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Gorakhpur News: असलहा तस्करी नेटवर्क में बंटी थी जिम्मेदारी, कमीशन पर पहुंचाते थे पिस्टल
Sat, 19 Sep 2026 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:29 AM IST
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गोरखपुर। लॉरेंस विश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे असलहा तस्करों से पूछताछ में एसटीएफ को नेटवर्क के भीतर काम के बंटवारे की जानकारी मिली है। जांच में सामने आया कि इसमें शामिल सभी लोग सीधे खरीद-बिक्री नहीं करते थे। गिरोह के कुछ गुर्गे असलहा लाने, कुछ स्थानीय स्तर पर पहुंचाने और कुछ बताए गए व्यक्ति तक पिस्टल पहुंचाने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था।
एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, जेल भेजे गए आरोपी अजीत यादव ने बताया कि श्रेयांश यादव और अंकित अग्रवाल उसे पिस्टल उपलब्ध कराते थे। इसके बाद दोनों जिन लोगों के नाम बताते थे, वह उन्हें असलहा पहुंचाता था। इसके बदले उसे प्रति पिस्टल कम से कम दो हजार रुपये मिलते थे। उसने तीन से चार साल से इस गतिविधि में शामिल होने और गोरखपुर व देवरिया में पिस्टल पहुंचाने की बात बताई। ऐसे ही अभिषेक गौड़ उर्फ भेली ने पूछताछ में बताया था कि वह शशांक पांडेय, अंकित और श्रेयांश के साथ मध्यप्रदेश जाकर असलहा लेने जाता था। बाद में उसकी बिट्टू इंदौरी से सीधे बातचीत होने लगी। श्रेयांश के कहने पर वह पिस्टल लेकर बताए गए व्यक्ति तक पहुंचाता था। उसने भी चार से पांच साल से इस गतिविधि में शामिल होने की बात कही।
राहुल गुप्ता ने बताया कि वह पहली बार श्रेयांश और अभिषेक गौड़ के साथ मध्यप्रदेश पिस्टल लेने गया था। उसने अधिक आमदनी के लालच में इस धंधे से जुड़ने की बात कही। पूछताछ में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के कुछ सदस्य असलहों को दूसरे राज्यों तक ले जाने में शामिल थे। श्रेयांश ने अपने, अंकित अग्रवाल और सुमित कुमार दिलावर के हरियाणा और महाराष्ट्र तक पिस्टल ले जाकर बेचने की बात बताई है। एसटीएफ इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि कर रही है। जांच में असलहों के गंभीर अपराधों में इस्तेमाल की कड़ी भी सामने आई है।
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अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी ने पूछताछ में बताया कि उसके जरिए बेची गई कुछ पिस्टल से हत्या और हत्या के प्रयास के मामले हुए थे और उन मामलों में वह जेल भी गया था। उसने विकास उर्फ विक्की ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश जाकर पिस्टल लेने की बात भी बताई है। एसटीएफ अब संबंधित मुकदमों और इन दावों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है।
पूछताछ में श्रेयांश ने प्रमोद यादव के लिए भी हत्या के इरादे से पिस्टल खरीदने की बात बताई है। एसटीएफ इस दावे की भी जांच कर रही है।
सप्लाई करने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में: पूछताछ में सामने आया कि नेटवर्क के कुछ सदस्य पिस्टल उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें बताए गए लोगों तक पहुंचाने का काम करते थे। अजीत ने बताया कि श्रेयांश व अंकित से पिस्टल लेकर वह उनके बताए लोगों तक पहुंचाता था। एसटीएफ अब यह पता कर रही है कि ऐसे माध्यमों से किन लोगों तक हथियार पहुंचे व उनका इस्तेमाल किन घटनाओं में हुआ।
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एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, जेल भेजे गए आरोपी अजीत यादव ने बताया कि श्रेयांश यादव और अंकित अग्रवाल उसे पिस्टल उपलब्ध कराते थे। इसके बाद दोनों जिन लोगों के नाम बताते थे, वह उन्हें असलहा पहुंचाता था। इसके बदले उसे प्रति पिस्टल कम से कम दो हजार रुपये मिलते थे। उसने तीन से चार साल से इस गतिविधि में शामिल होने और गोरखपुर व देवरिया में पिस्टल पहुंचाने की बात बताई। ऐसे ही अभिषेक गौड़ उर्फ भेली ने पूछताछ में बताया था कि वह शशांक पांडेय, अंकित और श्रेयांश के साथ मध्यप्रदेश जाकर असलहा लेने जाता था। बाद में उसकी बिट्टू इंदौरी से सीधे बातचीत होने लगी। श्रेयांश के कहने पर वह पिस्टल लेकर बताए गए व्यक्ति तक पहुंचाता था। उसने भी चार से पांच साल से इस गतिविधि में शामिल होने की बात कही।
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राहुल गुप्ता ने बताया कि वह पहली बार श्रेयांश और अभिषेक गौड़ के साथ मध्यप्रदेश पिस्टल लेने गया था। उसने अधिक आमदनी के लालच में इस धंधे से जुड़ने की बात कही। पूछताछ में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के कुछ सदस्य असलहों को दूसरे राज्यों तक ले जाने में शामिल थे। श्रेयांश ने अपने, अंकित अग्रवाल और सुमित कुमार दिलावर के हरियाणा और महाराष्ट्र तक पिस्टल ले जाकर बेचने की बात बताई है। एसटीएफ इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि कर रही है। जांच में असलहों के गंभीर अपराधों में इस्तेमाल की कड़ी भी सामने आई है।
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अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी ने पूछताछ में बताया कि उसके जरिए बेची गई कुछ पिस्टल से हत्या और हत्या के प्रयास के मामले हुए थे और उन मामलों में वह जेल भी गया था। उसने विकास उर्फ विक्की ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश जाकर पिस्टल लेने की बात भी बताई है। एसटीएफ अब संबंधित मुकदमों और इन दावों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है।
पूछताछ में श्रेयांश ने प्रमोद यादव के लिए भी हत्या के इरादे से पिस्टल खरीदने की बात बताई है। एसटीएफ इस दावे की भी जांच कर रही है।
सप्लाई करने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में: पूछताछ में सामने आया कि नेटवर्क के कुछ सदस्य पिस्टल उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें बताए गए लोगों तक पहुंचाने का काम करते थे। अजीत ने बताया कि श्रेयांश व अंकित से पिस्टल लेकर वह उनके बताए लोगों तक पहुंचाता था। एसटीएफ अब यह पता कर रही है कि ऐसे माध्यमों से किन लोगों तक हथियार पहुंचे व उनका इस्तेमाल किन घटनाओं में हुआ।