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Gorakhpur News: दवा विक्रेता कंपनी की तरफ से हुई थी नकली दवा बेचने की शिकायत

Thu, 25 Jul 2024 05:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2024 05:56 AM IST
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There was a complaint from the pharmaceutical company about selling fake medicines
- भालोटिया मार्केट में नकली दवा बेचने की शिकायत पर मंगलवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने की थी जांच
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- अब फुटकर विक्रेताओं की भी जांच की जाएगी, ड्रग इंस्पेक्टर ने जुटा ली है जानकारी

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। न्यूरो से संबंधित एक दवा के नकली उत्पाद को भालोटिया के थोक मार्केट के जरिए पूर्वांचल, बिहार और नेपाल बार्डर तक खपाया जा रहा है। इसकी पुख्ता जानकारी के साथ दवा कंपनी के प्रतिनिधि ने खाद्य औषधि प्रशासन को सूचना दी है। उसने मिलते-जुलते नाम वाली नकली दवा का पत्ता भी भेजा है। इसके बाद से ही ड्रग इंस्पेक्टर ने बाजार में चल रहे अवैध धंधे पर नजर गड़ाई और कई अहम जानकारी जुटाने के बाद अब दुकानों की छानबीन शुरू की है। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और दुकानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
भालोटिया मार्केट से अपमिश्रित (मिलावटी) दवाइयों का खेल बहुत पुराना है। यहां के कुछ व्यापारी हिमाचल प्रदेश की फर्मों से बड़ी कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती दवा का टेबलेट तैयार कराते हैं। ये दवा असली दवा के बदले लगभग उसी रेट पर बेच दी जाती है। इसमें दुकानदारों को 40 से 50 फीसदी तक का फायदा मिलता है। इसके अलावा यहां से प्रतिबंधित कफ सीरप और इंजेक्शन भी बाहर भेजे जाते हैं। पड़ोसी जिला महराजगंज में इस साल तीन बार इस तरह के मामले पकड़े जा चुके हैं।
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ताजा प्रकरण नसों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण टेबलेट बनानी वाली कंपनी का है। दरअसल, इस कंपनी के टेबलेट की मांग घटने पर कंपनी ने अपने अफसरों को भेजकर हकीकत पता कराई। यहां उन्हें अपनी कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नाम की दवा मिली। दवा निर्माता फर्म के अधिकारियों ने दवा का पत्ता ड्रग विभाग को उपलब्ध कराते हुए इसकी शिकायत की। इस मामले में अब सहायक औषधि आयुक्त पूरन चंद ने ड्रग इंस्पेक्टर राहुल कुमार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि दवा बिक्री फुटकर दुकानों पर हुई है। वहां पर भी जांच कराई जाए। इस रैकेट को तोड़ना है। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास होगा।
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पटना में पकड़ी जा चुकी है नशीली दवा की खेप
पिछले दिनों गोरखपुर भेजी गई दवा की एक खेप पटना में पकड़ी गई। मानसिक रोगियों के उपचार में काम आने वाली उस दवा को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इस मामले की जांच नारकोटिक्स सेल की टीम करने आई थी। टीम ने यहां दो दिन रुककर तीन दुकानों की जांच पड़ताल की, उनके अभिलेख भी अपने साथ ले गई, लेकिन आगे क्या हुआ, इसका खुलासा नहीं हुआ। इसके अलावा पिछले साल एक दवा विक्रेता के गोदाम से भी बड़ी मात्रा में कफ सीरप बरामद हुए थे।
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