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Gorakhpur News: पूर्णिमा की मां ने लोन लेकर खरीदे थे हॉकी और जूते

Tue, 03 Oct 2023 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Tue, 03 Oct 2023 01:03 AM IST
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Purnima's mother had taken loan and bought hockey shoes and shoes.
हाकी खिलाड़ी पूर्णिमा।

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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। वाराणसी के हरहुआ चक्का की रहने वालीं स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर की छात्रा पूर्णिमा की मां अमरावती ने अपनी बेटी के हॉकी के शौक को पूरा करने के लिए लोन लिया और उसी पैसे से हॉकी और जूते खरीदकर दिए। जिसे लेकर वह गोरखपुर स्पोर्ट्स कॉलेज पहुंचीं। आज उस मां को अपनी बेटी पर नाज है।
बचपन से ही पूर्णिमा की रुचि खेलों में थी। इसकी शुरुआत क्रिकेट से हुई। सात-आठ साल की उम्र में वह बच्चों के साथ क्रिकेट खेला करती थीं। पूर्णिमा की रुचि को देखते हुए मां भी उसे प्रोत्साहित करने लगीं। जब पूर्णिमा नौ साल की हुईं तो उनका रुझान हॉकी की ओर हो गया। मां और परिवारवालों का साथ मिला तो वह गांव के पास ही विवेक एकेडमी में हॉकी का प्रशिक्षण लेने लगीं।
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इस दौरान जब स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिले के लिए फार्म निकला तो उन्होंने आवेदन कर दिया और चयन भी हो गया। पूर्णिमा के पिता कौशलेंद्र यादव पेशे से किसान हैं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहती थी, ऐसे में पूर्णिमा की मां ने बैंक से 1.25 लाख रुपये का लोन लिया और उस पैसों से हॉकी और जूते खरीदकर उन्हें गोरखपुर भेजा।
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यहां उन्हें कोच अर्जुन अवार्डी, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रेम माया का साथ मिला और फारवर्ड खिलाड़ी के रूप में खेलना शुरू किया। इस बीच उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। पिछले साल मणिपुर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक मिला और अब अपनी मेहनत के दम पर वह सब जूनियर भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल हुईं। पूर्णिमा हॉकी खिलाड़ी प्रीति दूबे को अपना रोल मॉडल मानती हैं।


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मुंबई में ट्रक ड्राइवर हैं कोमल के पिता
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। वाराणसी के रामेश्वर गांव की रहने वाली हॉकी खिलाड़ी कोमल पाल के पिता अभयराज पाल परिवार का खर्च चलाने के लिए मुंबई में ट्रक चलाते हैं, लेकिन घर खर्च नहीं चल पाता था। जिसके बाद मां बेटी के हॉकी खेलने के शौक को पूरा करने के लिए सिलाई का काम करने लगींं। जिसका नतीजा है कि आज मां-बाप के उम्मीदों पर खरा उतरते हुए कोमल ने भारतीय टीम में जगह बनाई है।
कोमल के पिता शादी के पहले से ही मुंबई में रहकर ट्रक चलाते थे। शादी के बाद वह पत्नी को लेकर मुंबई चले गए। कोमल भी साथ में रहने लगी। इस बीच बच्चों की पढ़ाई के लिए अभयराज पाल ने अपने परिवार को गांव भेज दिया। जहां कोमल का रुझान हॉकी की ओर होने लगा।
कोमल के खेल को देखकर पिता ने भी सहयोग करना शुरू कर दिया। उन्होंने कोमल का दाखिला गांव के पास ही विवेक स्पोर्ट्स एकेडमी में करा दिया। जहां वह हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त करने लगीं। बेटी के हॉकी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मां चिंता देवी भी घर में ही सिलाई का काम करने लगीं।

इस बीच जब स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में आवेदन के लिए फार्म आए तो कोमल ने भरा और चयन हो गया। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए कोमल ने डिफेंडर खिलाड़ी के रूप में दो बार खेलो इंडिया गेम में प्रतिभाग किया और फिर पिछले वर्ष मणिपुर राष्ट्रीय सब जूनियर हॉकी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। कोमल अपना रोल मॉडल हॉकी खिलाड़ी दीपेंदर पाल को मानती हैं।
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