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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Kargil Vijay Diwas 2020 in Hindi: Special story of Lt. Gautam martyred in Jammu

Kargil War Vijay Diwas 2020: बंकर में फंसे आठ साथियों को रॉकेट लांचर से बचाने में शहीद हुए थे लेफ्टिनेंट गौतम

Sun, 26 Jul 2020 12:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 26 Jul 2020 12:25 PM IST
सार

  • पांच अगस्त 1999 को तंगधार में रॉकेट के हमले से साथी को बचाने में हुए शहीद
  • देहरादून में रहता है परिवार, कूड़ाघाट तिराहे पर लगी है उनकी प्रतिमा

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Kargil Vijay Diwas 2020 in Hindi: Special story of Lt. Gautam martyred in Jammu
-कारगिल विजय दिवस: शहीद गौतम गुरुंग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अमर शहीद गौतम गुरुंग की सांसें जहां देश के काम आईं वहीं अब उनकी यादें भी कइयों की जिंदगी संवार रही है। जंग में पांच अगस्त 1998 को बंकर में फंसे आठ साथियों को बचाने के दौरान रॉकेट लांचर से घायल हुए गौतम शहीद हो गए।

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इसके बाद देश सेवा के जज्बे को रिटायर्ड ब्रिगेडियर पिता ने आगे बढ़ाया और शहादत पर मिली आर्थिक सहायता और पेंशन की रकम को कईयों की जिंदगी संवारने का जरिया बना डाला।
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भारत नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि शहीद के ब्रिगेडियर पिता ने देहरादून में बेटे के नाम पर शहीद गौतम गुरुंग ट्रस्ट की स्थापना की है। उनके नाम पर वहां बॉक्सिंग क्लब भी चल रहा। यहां से प्रशिक्षित कई युवा सरकारी नौकरी में हैं।
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उन्होंने बताया कि गौतम की चार पीढ़ियों ने लगातार देश की सेवा की है। गौतम जीआरडी के पूर्व कमांडेंट पीएस गुरुंग और पुष्पलता के एकलौते बेटे थे। देहरादून में 23 अगस्त 1973 को जन्मे गौतम एमबीए के बाद सेना में भर्ती हुए। पिता की बटालियन 3/4 गोरखा रायफल्स से 1997 में कमीशन लिया।


 

बहन मीनाक्षी की अधूरी ख्वाहिश

पहली तैनाती जम्मू कश्मीर में मिली। चार अगस्त 1998 को जंग के दौरान साथियों को बचाने में घायल हुए और पांच अगस्त को उन्हें शहादत हासिल हुई। उनकी बहादुरी को देखते हुए वर्ष 2000 में उनके अदम्य शौर्य और साहस को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें सेना मेडल से नवाजा।

गौतम गुरुंग की छोटी बहन मीनाक्षी रक्षाबंधन आने पर तड़प उठती हैं। उन्होंने जिस शाम भाई को भेजने के लिए राखी खरीदी थी, उसी शाम भाई के शहीद होने की खबर आई। वो राखी आज भी मीनाक्षी ने संभाल कर रखी है।

गौतम गुरुंग को समर्पित है तिराहा
कारगिल जंग में जीआरडी इलाके में रहने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग इसके बाद देहरादून में पैतृक गांव चले गए। भारत नेपाल मैत्री समाज के प्रयास से कूड़ाघाट तिराहे पर गौतम गुरुंग की प्रतिमा लगाई है। अब यह शहीद गौतम गुरुंग तिराहे के नाम से जाना जाता है।

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