छात्रों में मची रही होड़: BA को सिविल सर्विसेज की तैयारी का आधार बना रहे विद्यार्थी, चुन रहे पसंदीदा विषय
गोविवि समन्वयक प्रवेश परीक्षा डॉ. विनय सिंह ने कहा कि बीए और एमए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी व अर्थशास्त्र में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों में रुझान अधिक है। पहले से दूसरी काउंसिलिंग में ही इन विषयों की सीटें फुल हो गई। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिए यह विषय पहली पसंद बने हुए हैं।
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गोरखनाथ क्षेत्र के राजेंद्रनगर निवासी श्वेता तिवारी के पिता पीसीएस अधिकारी हैं। श्वेता ने इंटर तक की पढ़ाई कांवेंट स्कूल में साइंस विषय में की। परिवार के लोगों ने उसे बीटेक या साइंस से ही स्नातक करने की सलाह दी, लेकिन उसने परिवार के समक्ष सिविल सर्विसेज की तैयारी करने की इच्छा जताते हुए बीए करने की बात कही। बेटी की बात को पिता ने भी मान लिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में उसने अच्छा अंक प्राप्त किया।
परिणाम स्वरूप काउंसिलिंग के लिए जारी पहली लिस्ट में उसका नाम आ गया। उसने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के अनुरूप बीए में इतिहास, राजनीतिशास्त्र और हिंदी विषय को चुना। बाद में परिवार के दबाव पर उसने हिंदी को छोड़ अंग्रेजी विषय लिया। श्वेता का कहना है उसका मुख्य उद्देश्य सिविल सर्विसेज की तैयारी करना है।
यह तो महज बानगी भर है। आज के इस दौर में युवा भविष्य को लेकर काफी सतर्क हैं। छात्र-छात्राएं इंटर पास करने के बाद ही आगे चल कर क्या करना वह अपना लक्ष्य निर्धारित कर ले रहे हैं। छात्र-छत्राओं में आज भी सिविल सर्विसेज का क्रेज है। आईएएस व पीसीएस अधिकारी बनने का सपना पाले वह प्रारंभिक शिक्षा से अपने लक्ष्य के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं।
इंटर की पढ़ाई के बाद वह सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए बीए कर रहे हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया में बीए करने वाले अधिकतर विद्यार्थियों का लक्ष्य सिविल सर्विसेज या अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना है। वह बीए की पढ़ाई के लिए विषय का चयन भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के अनुरूप कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों के लिए बीए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी और हिंदी आदि विषय बने हुए हैं। बीए में इन विषयाें की अधिकतर सीटें प्रथम काउंसिलिंग में ही भर गईं। इन विषयों के प्रवेश नहीं मिलने पर वह दूसरे विषय का चयन कर रहे हैं।
इन विषयों में प्रवेश पाना रहा प्राथमिकता
कम आवेदन आने से इन विषयों की नहीं हुई प्रवेश परीक्षा
एमए संस्कृत में 132 सीट के सापेक्ष 50 आवेदन आए थे। सीटों के सापेक्षआधे से भी कम आवेदन आने पर प्रवेश परीक्षा नहीं कराई गई। काउंसिलिंग में सभी अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए बुलाया गया था, लेकिन 31 ने ही काउंसिलिंग कराने पहुंचे। दर्शनशास्त्र, रक्षा अध्ययन जैसे विषय में भी सीटों के बराबर आवेदन नहीं आने के कारण प्रवेश परीक्षा नहीं कराई गई। रक्षा अध्ययन में 55 सीटों के सापेक्ष 25 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई है। एमए उर्दू में 66 सीटों के लिए करीब 100 आवेदन आए थे। इसमें से अभी 52 सीटों पर ही अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराए हैं।
गोविवि समन्वयक प्रवेश परीक्षा डॉ. विनय सिंह ने कहा कि बीए और एमए में इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी व अर्थशास्त्र में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों में रुझान अधिक है। पहले से दूसरी काउंसिलिंग में ही इन विषयों की सीटें फुल हो गई। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिए यह विषय पहली पसंद बने हुए हैं। वहीं कुछ विषयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों का रुझान कम हुआ है।