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Gorakhpur News: 250 छात्रों ने बनाई ईको ब्रिक संरचनाएं, लगाई प्रदर्शनी
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डीडीयू में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करते डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह व उपस्थित अन्य।
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को ईको ब्रिक संरचनाओं की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण भी दिया गया।
डीडीयू के रोवर्स-रेंजर्स, फ्लाईअप फाउंडेशन एवं पूर्वांचल यूथ वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में नील गगन पूर्वांचल-ईको वॉरियर अभियान के तहत डीडीयू, एमएमएमयूटी और विभिन्न कॉलेजों के करीब 250 छात्र-छात्राओं को जोड़ा गया है। उन्हें ईको ब्रिक संरचनाएं बनाने के प्रशिक्षण देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन एवं सतत विकास के प्रति जागरूक भी किया गया है।
इस अवसर पर रोवर्स-रेंजर्स के समन्वयक प्रो. शरद मिश्र ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को पर्यावरण संरक्षण जैसे सकारात्मक कार्यों में जोड़ना समय की आवश्यकता है। प्रो. अजय शुक्ल ने कहा कि ईको ब्रिक केवल एक तकनीक नहीं बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली का संदेश है। डॉ. दीपेन्द्र मोहन सिंह ने कहा कि यह अभियान सामाजिक जागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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टीएसआई रामवृक्ष यादव ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट आज एक गंभीर समस्या है। यह पहल परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगी।
छात्रनेता नारायण दत्त पाठक ने कहा कि ईको ब्रिक प्लास्टिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग की एक अभिनव एवं पर्यावरण हितैषी तकनीक है, जिसमें उपयोग किए गए प्लास्टिक कचरे को प्लास्टिक बोतलों में अत्यधिक दबाव के साथ भरकर मजबूत ''''ईको ब्रिक'''' तैयार की जाती है। अब तक करीब एक क्विंटल प्लास्टिक कचरे से विभिन्न संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं। इस अवसर पर अभय सिंह आदि मौजूद रहे।
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डीडीयू के रोवर्स-रेंजर्स, फ्लाईअप फाउंडेशन एवं पूर्वांचल यूथ वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में नील गगन पूर्वांचल-ईको वॉरियर अभियान के तहत डीडीयू, एमएमएमयूटी और विभिन्न कॉलेजों के करीब 250 छात्र-छात्राओं को जोड़ा गया है। उन्हें ईको ब्रिक संरचनाएं बनाने के प्रशिक्षण देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन एवं सतत विकास के प्रति जागरूक भी किया गया है।
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इस अवसर पर रोवर्स-रेंजर्स के समन्वयक प्रो. शरद मिश्र ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को पर्यावरण संरक्षण जैसे सकारात्मक कार्यों में जोड़ना समय की आवश्यकता है। प्रो. अजय शुक्ल ने कहा कि ईको ब्रिक केवल एक तकनीक नहीं बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली का संदेश है। डॉ. दीपेन्द्र मोहन सिंह ने कहा कि यह अभियान सामाजिक जागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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टीएसआई रामवृक्ष यादव ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट आज एक गंभीर समस्या है। यह पहल परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगी।
छात्रनेता नारायण दत्त पाठक ने कहा कि ईको ब्रिक प्लास्टिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग की एक अभिनव एवं पर्यावरण हितैषी तकनीक है, जिसमें उपयोग किए गए प्लास्टिक कचरे को प्लास्टिक बोतलों में अत्यधिक दबाव के साथ भरकर मजबूत ''''ईको ब्रिक'''' तैयार की जाती है। अब तक करीब एक क्विंटल प्लास्टिक कचरे से विभिन्न संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं। इस अवसर पर अभय सिंह आदि मौजूद रहे।