{"_id":"6686a05363faf364b801523d","slug":"retired-department-head-of-gorakhpur-university-prof-shivaji-singh-passed-away-cm-paid-tribute-2024-07-04","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: नहीं रहे प्रो. शिवाजी सिंह, सीएम योगी ने कहा, इनका निधन राष्ट्र एवं समाज के लिए अपूरणीय क्षति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: नहीं रहे प्रो. शिवाजी सिंह, सीएम योगी ने कहा, इनका निधन राष्ट्र एवं समाज के लिए अपूरणीय क्षति
Thu, 04 Jul 2024 06:45 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Thu, 04 Jul 2024 06:45 PM IST
सार
प्रो शिवाजी सिंह के निधन पर सीएम योगी ने शोक जताते हुए दुख व्यक्त किया है। परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि शिवाजी सिंह ने अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भारतीय इतिहास लेखन को भारत केंद्रीय दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विज्ञापन
प्रो शिवाजी सिंह( फाइल फोटो) व सीएम योगी का शोक संदेश पत्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं आचार्य प्रो. शिवाजी सिंह का असामयिक निधन हो गया। इनके निधन पर सीएम योगी ने शोक जताते हुए दुख व्यक्त किया है। परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि शिवाजी सिंह ने अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भारतीय इतिहास लेखन को भारत केंद्रीय दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विज्ञापन
इनका निधन राष्ट्र एवं समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग में भी एक शोक सभा आयोजित की गई थी।
प्रो.राजवंत राव ने कहा कि प्रो. शिवाजी सिंह का निधन न सिर्फ उनके परिवार बल्कि सम्पूर्ण अकादमिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। वह एक प्रख्यात पुरातत्ववेत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान थे। प्रो. शिवाजी सिंह का निधन गुरुवार की सुबह 9:30 बजे के करीब ह्रदय गति रुक जाने के चलते हो गया।
विज्ञापन
शोक सभा में उन्हें याद करते हुए प्रो.राजवंत राव ने कहा कि प्रो. शिवाजी सिंह एथेन्स में रिसर्च फेलो रहे। उन्होंने आचार्य राजबली पांडेय के निर्देशन में मनुस्मृति पर शोध कार्य किया था। वह इतिहास के अध्ययन की पूर्णता के लिए साहित्य और पुरातत्व दोनों का अध्ययन आवश्यक मानते थे।
विज्ञापन
वह गहरी अकादमिक रुचि और अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। संस्कृति, साहित्य और पुरातत्व पर उनका समान अधिकार था। न्यू आर्कियोलॉजी में उनकी विशेषता थी।