की मांग की थी। समय सीमा पूरी होने पर विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर 18 सितंबर को तीन-चार घंटे तक धरना दिया। वार्ता में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांग पर विचार के लिए 10 दिन का समय मांगा और सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया। छात्रों का कहना है कि कुलपति प्रो. केपी सिंह के आश्वासन के बावजूद परीक्षा समिति की बैठक की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। निर्णय नहीं होने पर उन्होंने सत्याग्रह शुरू
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