Gorakhpur News: 10 साल के अंदर प्रत्यारोपण में शिकायत तो फेल है सर्जरी, फ्रोजन शोल्डर के मरीज बढ़े
रांची के रिम्स के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि कोरोना की पहली लहर में जाने-अनजाने में मरीजों को स्टेरॉयड दिया गया। इसका दुष्प्रभाव अब लोगों के शरीर में दिखने लगा है। ऐसे लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं।
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10 साल के अंदर अगर घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण में शिकायत आ रही है तो सर्जरी फेल मानी जाती है। देश में घुटने और विदेशों में लोगों के कूल्हे की हड्डी कमजोर हो रही है। इसके लिए विदेशों की तर्ज पर नेशनल ज्वाइंट रजिस्टर बनना चाहिए। इससे फेल सर्जरी के कारणों की सही जानकारी मिलेगी। यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया, कनाडा और स्विटजरलैंड, अमेरिका जैसे देशों में ज्वाइंट रजिस्टर बना है।
ये बातें यूनाइटेड किंगडम से आए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद शेट्टी शुक्रवार को यूपी आर्थोकान में बतौर मुख्य वक्ता कहीं। बताया कि नेशनल ज्वाइंट रजिस्टर बनने से घुटना प्रत्यारोपण के कारणों की सही जानकारी मिल सकेगी। बताया कि हड्डियों के कमजोर होने का बड़ा कारण शराब और स्मोकिंग भी है।
इस पर युवा ध्यान नहीं दे रहे हैं। विदेशों में ये बड़े कारण हैं। फर्क इतना है कि विदेशों में लोग घुटनों पर ज्यादा दबाव नहीं देते हैं। वे कुर्सी पर बैठकर सभी काम करते हैं। जबकि, भारत में लोग कुर्सी का इस्तेमाल कम करते हैं और पालथी और उकड़ू बैठकर ज्यादा काम करते हैं।
इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों ने दीप जलाकर किया। इस दौरान आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बीबी त्रिपाठी, डॉ. इमरान अख्तर, डॉ. अमित सिंह, डॉ. ऋतेश कुमार, डॉ. शशांक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
स्टेरॉयड का अब दिख रहा असर
रांची के रिम्स के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि कोरोना की पहली लहर में जाने-अनजाने में मरीजों को स्टेरॉयड दिया गया। इसका दुष्प्रभाव अब लोगों के शरीर में दिखने लगा है। ऐसे लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। पहली लहर के संक्रमितों के कूल्हे और घुटने की हड्डियां सूख रही हैं। इस बीमारी को एवैस्कुलर नैक्रोसिस (एवीएन) कहते हैं। इसमें कूल्हा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी पहले 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों में होती थी, लेकिन अब यह युवाओं में देखने को मिल रही है।
मजबूत हड्डी, मजबूत राष्ट्र पर चलाया जा रहा अभियान
आर्थोपेडिक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि अब युवाओं की हड्डियां भी कमजोर हो रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन पर बैठकर खाना और अन्य काम करना है। इससे घुटनों की मांसपेशियां और प्लेट घिस रही हैं। लोग गठिया के शिकार हो रहे हैं।
इसे लेकर मजबूत हड्डी, मजबूत राष्ट्र अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 15 हजार से अधिक सदस्य काम कर रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि 40 वर्ष के बाद जमीन पर बैठने से परहेज करें। साथ ही शाकाहारी व्यक्ति कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए खाने के तौर-तरीकों में बदलाव।
फ्रोजन शोल्डर के मरीज बढ़े
यूपी आर्थोकान आयोजन के सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि बीआरडी में आने वाले ओपीडी में कंधे के दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। 20 फीसदी मरीज कंधे के दर्द की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। यह समस्या कोरोना महामारी के बाद बढ़ी है। इसके अलावा थायराइड और डायबिटीज के मरीजों में फ्रोजन शोल्डर का खतरा 40 फीसदी रहता है। इसका इलाज अब दूरबीन के जरिए हो रहा है।