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अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस मंदिर में की थी शिवलिंग की स्थापना, आज भी मौजूद हैं साक्ष्य

Sun, 31 May 2020 12:23 PM IST
vivek shukla अमित श्रीवास्तव, बस्ती (महराजगंज)।
अमित श्रीवास्तव, बस्ती (महराजगंज)। Published by: vivek shukla Updated Sun, 31 May 2020 12:23 PM IST
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Special story of Jhanginath temple in Maharajganj Basti
झूंगीनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

बस्ती जिले के महराजगंज क्षेत्र का झूंगीनाथ मंदिर क्षेत्रीय लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। अज्ञातकाल में पांडवों द्वारा झूंगीनाथ में शिवलिंग की स्थापना की गई थी। यहां पर क्षेत्रीय लोगों के साथ साथ आसपास जिले के लोग भी पूजा पाठ करने के लिए आते हैं।

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कप्तानगंज थाना क्षेत्र के कप्तानगंज से दुबौलिया मार्ग पर 8 किलोमीटर दूरी पर मनोरमा के तट पर झूंगीनाथ मंदिर है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा पाठ के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ रहती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि झूंगीनाथ मन्दिर (पांडव नगर) प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक स्थल के रूप में माना जाता है।
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मनोरमा नदी के तट पर इस मंदिर में अज्ञातवास के समय में पांचों पांडवों ने यहां पर काफी समय गुजारा था। उस दौरान सिद्धव दानव सहित कई असुरों का संहार किया था। सिद्धव नाला आज भी बगल गांव से निकलता है।
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झूंगीनाथ मंदिर का है खास महत्व

पांडवों ने पूजा पाठ करने के लिए झूंगीनाथ नाथ मंदिर पर जाते थे। पांडवों ने ही झूंगीनाथ मंदिर पर शिवलिंग की स्थापना की थी। पंडुलघाट के बगल में रसोइया गांव हैं, जहां पर पांडवों का भोजन बनता था।

पांडवों ने अज्ञातवास के समय पूरे क्षेत्र में कई छाप छोड़े हैं जो आज भी देखने को मिलता है। महाशिवरात्रि और सावन माह में कावड़ियों द्वारा यहां पर जलाभिषेक किया जाता है। चैत्र पूर्णिमा में भी यहां बड़ा मेला लगता है।

क्षेत्र के गोविंदपारा गांव के रहने वाले शिव सेना के नेता ध्रुवचन्द्र पाठक, मानपुर के नरेंद्र नाथ त्रिपाठी, संतोष पाठक प्रधान ने बताया कि झूंगीनाथ मंदिर पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का केंद्र है। उसके बाद भी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिससे वहां पर अभी तक सौंदरीकरण नहीं हो पाया है।
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