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मातृभाषा को लेकर विद्वानों ने कही बड़ी बात, भाषा ही नहीं हमारी संस्कृति और संस्कार भी है 'हिंदी'

Mon, 10 Aug 2020 03:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 10 Aug 2020 03:13 PM IST
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special story of Amar Ujala foundation Hindi hain hum abhiyan Scholars reveal ideas
विद्वानों ने कहा बाजार और बोलचाल में प्रयोग से हो रहा है हिंदी का विस्तार। - फोटो : अमर उजाला।
विद्वान मानते हैं कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कार भी है। यही वजह है कि जब कोई भाषा विलुप्त होती है तो एक संस्कृति का पतन हो जाता है। इसका मतलब है कि जब कोई भाषा समृद्ध होती है तो संस्कृति भी समृद्ध होती है। भले ही हिंदी को रोजगार की भाषा नहीं माना जाता है, लेकिन बोलचाल और बाजार में हिंदी के बिना काम नहीं चल पाता है।
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यही वजह है कि विदेशी कलाकार भी हिंदी फिल्मों में अभिनय करने के लिए हिंदी सीखते हैं। बहुराष्टीय कंपनियों के बड़े-बड़े अधिकारी भी हिंदी में बातें करते हैं। यह हिंदी का दम है कि विदेशी कंपनियों के उत्पादों का विज्ञापन हिंदी भाषा में बनाया जाता है। अमर उजाला की मुहिम हिंदी हैं हम को लोगों की काफी सराहना मिल रही है। लोग इस अभियान में बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं। आप भी इस अभियान में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करिए और हिंदी को समृद्ध करने में भागीदार बनिए।
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हिंदी से जुड़ना मतलब संस्कारों से जुड़ना
हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने बताया कि आचार्य विनोबा भावे ने हिंदी को बहुत सरल भाषा कहा था। उनकी बात इसलिए भी प्रमाणिक माननी चाहिए, क्योंकि वे दर्जनों भाषा के जानकार थे। हिंदी भाषा के विकास में हिंदी के ही लोग बाधक बन रहे हैं। हर सक्षम परिवार अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भेज रहा है।
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मेरी प्रारंभिक शिक्षा हिंदी में हुई, जबकि आजकल के बच्चे हिंदी भाषा से कट जा रहे हैं। इससे वे अपनी भाषा से ही नहीं, बल्कि संस्कृति व संस्कारों से भी कट जाएंगे। नई शिक्षा नीति में मातृ भाषाओं को महत्व देने की बात कही जा रही है, इससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में होगी। यह आवश्यक होने के साथ उपयोगी भी है।

हिंदी बहुत सबल और सक्षम भाषा है

आलोचक एवं साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ला ने बताया कि अमर उजाला की पहल बहुत अच्छी है। हिंदी में बहुत सारी विधाएं हैं, जो अन्य किसी भाषा में नहीं हैं। मेरा मानना है कि हिंदी बहुत सबल और सक्षम भाषा है। इसका मुकाबला किसी और भाषा से नहीं हो सकता है। हिंदी का विकास उसके भीतरी गुण के चलते तेजी से हो रहा है।

एक बात जरूर है कि तुकबंदी कविताओं का लेखन तेजी से हुआ है, जिन्हें ककहरा भी नहीं आता वे पुस्तकें लिख रहे हैं और पुस्तकें पुरस्कृत भी हो रहीं हैं। गांव से लेकर शहर तक कुछ लोग हिंदी के प्रति भ्रम फैला रहे हैं, बावजूद इसके हिंदी भाषा निरंतर समृद्ध हो रही है।

हिंदी हैं हम से गर्व महसूस होता है
साहित्यकार रवींद्र श्रीवास्तव जुगानी भाई ने बताया कि हिंदी हैं हम से गर्व महसूस होता है। हिंदी एक विशाल माला है, उसमें गुथी हुई गोलियां कड़ी हैं। कड़ी कमजोर हो जाएगी तो समूची माला बेकार हो जाएगी। इसलिए कड़ी को मजबूत करने की जरूरत है।

