Subrata Roy: अपने अजीज दोस्त की शादी में सुब्रत रॉय खुद बन गए थे ड्राइवर, देश के प्रति थी अटूट आस्था
सुब्रत रॉय के जीवन की पहली कार फिएट थी। यह कार उन्होंने मुंबई से खरीदी और खुद चलाते हुए गोरखपुर लाए थे। उसी रात होटल विवेक में अपने दोस्तों को रात्रिभोज दिया था। इस दावत में तत्कालीन समय में उनके सारे दोस्त शामिल हुए थे। उस समय की ये पार्टी भी उनके जानने वालों के लिए यादगार बन गई थी।
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फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत राॅय अपने उन साथियों को कभी नहीं भूले जो उनके संघर्ष के दिनों के साथी थे। बात वर्ष 1992 की है, मेरी शादी में जिस गाड़ी से मैं जा रहा था वह खुद उसके ड्राइवर बन गए। सचमुच वह यारों के यार थे। उनके निधन से मेरे जैसे बहुत सारे लोगों को गहरा आघात लगा है, जिनसे उनका हमेशा जुड़ाव रहा।
यह कहना है रुद्रपुर के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायन उर्फ खोखा सिंह का, जो सुब्रत राय के साथ बिताए गए पलों को याद कर भावुक हो गए। खोखा सिंह ने बताया कि सुब्रत राॅय, पॉलिटेक्निक के छात्र थे जबकि वह विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। राॅय लंबरेटा स्कूटर से चलते थे जबकि मेरे पास बुलेट थी। एक दोस्त के माध्यम से उनसे संपर्क हुआ तो एक साथ उठना-बैठना शुरू हो गया।
एक दिन राॅय साहब ने कहा कि वह फाइनेंस कंपनी खोलना चाह रहे हैं। सभी औपचारिकताओं के बाद उन्होंने गोलघर में एक होटल में एक कमरा किराए पर लिया। वहीं, सहारा का पहला ऑफिस खुला। बाद में जब सहारा काफी ग्रोथ कर गया तो उसका ऑफिस लखनऊ में खोला गया। वहां से सहारा की पहचान पूरी दुनिया में हो गई।
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1700 किमी फिएट कार चलाकर गोरखपुर आए थे रॉय...मना था जश्न
सुब्रत रॉय के जीवन की पहली कार फिएट थी। यह कार उन्होंने मुंबई से खरीदी और खुद चलाते हुए गोरखपुर लाए थे। उसी रात होटल विवेक में अपने दोस्तों को रात्रिभोज दिया था। इस दावत में तत्कालीन समय में उनके सारे दोस्त शामिल हुए थे। उस समय की ये पार्टी भी उनके जानने वालों के लिए यादगार बन गई थी। ये बातें होटल विवेक के मालिक आचिंत्य लाहिणी ने साझा की।