गोरखपुर में चौरीचौरा के देवीपुर गांव में झोपड़ी में सुरेंद्र यादव को जिंदा जलाकर मार डालने वाले कौन हैं, इसकी गुत्थी पुलिस सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और मौके पर मिली देसी शराब की खाली बोतल के जरिए सुलझाने की कोशिश में जुटी है। सुरेंद्र यादव की बहन रीता देवी की तहरीर पर प्रधान प्रतिनिधि को आरोपी तो बना दिया गया है, लेकिन वारदात को उसने ही अंजाम दिया है, यह पुलिस भी पूरी तरह नहीं मान रही है।
सुरेंद्र हत्याकांड: किसने जिंदा जलाया, राज खोलेगी CCTV फुटेज और शराब की बोतल
पुलिस को घटनास्थल से देसी शराब की एक बोतल मिली है। पुलिस को आशंका है कि पहले सुरेंद्र को शराब पिलाई गई। जब वह बेसुध हो गया तो फिर जला दिया गया। बेसुध होने की वजह से सुरेंद्र चीख-पुकार नहीं कर रहा था।
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जानकारी के मुताबिक, जिस बहन रीता ने प्रधान प्रतिनिधि को आरोपी बनाया है, उसके ही बयान ने पुलिस को उलझा भी दिया है। उसने पुलिस को पूछताछ में बताया कि चाचा रामजीत ने प्रधान प्रतिनिधि को फंसाने के लिए एकबार खुद की बेटी को गोली मार दी थी।
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उसने यह भी बताया कि जमीन भी बेच दी गई है। उसके बदले मिले 29 लाख रुपये उसकी मां के खाते में आए हैं, जिस वजह से तीन-चार दिन पहले मारपीट भी हुई थी। चाचा रामजीत रुपये को मांग रहे थे। सुरेंद्र का भाई योगेंद्र बचपन से ही चाचा के साथ रहता है, इसलिए वह भी रुपये देने के लिए दबाव बना रहा था। इस बयान के बाद पुलिस ने जांच तेज की तो प्रधान के घर के सामने ही दो सीसीटीवी कैमरे मिल गए, जिसकी रिकॉर्डिंग को पुलिस ने अपने पास सुरक्षित रख लिया है।
आशंका: पहले शराब पिलाई, बेसुध हुआ तो जलाकर मार डाला
पुलिस को घटनास्थल से देसी शराब की एक बोतल मिली है। पुलिस को आशंका है कि पहले सुरेंद्र को शराब पिलाई गई। जब वह बेसुध हो गया तो फिर जला दिया गया। बेसुध होने की वजह से सुरेंद्र चीख-पुकार नहीं कर रहा था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
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प्रधान के घरवाले बोले, साजिशन फंसाया जा रहा है
ग्राम प्रधान के घरवाले और कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जमीन पर रामजीत के परिवार का कब्जा था, जहां पर सोमवार को पानी की टंकी का भूमिपूजन होना था। इसके पहले इस तरह की घटना साजिशन फंसाए जाने की ओर संकेत कर रही है। उनका कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति ने झोपड़ी में आग लगाई होगी। फंसाने के लिए प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप लगाया जा रहा है।
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अविवाहित था सुरेंद्र
सुरेंद्र यादव अविवाहित था। वह पहले ट्रक ड्राइवर था। दस साल पहले दुर्घटना में घायल हो गया। सिर व पैर में चोट आने की वजह से वह लगवाग्रस्त हो गया था। उसके दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे। उसका दिमाग भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। वह ट्राई साइकिल से चलता था। गांव के पास ही सड़क किनारे प्लास्टिक की पन्नी की झोपड़ी बनाकर उसमें रहता था। रविवार की रात में भोजन करने के बाद वह वहीं सो गया था। रात में अचानक झोपड़ी में आग लग गई। इस आग में सुरेंद्र की जलकर मौत हो गई। सुरेंद्र के पिता लालजी यादव की मौत 20 साल पहले हुई थी। वह अपनी मां के साथ रहता था। उसका छोटा भाई योगेंद्र भी ट्रक चलाता है, वह अपने चाचा रामजीत के साथ रहता है। झोपड़ी से 50 मीटर दूर चाचा रामजीत का तो 700 मीटर दूर प्रधान का घर है।
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