बेटा तुम मेरी जान हो, मेरा मान सम्मान हो, करो तुम इतनी तरक्की कि पूरी दुनिया में तुम्हारी पहचान हो... पिता द्वारा पुत्र के प्रति प्रेम को दर्शाती ये पंक्तियां गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के विद्यार्थी सूरज चौहान पर खूब फब्ती हैं। किसान के बेटे सूरज ने स्वर्ण पदक हासिल कर पिता के हाथों के छालों पर एक तरह से मरहम लगाया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के 40वें दीक्षांत समारोह में कई छात्रों को स्वर्ण पदक मिले, लेकिन सबकी नजरें एक ऐसे स्वर्ण पदक विजेता पर थीं जिसके पिता दिनभर खेत में मेहनत और शाम को पेंट पॉलिश कर अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। हर कोई उस पिता पर गर्व कर रहा था जिसने बेटे की पढ़ाई के लिए अपने हाथों के छालों की भी परवाह नहीं की।
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स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थी सूरज चौहान।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललीत कला एवं संगीत विभाग के ललित कला के छात्र सूरज चौहान को स्नातकोत्तर स्तर पर शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर उपलब्धियों में समस्त महाविद्यालयों समेत विश्वविद्यालय में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए ब्रह्मलीन दिग्विजयन नाथ स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल अतिथि व विद्यार्थी।
- फोटो : अमर उजाला।
सूरज ने बताया कि पिता जय गोविंद चौहान भाई-बहनों को पढ़ाने के लिए किसानी के साथ-साथ पेंट पॉलिश का भी काम करते हैं। हमें पढ़ाने के लिए पिता गांव से शहर आए। सूरज ने बताया कि मुझे वह दिन नहीं भूलता जब काम करते-करते पापा के हाथों में छाले पड़ जाते थे, लेकिन वे अपनी परेशानी हम लोगों को नहीं बताते थे।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल अतिथि व विद्यार्थी।
- फोटो : अमर उजाला।
सूरज ने कहा कि आज मुझे स्वर्ण पदक मिला है, लेकिन पापा को इसकी जानकारी नहीं है। मेरे साथ मेरी मां सरोज देवी आई हैं। हम लोग घर पर पापा को सरप्राइज देंगे।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान सपथ लेते विद्यार्थी।
- फोटो : अमर उजाला।
सूरज का कहना है कि वह विज्ञापन कंपनी खोलना चाहते हैं। इसके माध्यम से समाज की बुराइयों को खत्म करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना चाहते हैं। ऐसे बच्चे जो किन्हीं कारणों से अपनी प्रतिभा को निखार नहीं पाते हैं, उनकी मदद करना चाहते हैं।