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गोरखपुर: विद्युत कनेक्शन कटने के बाद भी भेज दी 16 लाख रुपये की आरसी, वसूली के लिए पहुंची टीम तो हक्का-बक्का रह गए व्यापारी
Wed, 18 Aug 2021 01:52 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 18 Aug 2021 01:52 PM IST
सार
उन्होंने तत्काल आवेदन देकर उसे बंद करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी औपचारिकता पूरी कर फर्जी कनेक्शन आईडी की पर्सनल डिस्कनेक्शन (पीडी) कराकर कार्यालय में कागज जमा करवा दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर के एक व्यापारी का एक किलोवॉट कॉमर्शियल बिजली कनेक्शन 2017 में ही विच्छेदित होने के बाद भी 16 लाख रुपये की बकाएदारी के वसूली के लिए आरसी जारी कर दी गई। चार दिन पहले तहसील की टीम जब उनके दरवाजे पहुंची तो उन्हें पता चला। उन्होंने इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज करा दी है।
दरअसल, शहर के बेतियाहाता क्षेत्र में कार बाजार नाम से प्रतिष्ठान चलाने वाले मनोज कुमार रुंगटा ने साल-2017 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने बताया कि विभागीय त्रुटिवश दो-दो कनेक्शन आईडी जनरेट हो गई। इसमें से एक कनेक्शन पर आने वाले बिल का भुगतान मनोज करते रहे। दूसरे कनेक्शन के बारे में जानकारी बाद में हुई।
उन्होंने तत्काल आवेदन देकर उसे बंद करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी औपचारिकता पूरी कर फर्जी कनेक्शन आईडी की पर्सनल डिस्कनेक्शन (पीडी) कराकर कार्यालय में कागज जमा करवा दिया।
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बताया कि इसके बाद भी उनकी पीडी पूरी नहीं हो सकी या होने के बाद भी उनका बिजली बिल बनता रहा। उन्हें जानकारी मार्च में आरसी होने के बाद हुई। बताया कि 14 अगस्त को मार्च की जारी आरसी दिखाते हुए राजस्व कर्मियों ने उन्हें बकाया भुगतान के लिए कहा। इसे देखकर उनके होश उड़ गए।
वहीं, निगम के जिम्मेदारों के अनुसार दूसरी फेक आईडी जिसके पीडी के लिए आवेदन किया गया था उसमें 30 हजार रुपये का बिल जमा होने की वजह से उनकी पीडी फंस गई। दोनों कनेक्शन अलग-अलग क्षमता के होने और कुछ रुपये भुगतान होने की वजह से मामला अटक गया होगा। हालांकि, 16 लाख रुपये बकाये की आरसी जाना गलत है। अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि उपभोक्ता सीधे अपने कागजों को ले जाकर अधिशासी अभियंता को दिखाएं। उनकी समस्या का समाधान करते हुए आरसी वापस ली जाएगी।
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दरअसल, शहर के बेतियाहाता क्षेत्र में कार बाजार नाम से प्रतिष्ठान चलाने वाले मनोज कुमार रुंगटा ने साल-2017 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने बताया कि विभागीय त्रुटिवश दो-दो कनेक्शन आईडी जनरेट हो गई। इसमें से एक कनेक्शन पर आने वाले बिल का भुगतान मनोज करते रहे। दूसरे कनेक्शन के बारे में जानकारी बाद में हुई।
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उन्होंने तत्काल आवेदन देकर उसे बंद करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी औपचारिकता पूरी कर फर्जी कनेक्शन आईडी की पर्सनल डिस्कनेक्शन (पीडी) कराकर कार्यालय में कागज जमा करवा दिया।
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बताया कि इसके बाद भी उनकी पीडी पूरी नहीं हो सकी या होने के बाद भी उनका बिजली बिल बनता रहा। उन्हें जानकारी मार्च में आरसी होने के बाद हुई। बताया कि 14 अगस्त को मार्च की जारी आरसी दिखाते हुए राजस्व कर्मियों ने उन्हें बकाया भुगतान के लिए कहा। इसे देखकर उनके होश उड़ गए।
वहीं, निगम के जिम्मेदारों के अनुसार दूसरी फेक आईडी जिसके पीडी के लिए आवेदन किया गया था उसमें 30 हजार रुपये का बिल जमा होने की वजह से उनकी पीडी फंस गई। दोनों कनेक्शन अलग-अलग क्षमता के होने और कुछ रुपये भुगतान होने की वजह से मामला अटक गया होगा। हालांकि, 16 लाख रुपये बकाये की आरसी जाना गलत है। अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि उपभोक्ता सीधे अपने कागजों को ले जाकर अधिशासी अभियंता को दिखाएं। उनकी समस्या का समाधान करते हुए आरसी वापस ली जाएगी।