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Gorakhpur News: अब गोरखनाथ पुल के पास रेल इंजनों की होगी मरम्मत, बन रहा वर्कशॉप
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रोजाना 30 इंजनों की मरम्मत की जाएगी, मार्च तक काम पूरा हो जाएगा
इसके बनने से इंजन को शंटिंग करके दूसरी लाइन पर ले जाने की जरूरत नहीं होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नंदानगर रेलवे क्राॅसिंग के पास बने एसी इलेक्ट्रिक लोको शेड के बाद अब धर्मशाला ओवरब्रिज के पास नया लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बन रहा है। रेलवे लाइन से जुड़े इस वर्कशाॅप में इलेक्ट्रिक इंजनों की सामान्य मरम्मत का कार्य होगा। इसी साल इंजनों की मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा।
गोरखपुर तक रेल लाइनों के विद्युतीकृत होने के साथ ही एयरफोर्स के सामने की जमीन पर लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बनाने की घोषणा हुई थी। 2018 में इसका निर्माण हो गया था। इस रेल मार्ग के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण होने पर इलेक्ट्रिक इंजनों की संख्या बढ़ी तो सामान्य मरम्मत कार्य का बोझ भी बढ़ा। कई बार रेल ट्रैक पर भी इंजनों में मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए धर्मशाला ओवरब्रिज के बगल की खाली जमीन पर नया लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बनाया जा रहा है।
वर्कशाॅप शुरू होने पर सामान्य मरम्मत के लिए नहीं जाना होगा लोको शेड
गोरखपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड में लखनऊ से लेकर छपरा तक जाने वाली ट्रेनों के इंजन की मरम्मत हो रही है। इस समय 47 इलेक्ट्रिक इंजन लोको शेड में मरम्मत के लिए आते हैं। यह संख्या और बढ़ रही है। इसके लिए एक अलग वर्कशॉप तैयार किया जा रहा है। नया वर्कशाॅप बन जाने पर बाराबंकी से छपरा के बीच चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों की पूरी मरम्मत गोरखपुर में ही हो जाएगी। उन्हें मरम्मत और रखरखाव आदि के लिए दूसरे रेलवे के लोको शेड में नहीं भेजना पड़ेगा।
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खास बात यह है कि इस शेड में मरम्मत होने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों पर गोरखपुर का नाम लिखा जाएगा। नियमानुसार इंजनों पर मरम्मत व रखरखाव करने वाले शेड का नाम दर्ज होता है। प्रत्येक 15 दिन में इस तरह की मरम्मत होती है। दूसरे शेड लाइट, मीडियम लाइट और हैवी मरम्मत का कार्य होगा। रास्ते में इंजन फेल होने की दशा में शेड से ही दूसरे इंजन की व्यवस्था हो जाएगी।
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इसके बनने से इंजन को शंटिंग करके दूसरी लाइन पर ले जाने की जरूरत नहीं होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। नंदानगर रेलवे क्राॅसिंग के पास बने एसी इलेक्ट्रिक लोको शेड के बाद अब धर्मशाला ओवरब्रिज के पास नया लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बन रहा है। रेलवे लाइन से जुड़े इस वर्कशाॅप में इलेक्ट्रिक इंजनों की सामान्य मरम्मत का कार्य होगा। इसी साल इंजनों की मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा।
गोरखपुर तक रेल लाइनों के विद्युतीकृत होने के साथ ही एयरफोर्स के सामने की जमीन पर लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बनाने की घोषणा हुई थी। 2018 में इसका निर्माण हो गया था। इस रेल मार्ग के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण होने पर इलेक्ट्रिक इंजनों की संख्या बढ़ी तो सामान्य मरम्मत कार्य का बोझ भी बढ़ा। कई बार रेल ट्रैक पर भी इंजनों में मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए धर्मशाला ओवरब्रिज के बगल की खाली जमीन पर नया लोको इलेक्ट्रिक वर्कशाॅप बनाया जा रहा है।
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वर्कशाॅप शुरू होने पर सामान्य मरम्मत के लिए नहीं जाना होगा लोको शेड
गोरखपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड में लखनऊ से लेकर छपरा तक जाने वाली ट्रेनों के इंजन की मरम्मत हो रही है। इस समय 47 इलेक्ट्रिक इंजन लोको शेड में मरम्मत के लिए आते हैं। यह संख्या और बढ़ रही है। इसके लिए एक अलग वर्कशॉप तैयार किया जा रहा है। नया वर्कशाॅप बन जाने पर बाराबंकी से छपरा के बीच चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों की पूरी मरम्मत गोरखपुर में ही हो जाएगी। उन्हें मरम्मत और रखरखाव आदि के लिए दूसरे रेलवे के लोको शेड में नहीं भेजना पड़ेगा।
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खास बात यह है कि इस शेड में मरम्मत होने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों पर गोरखपुर का नाम लिखा जाएगा। नियमानुसार इंजनों पर मरम्मत व रखरखाव करने वाले शेड का नाम दर्ज होता है। प्रत्येक 15 दिन में इस तरह की मरम्मत होती है। दूसरे शेड लाइट, मीडियम लाइट और हैवी मरम्मत का कार्य होगा। रास्ते में इंजन फेल होने की दशा में शेड से ही दूसरे इंजन की व्यवस्था हो जाएगी।