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UP Nikay Chunav 2023: सपा में मनमानी की दलदल, गोरखपुर में जिसे टिकट मिला वही निर्दल
Fri, 21 Apr 2023 10:54 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 21 Apr 2023 10:54 AM IST
सार
अलीमुननिसा ने 17 अप्रैल के पहले ही सपा की तरफ से नामांकन कर दिया था। 18 को जब नामांकन पत्रों की जांच हुई तो पहले पर्चा दाखिल कर दिए जाने की वजह से अलीमुननिसा को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी मान लिया गया और शमा निर्दल प्रत्याशी बन गईं।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
नगर निकाय चुनाव में अपनों को टिकट दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने ऐसा तानाबाना बुना कि चुनाव की तैयारी कर रहे पार्टी के ही कई नेता औंधे मुंह गिर गए। टिकट के लिए नाम सुझाने वाली स्क्रीनिंग कमेटी और शीर्ष नेतृत्व का गणित भी फेल हो गया। पहले वार्ड 61 में दो-दो प्रत्याशियों का सिंबल मिलना और फिर एक का निर्दल हो जाना चर्चा में रहा था। अब वार्ड नंबर 32 में टिकट बंटवारे पर घमासान सामने आया है।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर जिन्हें प्रत्याशी घोषित किया गया। वे न केवल निर्दल प्रत्याशी हो गए बल्कि कुछ को पर्चा भी उठाना पड़ गया। धुरंधरों की इस कारस्तानी का पार्टी, सोशल मीडिया से लेकर बाहर तक में विरोध हो रहा है।
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वार्ड नंबर 80, 69, 61, 54 और पांच के बाद अब वार्ड नंबर 32 में सपा के टिकट बंटवारे पर घमासान मचा है। आरोप है कि यहां से पूर्व डिप्टी मेयर भाेनू मुस्तफा की पत्नी अलीमुननिसा टिकट की दावेदारी कर रहीं थीं। उनकी पैरवी निवर्तमान महानगर अध्यक्ष कर रहे थे। मगर, पार्टी ने निवर्तमान पार्षद शमा याशनीन को उम्मीदवार बनाया। शमा की पैरवी, पूर्व विधायक विजय बहादुर की तरफ से हो रही थी। 16 अप्रैल की शाम पार्टी ने शमा को उम्मीदवार घोषित किया। 17 अप्रैल को उन्होंने पर्चा दाखिल किया।
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मगर, अलीमुननिसा ने 17 अप्रैल के पहले ही सपा की तरफ से नामांकन कर दिया था। 18 को जब नामांकन पत्रों की जांच हुई तो पहले पर्चा दाखिल कर दिए जाने की वजह से अलीमुननिसा को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी मान लिया गया और शमा निर्दल प्रत्याशी बन गईं। शमा ने आरोप लगाया है कि पार्टी के ही कुछ पदाधिकारियों ने साजिश के तहत प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी उन्हें निर्दल बना दिया, जिससे आहत होकर उन्होंने बृहस्पतिवार को अपना पर्चा ही वापस ले लिया।
प्रदेश अध्यक्ष का लेटर हो रहा वायरल
17 अप्रैल को शमा के पुत्र अनस चौधरी ने इसकी शिकायत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल से की। उसी दिन उनकी तरफ से रिटर्निंग ऑफिसर को संबोधित पार्टी के लेटर हेड पर एक पत्र जारी कर कहा गया कि वार्ड नंबर 32 से शमा याशनीन को ही अंतिम अनुमोदित प्रत्याशी माना जाए। मगर आरोप है कि पार्टी के एक पदाधिकारी ने इस पत्र को भी दबा लिया। यह पत्र भी सोशल मीडिया पर तैर रहा है।
महानगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने साजिश करते हुए अलीमुननिसा को फार्म ए, बी भी उपलब्ध करा दिया। मैंने इस पूरे खेल की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दी थी। प्रदेश अध्यक्ष ने आरओ के नाम से पत्र जारी कर मेरी मां को अधिकृत प्रत्याशी बताया था। मगर, महानगर अध्यक्ष ने यह पत्र भी दबवा दिया। - अनस चौधरी, पुत्र शमा याशनीन, वार्ड नंबर 32
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पार्टी ने मेरी मां अलीमुननिसा को प्रत्याशी घोषित किया है। धोखा तो हम लोगों के साथ हुआ है। शमा याशनीन ने आखिरी दिन 17 अप्रैल को नामांकन किया जबकि हमारा नामांकन इसके काफी पहले हो गया था। वार्ड की जनता का हमें अपार समर्थन है। हमें फर्जीवाड़ा या गुणा-भाग करने की क्या जरूरत है। - दानिश मुस्तफा, पुत्र, अलीमुननिसा।
अब जिसका नामांकन हो गया वही पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी माना जाएगा। कुछ मामले पेंचीदे होते हैं। ऐसे मामलों पर निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष करते हैं। आरोप लगाना ठीक बात नहीं है। - ब्रजेश गौतम, जिलाध्यक्ष, सपा।
शमा ने नामांकन में देरी कर दी जिसकी वजह से वह निर्दल घोषित हो गईं। मैं सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करता हूं। व्यक्तिगत तौर पर मैं किसी को प्रत्याशी या सिंबल फार्म नहीं दे सकता। - कृष्ण कुमार त्रिपाठी, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष, सपा।
महानगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने साजिश करते हुए अलीमुननिसा को फार्म ए, बी भी उपलब्ध करा दिया। मैंने इस पूरे खेल की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दी थी। प्रदेश अध्यक्ष ने आरओ के नाम से पत्र जारी कर मेरी मां को अधिकृत प्रत्याशी बताया था। मगर, महानगर अध्यक्ष ने यह पत्र भी दबवा दिया। - अनस चौधरी, पुत्र शमा याशनीन, वार्ड नंबर 32
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पार्टी ने मेरी मां अलीमुननिसा को प्रत्याशी घोषित किया है। धोखा तो हम लोगों के साथ हुआ है। शमा याशनीन ने आखिरी दिन 17 अप्रैल को नामांकन किया जबकि हमारा नामांकन इसके काफी पहले हो गया था। वार्ड की जनता का हमें अपार समर्थन है। हमें फर्जीवाड़ा या गुणा-भाग करने की क्या जरूरत है। - दानिश मुस्तफा, पुत्र, अलीमुननिसा।
अब जिसका नामांकन हो गया वही पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी माना जाएगा। कुछ मामले पेंचीदे होते हैं। ऐसे मामलों पर निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष करते हैं। आरोप लगाना ठीक बात नहीं है। - ब्रजेश गौतम, जिलाध्यक्ष, सपा।
शमा ने नामांकन में देरी कर दी जिसकी वजह से वह निर्दल घोषित हो गईं। मैं सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करता हूं। व्यक्तिगत तौर पर मैं किसी को प्रत्याशी या सिंबल फार्म नहीं दे सकता। - कृष्ण कुमार त्रिपाठी, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष, सपा।