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गोरखपुर: राइस मिलर्स की हैसियत का भी होगा सत्यापन, इस खास वजह से लिया गया निर्णय
Thu, 07 Oct 2021 02:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 02:46 PM IST
सार
क्षेत्रीय खाद्य निगम के डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि किसानों से खरीदा गया धान का चावल बनाने के लिए राइस मिलर्स को दिया जाता है। इस बार से धान मिल मालिकों की हैसियत का आकलन करने की व्यवस्था की जा रही है। अब धान कूटने वाले मिल मालिकों को आवेदन के साथ एसडीएम की ओर से जारी हैसियत प्रमाणपत्र भी लगाना होगा।
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सहजनवां में बंद राइस मिल।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में किसानों से खरीदा गया धान अब राइस मिलों को उनकी चल-अचल संपत्ति की कीमत से अधिक नहीं दिया जाएगा। यह कवायद इसलिए की जा रही है ताकि, राइस मिलर्स धान की हेराफेरी करते हैं तो उनकी संपत्ति नीलाम कर धान की कीमत वसूली जा सके। बीते वर्षों राइस मिलर्स के धान हड़प कर फरार होने की घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
क्षेत्रीय खाद्य निगम के डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि किसानों से खरीदा गया धान का चावल बनाने के लिए राइस मिलर्स को दिया जाता है। इस बार से धान मिल मालिकों की हैसियत का आकलन करने की व्यवस्था की जा रही है। अब धान कूटने वाले मिल मालिकों को आवेदन के साथ एसडीएम की ओर से जारी हैसियत प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। डीएम विजय किरन आनंद ने सभी एसडीएम को मिल मालिकों का हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
हैसियत प्रमाण पत्र में चावल मिल के मालिक और हिस्सेदार की चल-अचल संपत्तियों का विवरण और अनुमानित मूल्य दर्ज किया जाएगा। मिल मालिक को उसकी हैसियत के आधार पर ही धान की मात्रा आवंटित की जाएगी। धान, चावल की क्षति होने की स्थिति में डीएम मिलर की संपत्ति से वसूली करेंगे।
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डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि राइस मिल मालिक का ऑनलाइन आवेदन मिलते ही तीन दिन के भीतर जांच करा हैसियत प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
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क्षेत्रीय खाद्य निगम के डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि किसानों से खरीदा गया धान का चावल बनाने के लिए राइस मिलर्स को दिया जाता है। इस बार से धान मिल मालिकों की हैसियत का आकलन करने की व्यवस्था की जा रही है। अब धान कूटने वाले मिल मालिकों को आवेदन के साथ एसडीएम की ओर से जारी हैसियत प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। डीएम विजय किरन आनंद ने सभी एसडीएम को मिल मालिकों का हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
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हैसियत प्रमाण पत्र में चावल मिल के मालिक और हिस्सेदार की चल-अचल संपत्तियों का विवरण और अनुमानित मूल्य दर्ज किया जाएगा। मिल मालिक को उसकी हैसियत के आधार पर ही धान की मात्रा आवंटित की जाएगी। धान, चावल की क्षति होने की स्थिति में डीएम मिलर की संपत्ति से वसूली करेंगे।
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डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि राइस मिल मालिक का ऑनलाइन आवेदन मिलते ही तीन दिन के भीतर जांच करा हैसियत प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
करोड़ों का सरकारी धान हड़पने वाले राइस मिलर्स की संपत्ति जब्त
उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन का 6.39 करोड़ रुपये कीमत का धान हड़पने वाली जेडास इंडस्ट्रीज के मालिक और हिस्सेदारों की चल अचल संपत्ति जब्त कर ली गई। प्रशासन अब इस संपत्ति नीलामी करा, हड़पे गए धान की कीमत वसूलने की तैयारी कर रहा है। क्षेत्रीय खाद्य निगम के डिप्टी आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि गीडा थाना क्षेत्र के लखनापार निवासी ध्रुव नारायण सिंह की जेडास राइस मिल को वर्ष 2020-21 में 6,39,15,605 रुपये कीमत का धान कूटने के लिए आवंटित किया गया था। मिल मालिक ने चावल बना कर दिया ही नहीं। अप्रैल-मई में मिल की जांच की गई तो वह बंद पाई गई।
मिल और उसके गोदाम में सरकार की ओर से जारी किया गया धान भी नहीं मिला। इस पर मिल को सील कर दिया गया था। मालिक ध्रुव नारायण सिंह, हिस्सेदार संदीप कुमार, अजीत कुमार सहित तीन महिला पार्टनर के खिलाफ सहजनवां थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। ध्रुव नारायण सिंह को जेल भेजा गया था।
अब हड़पे गए धान की कीमत वसूलने के लिए ध्रुव नारायण सिंह और उसके हिस्सेदारों की अचल संपत्ति जब्त कर ली गई है। इन लोगों की लखनापार, महोदिया, मल्हीपुर, अकुआपार स्थित जमीन जब्त की गई है। इन जमीनों की नीलामी प्रक्रिया जल्द ही कराई जाएगी। नीलामी की रकम उप्र कोऑपरेटिव फेडरेशन को सौंपी जाएगी। ध्रुव नारायण सिंह से अभी तक 43.50 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
गीडा सेक्टर 13 स्थित स्वास्तिक राइस मिल भी वर्ष 2018-19 में डिफाल्टर घोषित की जा चुकी है। इसके मालिक राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को उस वर्ष 4.665 करोड़ रुपये कीमत का धान कूटने के लिए आवंटित किया गया था लेकिन कंपनी ने न तो धान का हिसाब दिया और न ही कूट कर चावल वापस किया। इस कंपनी में मालिकों को भी नोटिस जारी की गई है। जल्द ही रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मिल और उसके गोदाम में सरकार की ओर से जारी किया गया धान भी नहीं मिला। इस पर मिल को सील कर दिया गया था। मालिक ध्रुव नारायण सिंह, हिस्सेदार संदीप कुमार, अजीत कुमार सहित तीन महिला पार्टनर के खिलाफ सहजनवां थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। ध्रुव नारायण सिंह को जेल भेजा गया था।
अब हड़पे गए धान की कीमत वसूलने के लिए ध्रुव नारायण सिंह और उसके हिस्सेदारों की अचल संपत्ति जब्त कर ली गई है। इन लोगों की लखनापार, महोदिया, मल्हीपुर, अकुआपार स्थित जमीन जब्त की गई है। इन जमीनों की नीलामी प्रक्रिया जल्द ही कराई जाएगी। नीलामी की रकम उप्र कोऑपरेटिव फेडरेशन को सौंपी जाएगी। ध्रुव नारायण सिंह से अभी तक 43.50 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
गीडा सेक्टर 13 स्थित स्वास्तिक राइस मिल भी वर्ष 2018-19 में डिफाल्टर घोषित की जा चुकी है। इसके मालिक राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को उस वर्ष 4.665 करोड़ रुपये कीमत का धान कूटने के लिए आवंटित किया गया था लेकिन कंपनी ने न तो धान का हिसाब दिया और न ही कूट कर चावल वापस किया। इस कंपनी में मालिकों को भी नोटिस जारी की गई है। जल्द ही रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।