हिंदी को हम राष्ट्रभाषा नहीं बना सके। इसकी वजह से हम इसे मातृभाषा भी कहते हैं। जबकि मातृभाषा भोजपुरी और अवधी आदि हैं। इसलिए जनपदीय भाषा को मजबूत करने की जरूरत है। नई शिक्षानीति में मातृभाषा पर जोर दिया गया है। यह एक शुभ संकेत है, भविष्य में तमाम समस्याओं का समाधान इससे हो जाएगा।

रोजगार की नहीं, लेकिन बाजार की भाषा है हिंदी
कवि एवं साहित्यकार देवेंद्र आर्य ने बताया कि शिक्षातंत्र मातृभाषा को समृद्धि प्रदान करने के खिलाफ रहा है। स्कूली स्तर पर ही बच्चा मातृभाषा से कटने लगता है। हिंदी कभी रोजगार की भाषा नहीं बन पाई, लेकिन बाजार की भाषा बन गई। हम अंग्रेजी की ओर भाग रहे हैं, जबकि बाजार हिंदी की ओर भाग रहा है। हिंदी का प्रबंधन करने वाले भी अंग्रेजी के हैं।

बाजार से जोड़ने और सांस्कृतिक लगाव से ही कोई भाषा समृद्ध होती है। यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि हिंदी को सम्मान से नहीं जोड़ा जाएगा। हिंदी भले ही कविता-कहानी तक सीमित होती जा रही है लेकिन बोलचाल में और बाजार में हिंदी का विस्तार तेजी से हो रहा है। 

ऐसे बन सकते हैं अभियान का हिस्सा

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिंदी हैं हम अभियान की शुरुआत की गई है। यह श्रृंखला छह सप्ताह तक चलेगी। इससे जुड़कर आप मातृभाषा को और समृद्धशाली बना सकते हैं। आपको निम्नलिखित विषयों पर तीस सेकंड का वीडियो बनाकर व्हाट्सएप करना है।

बच्चों के लिए: हमारा अखबार
रोजाना अमर उजाला अखबार पढ़ें। जो खबर या लेख पसंद आए उसे पढ़कर वीडियो बनाएं।

माता-पिता के लिए: हमारा संस्कार
हिंदी साहित्य के किसी भी प्रसिद्ध और प्रिय रचनाकार की रचना का अंश पढ़ें और रिकार्ड करें। यह कहानी, कविता, निबंध और उपन्यास जैसी कोई भी विधा हो सकती है।

युवाओं के लिए: हमारा संसार
नए समय के नए अनुभव और नए जमाने की नई बात करें या किसी भी प्रिय रचना का अंश पढ़ें और वीडियो रिकार्ड करके भेजें।

दानी-नानी के लिए: हमारा प्यार
बच्चों को सुनाएं जो किस्से, लोकगीत या गुजरे दिन की बातें जिनसे आनंद भी आया और सीख भी मिली, उसे रिकार्ड करके भेजें।

ऐसे अपलोड करें वीडियो

तीस सेकंड का वीडियो रिकार्ड करें
व्हाट्सएप  करें 9711616205
 
नोट: ध्यान रहे कि वीडियो की शुरुआत में अपना नाम, पता, उम्र, पढ़ाई या बाकी परिचय संक्षेप में बोलकर रिकार्ड करें।

मिलेगा पुरस्कार
हर वर्ग में हर हफ्ते प्रमाणपत्र और किताबों सहित कुछ उपहार घोषित होंगे। श्रृखंला पूरे छह सप्ताह तक चलेगी। इनमें से चुने हुए प्रतिभागियों को सितंबर-हिंदी माह में मातृभाषा पर विशेष वेबिनार में बोलने का मौका मिलेगा।
#हिंदीहैंहम
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