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पिता की मौत के बाद सर्वेश्वर के कंधे पर थी घर की जिम्मेदारी
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पिता की मौत के बाद सर्वेश्वर के कंधे पर थी घर की जिम्मेदारी
गौरीबाजार/देसही देवरिया। मौत की खबर मिलते ही रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के जिगनी बाजार स्थित सर्वेश्वर के घर में कोहराम मच गया। मां शशिप्रभा देवी, पत्नी बबीता देवी, छोटे भाई तारकेश्वर का रो-रोकर बुरा हाल रहा। तीन साल के उनके बेटे हर्ष के सिर से पिता का साया उठ गया था।
सर्वेश्वर पटेल के पिता रमेश पटेल की सड़क हादसे में बहुत पहले मौत हो गई थी। दो भाइयों में वह बड़े थे। सर्वेश्वर जब करीब 14 साल के थे तभी उनके कंधों पर परिवार की सारी जिम्मेदारी अचानक आ गई थी। जिसका वह बखूबी निर्वहन भी कर रहे थे। होनहार और मृदुल स्वभाव के धनी सर्वेश्वर हालात से कभी टूटे नहीं और आगे बढ़कर न केवल परिवार का सहारा बने बल्कि बड़े भाई होने का फर्ज भी निभाने लगे। घर की माली हालत को ठीक करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। बखरा चौराहे पर ग्राहक सेवा केंद्र खोलकर दिन-रात मेहनत करने लगे। परिवार की हर सुख-सुविधा का ध्यान रखने वाले सर्वेश्वर गांव में काफी प्रिय थे।
इस वारदात से पूरे क्षेत्र के लोग गहरे सदमे में हैं। पत्नी बबीता एवं मासूम हर्ष को देख सभी इन्हें दिलासा दे रहे थे। साथ ही लुटेरों को कोस भी रहे थे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया?
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गौरीबाजार/देसही देवरिया। मौत की खबर मिलते ही रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के जिगनी बाजार स्थित सर्वेश्वर के घर में कोहराम मच गया। मां शशिप्रभा देवी, पत्नी बबीता देवी, छोटे भाई तारकेश्वर का रो-रोकर बुरा हाल रहा। तीन साल के उनके बेटे हर्ष के सिर से पिता का साया उठ गया था।
सर्वेश्वर पटेल के पिता रमेश पटेल की सड़क हादसे में बहुत पहले मौत हो गई थी। दो भाइयों में वह बड़े थे। सर्वेश्वर जब करीब 14 साल के थे तभी उनके कंधों पर परिवार की सारी जिम्मेदारी अचानक आ गई थी। जिसका वह बखूबी निर्वहन भी कर रहे थे। होनहार और मृदुल स्वभाव के धनी सर्वेश्वर हालात से कभी टूटे नहीं और आगे बढ़कर न केवल परिवार का सहारा बने बल्कि बड़े भाई होने का फर्ज भी निभाने लगे। घर की माली हालत को ठीक करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। बखरा चौराहे पर ग्राहक सेवा केंद्र खोलकर दिन-रात मेहनत करने लगे। परिवार की हर सुख-सुविधा का ध्यान रखने वाले सर्वेश्वर गांव में काफी प्रिय थे।
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इस वारदात से पूरे क्षेत्र के लोग गहरे सदमे में हैं। पत्नी बबीता एवं मासूम हर्ष को देख सभी इन्हें दिलासा दे रहे थे। साथ ही लुटेरों को कोस भी रहे थे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया?
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