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Subrata Roy: पिता के निधन के बाद अभिभावक की तरह बने सहारा, सुब्रत रॉय ने कपिल देव से कराया था परिचय
Thu, 16 Nov 2023 01:01 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 16 Nov 2023 01:01 PM IST
सार
बेतियाहाता में जिस घर में सुब्रत रॉय 1980 से 1983 तक रहे, उसके बगल में रहने वाले संत दूबे ने अपनी स्मृतियां साझा कीं। कहा, वर्ष 2010 में बेटे की शादी में आमंत्रित किया। कहा, सभी को आना है।
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तुर्कमानपुर में जिस मकान में रहते थे वहां 2013 में पत्नी संग जाकर हालचाल पूछा था सुब्रत रॉय ने।न
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
वर्ष 2009 में पापा की तबीयत खराब थी। मैंने सुब्रत राॅय के पीए को फोन करके बताया। उस समय वह कनाडा में थे। पीए ने बात कराई तो बोले, दवा और रुपये की जरूरत हो तो पीए को बता देना। अच्छा होगा लखनऊ लेकर आ जाओ। इसके दूसरे दिन पिता जी का निधन हो गया। 19 अप्रैल 2010 को जब वह गोरखपुर आए थे तो घर पर भी आए। कहा, परेशान मत होना। मैं हूं अभिभावक के रूप में। इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने सहारा समूह में मुझे विधिक सलाहकार बना दिया।
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यह कहना है शक्ति श्रीवास्तव एडवोकेट का, जिनके तुर्कमानपुर आवास में सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत राॅय रहते थे। शक्ति बुधवार की सुबह श्रद्धांजलि देने रवाना हो गए थे। स्मृतियों को साझा करते हुए शक्ति ने बताया कि पिता के न होने की कमी उन्होंने कभी खलने नहीं दी।
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बताया कि मुझे याद है कि उनके बड़े बेटे की शादी थी। हम लोग भी परिवार के साथ गए थे। उनके पास ही था। वहां फिल्म निर्देशक सुभाष घई, करीना कपूर और कपिल देव थे। कपिल देव ने सुब्रत राॅय से पूछा ये लड़का कौन है, उन्होंने मुस्कराते हुए मेरे घर का नाम बताया पपलू। कहा-मेरे मकान मालिक का लड़का। यह उनकी शालीनता और सहजता की मिसाल थी।
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पापा और अंकल के साथ सुबह की चाय साथ पीते थे सहारा श्री
तीन साल मेरे बेतियाहाता आवास के बगल में रहे। सुबह की चाय सहारा श्री, पापा और श्रीवास्तव अंकल की एक साथ होती थी। वर्ष 1995 में आए तो मेरी दुकान पर एक घंटे तक रहे। घर पर भी आए। सबसे मिले। लगा ही नहीं कि इतना बड़ा शख्स इतना सहज व सरल हो सकता है। मैंने तो उनके संघर्ष का जीवन नजदीक से देखा है। कभी घबराए नहीं, बस हिम्मत की बात करते थे। शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।इसे भी पढ़ें:
बेतियाहाता में जिस घर में सुब्रत रॉय 1980 से 1983 तक रहे, उसके बगल में रहने वाले संत दूबे ने अपनी स्मृतियां साझा कीं। कहा, वर्ष 2010 में बेटे की शादी में आमंत्रित किया। कहा, सभी को आना है।