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हिंदी के बलबूते करियर बनाने वाले युवाओं ने कही बड़ी बात, हिंदी पर है हमें अभिमान, हर कदम बढ़ाती है मान

Sun, 16 Aug 2020 02:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 16 Aug 2020 02:19 PM IST
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special story of Youth who make career in Hindi
gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।

एक भाषा के तौर पर हिंदी हमें वह सबकुछ देती है जिस पर हम गर्व कर सकें। इसीलिए गर्व से कहते भी हैं कि 'हिंदी हैं हम'। समाज के अलग-अलग क्षेत्र में लोगों के उनके कर्म से, बाजार से, अभिनय से, ज्योतिष और पेशे से हिंदी जोड़ती है। हिंदी को करियर का जरिया बनाकर आगे बढ़ने वाले युवा वर्ग का कहना है कि हिंदी तो हर वर्ग की जरूरत है। हमें हिंदी पर अभिमान है। हर किसी को इस पर गर्व होना चाहिए।

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हिंदी के बलबूते शिक्षक बना
गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. प्रत्यूष दुबे ने बताया कि लोगों में भ्रम है कि हिंदी करियर के लिहाज से उपयोगी नहीं है। अनुवाद, शिक्षा, राजभाषा अधिकारी, पत्रकारिता और लेखन जैसे बहुत सारे क्षेत्र हैं जहां करियर बना सकते हैं। मैंने हिंदी को कॅरियर के रूप में लिया। स्नातक के बाद परास्नातक में भी हिंदी को चुना। फिर शोध किया। गर्व से कह सकता हूं कि आज शिक्षक बना हूं तो हिंदी के बलबूते।
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हिंदी ऐसी भाषा है, जिसमें सरलता से भावों को अभिव्यक्त कर लेते हैं। स्नातक स्तर पर हिंदी के साथ अंग्रेजी या संस्कृत लें। युवा वर्ग को एक सलाह जरूर दूंगा कि रोजाना सोने से पहले हिंदी की एक कहानी जरूर पढ़ें, इससे हिंदी के प्रति उनकी रुचि बढ़ जाएगी।

बिना हिंदी के वकालत कर ही नहीं सकते

सिविल कोर्ट बार के अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने बताया कि विधि की पढ़ाई कर रहा था तो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पुस्तकें उपलब्ध थीं, लेकिन जब प्रैक्टिस करने आया तो यहां अलग अनुभव हुआ। हिंदी के बगैर तो कोई वकालत कर ही नहीं सकता है। उदाहरण के तौर पर आप कितने ही बड़े वकील हों, अगर अपने मुवक्किल से अंग्रेजी में बात करेंगे तो दोबारा वह आपके पास नहीं आएगा।

अधिवक्ता ने बताया कि मेरे कई अधिवक्ता साथी हैं, जिनकी हिंदी कमजोर है। वे समझने के लिए हमारे पास आते हैं। हिंदी ऐसी भाषा है जिसमें सहजता से लोगों को बातें समझाई जा सकती हैं। मेरा इतना ही कहना है कि आप कई भाषा जानिए, अच्छी बात है, लेकिन हिंदी को जानना और समझना बहुत जरूरी है।

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हिंदी के बगैर ज्योतिष है अधूरा
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि संस्कृत का ज्ञान बहुत कम लोगों को है। जबकि हिंदी आम जनमानस की भाषा है। हिंदी के बगैर तो ज्योतिष अधूरा है। आज पंचांग से लेकर बहुत सारी ज्योतिष की पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध हैं। हर कोई अध्ययन करके ज्योतिष को समझ सकता है। पंचांग को जान सकता है।

अपने त्योहार और शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। यही नहीं, आज के समय में ज्योतिष को करियर बनाने के लिहाज से कई विश्वविद्यालयों में कोर्स चलाए जा रहे हैं। यह करियर के लिए भी बेहतर विकल्प बन सकता है, लेकिन तभी जब आपको हिंदी की अच्छी जानकारी होगी।

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